स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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केंद्रीय राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 का शुभारंभ किया; युवाओं से तंबाकू और नशे की लत के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नेतृत्व करने का आह्वान किया


स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को तंबाकू और नशे की लत से बचाना आवश्यक है: श्री प्रतापराव जाधव

केंद्रीय मंत्री ने 'तंबाकू को कहें ना' की ‘शपथ’ दिलाई; युवाओं से तंबाकू मुक्त भारत के दूत बनने का आग्रह किया

अभियान के पिछले तीन संस्करणों के अंतर्गत 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 73,000 गांवों को तंबाकू-मुक्त घोषित किया गया

तंबाकू की रोकथाम को गति देने, कानूनों के प्रवर्तन को सुदृढ़ करने और तंबाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु 60 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान

विश्वविद्यालय और महाविद्यालय तंबाकू-मुक्त युवा अभियान 4.0 के केंद्र में; तम्बाकू-मुक्त परिसर और युवाओं के नेतृत्व में जागरूकता पर विशेष बल

देश भर में तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों को गति देने के लिए छह-सूत्रीय रणनीति और संपूर्ण-सरकारी तंत्र का समन्वित दृष्टिकोण

प्रविष्टि तिथि: 28 OCT 2026 2:29PM by PIB Delhi

केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और डॉ. राम मनोहर लोहिया (डॉ. आरएमएल) अस्पताल में तंबाकू-मुक्त युवा अभियान (टीएफवाईसी 4.0) के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को तंबाकू के सेवन और निकोटीन की लत से बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित इस 60 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य युवाओं को तंबाकू का सेवन शुरु करने से रोकना, तंबाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना, तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत करना और देश भर में तंबाकू मुक्त वातावरण को बढ़ावा देना है। अभियान के पिछले तीन संस्करणों की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, जिनके अंतर्गत 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 73,000 से अधिक गांवों को तंबाकू-मुक्त घोषित किया गया है, इसके चौथे संस्करण का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है। इस वर्ष के अभियान में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए श्री प्रतापराव जाधव ने देश के युवाओं से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों को दृढ़ता से त्याग करने तथा स्वस्थ, सार्थक और नशा-मुक्त जीवन अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं का स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रीय महत्व रखते हैं।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत के युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प देश के भविष्य को आकार देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा पीढ़ी को तंबाकू और नशे की लत से बचाना जन-स्वास्थ्य की अनिवार्य आवश्यकता होने के साथ-साथ राष्ट्रीय दायित्व भी है।

श्री जाधव ने कहा, " स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के लिए अपने युवाओं को तंबाकू और नशे की लत से बचाना आवश्यक है।" उन्होंने  शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों, समुदायों और सरकारी एजेंसियों से मिलकर ऐसा वातावरण बनाने का आह्वान किया, जिसमें युवा नशे की लत के बोझ से मुक्त होकर अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें।

मंत्री महोदय ने तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि तंबाकू के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं। इनमें अनेक विषैले और कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ शामिल हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने आगाह किया कि तंबाकू का सेवन न केवल सेवन करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है, बल्कि परिवार के सदस्यों, बच्चों और अन्य लोगों को भी परोक्ष धुम्रपान के हानिकारक प्रभावों के सम्पर्क में लाता है।

किशोरावस्था में निकोटीन के सेवन पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए श्री जाधव ने कहा कि कम उम्र में निकोटीन के संपर्क में आने से मस्तिष्क के विकास, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कम उम्र में ही तंबाकू का सेवन शुरु करने की रोकथाम की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि इस अवस्था में युवाओं के निकोटीन पर निर्भरता विकसित करने की आशंका अधकि होती है।

श्री जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से बचाने के अपने प्रयासों को लगातार मजबूत कर रही है।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 2023 से प्रतिवर्ष 60-दिवसीय तंबाकू मुक्त युवा अभियान चला रहा है। इसमें तंबाकू के सेवन की रोकथाम, तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहन, कानूनों के सुदृढ़ प्रवर्तन और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान निरंतर विकसित होकर एक राष्ट्रव्यापी पहल बन गया है, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, शैक्षणिक संस्थान, प्रवर्तन एजेंसियां, स्वास्थ्य पेशेवर और समुदाय एक साथ भाग ले रहे हैं।

पिछले तीन संस्करणों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री महोदय ने बताया कि 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 73,000 से अधिक गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया है। ये उपलब्धि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस पहल के बढ़ते दायरे तथा विभिन्न हितधारकों की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों तथा शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों के सहयोग से तंबाकू के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और देश में तंबाकू नियंत्रण आंदोलन को मजबूत करने में मदद मिली है। वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण और वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण सहित राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विशेष रूप से 13-15 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच निरंतर निवारक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।

मंत्री महोदय ने जोर देकर कहा कि इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व से संचालित जन आंदोलन के रूप में विकसित होना चाहिए।

30 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने मन की बात कार्यक्रम में नशामुक्ति के संबंध में दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए श्री जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया था, ताकि भारत के युवाओं को नशे से दूर रखा जा सके और वे स्वस्थ और नशा-मुक्त जीवन जी सकें।

उन्होंने युवाओं से इस संदेश को आगे बढ़ाने और अपने विद्यालयों, महाविद्यालयो, परिवारों और समुदायों में परिवर्तन के वाहक बनने का आग्रह किया।

श्री जाधव ने सभी हितधारकों से 'तंबाकू को कहें ना' का संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचाने और तंबाकू की रोकथाम को साझा सामाजिक प्रतिबद्धता बनाने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के समापन पर मंत्री महोदय ने सभी प्रतिभागियों को 'तंबाकू को कहें ना' की ‘शपथ’ दिलाई। इसके माध्यम से तंबाकू से दूर रहने, दूसरों को तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने और एक स्वस्थ एवं तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।

तीन संस्करणों की उपलब्धियां, बढ़ता दायरा: 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थान और 73,000 गांव तंबाकू मुक्त घोषित

टीएफवाईसी 4.0 का शुभारंभ लगातार चलाए गए तीन राष्ट्रव्यापी अभियानों की उपलब्धियों पर आधारित है। इन अभियानों के माध्‍यम से देशभर में तंबाकू की रोकथाम संबंधी गतिविधियों का विस्तार किया गया, कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत किया गया तथा शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों को संगठित किया गया।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर 31 मई 2023 को शुरू किए गए पहले तंबाकू मुक्त युवा अभियान ने युवाओं के बीच तंबाकू के सेवन की रोकथाम के लिए एक केंद्रित राष्ट्रीय प्रयास की नींव रखी। इस अभियान के दौरान 1,42,184 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 12,000 गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया। तंबाकू नियंत्रण कानूनों के तहत प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई के परिणामस्वरूप 1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया। इससे ये स्पष्ट हुआ कि जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ नियामों के अनुपालन पर भी विशेष जोर दिया गया।

सितंबर 2024 में शुरू किए गए दूसरे संस्करण ने गहन जागरूकता गतिविधियों, प्रवर्तन अभियान और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पहल की पहुंच का काफी विस्तार किया। इस चरण के दौरान 1,67,762 शैक्षणिक संस्थानों और 27,534 गांवों ने तंबाकू मुक्त दर्जा हासिल किया, जबकि मजबूत प्रवर्तन उपायों के परिणामस्वरूप 1.1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।

इस प्रगति को आगे बढ़ते हुए अक्टूबर 2025 में शुरू किए गए टीएफवाईसी 3.0 ने अभियान की उपलब्धियों को और मजबूत किया। इसके कार्यान्वयन के दौरान 2,57,807 शैक्षणिक संस्थानों और 33,850 गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया।

तीसरे संस्करण में प्रवर्तन और क्षमता निर्माण में भी पर्याप्त प्रगति दर्ज की गई। 58,000 से अधिक प्रवर्तन अभियान चलाए गए, जिसके परिणामस्वरूप सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 की धारा 4 के तहत 1,45,477 चालान किए गए, जो सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाता है। इसके अलावा तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन और तम्बाकू  छोड़ने संबंधी सहायता को मजबूत करने के लिए 60,000 से अधिक प्रवर्तन कर्मियों और तंबाकू मुक्ति परामर्शदाताओं को प्रशिक्षित दिया गया।

कुल मिलाकर पहले तीन संस्करणों में 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 73,000 से अधिक गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया है, जो राष्ट्रव्यापी जनभागीदारी के व्यापक स्तर और तंबाकू नियंत्रण पहलों के प्रति शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय प्रशासन तथा समुदायों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

तंबाकू की रोकथाम में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को अग्रणीय भूमिका में लाएगा टीएफवाईसी 4.0

तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 की एक प्रमुख विशेषता उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) पर विशेष ध्यान देना है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तंबाकू के सेवन को रोकने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

यह मानते हुए कि किशोरावस्था और युवावस्था की शुरूआत तंबाकू का सेवन शुरू करने तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी आदतें विकसित होने की दृष्टि से महत्वपूर्ण चरण हैं, अभियान का उद्देश्य इस अवस्था में युवाओं को जोड़ना है, जब निरंतर जागरूकता और साथियों का सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकते हैं।

उच्च शैक्षणिक संस्थानों पर ध्यान केंद्रित करके, टीएफवाईसी 4.0 का उद्देश्य तंबाकू मुक्त परिसर के वातावरण को मजबूत करना, तंबाकू और निकोटीन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों को सूचित स्वास्थ संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना और तंबाकू की रोकथाम में सक्रिय भागीदार के रूप में शैक्षणिक संस्थानों को संगठित करना है।

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को जागरूकता गतिविधियां शुरू करने, तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के दिशानिर्देशों के अनुपालन को मजबूत करने, विद्यार्थियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने और तंबाकू की रोकथाम के प्रयासों में छात्रों और संकाय सदस्यों को सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

यह पहल परिसरों को तंबाकू की रोकथाम और युवाओं के नेतृत्व वाली कार्रवाई के केंद्रों में बदलने का प्रयास करती है, जिससे छात्रों को न केवल अपने संस्थानों के भीतर, बल्कि उनके परिवारों और समुदायों के बीच भी स्वस्थ जीवन शैली का समर्थक बनने में सक्षम बनाया जा सके।

उच्च शिक्षा संस्थानों पर विशेष ध्यान देने से राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण प्रयास में प्रतिभागी, प्रभावशाली और नेतृत्‍व के रूप में युवाओं की भूमिका को मजबूत करके अभियान में एक नया आयाम जुड़ता है।

देश भर में टीएफवाईसी 4.0 के कार्यान्वयन के लिए छह प्रमुख रणनीतियां

अभियान के उद्देश्यों को समन्वित कार्रवाई में बदलने के लिए टीएफवाईसी 4.0 को छह प्रमुख रणनीतियों के माध्यम से लागू किया जाएगा, जिसमें जागरूकता, संस्थागत जुड़ाव, सामुदायिक लामबंदी, प्रवर्तन और डिजिटल आउटरीच का संयोजन शामिल है।

अभियान निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करेगा:

  1. जन जागरूकता को तेज करना: तंबाकू और निकोटीन की लत के हानिकारक प्रभावों पर जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन संचार को मजबूत करना, विशेष रूप से बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों के बीच। साथ ही तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को इसे छोड़ने के लिए  उपलब्ध सहायता प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।
  2. तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करना: तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों (टीओएफईआई) के दिशानिर्देशों के अनुपालन को बढ़ावा देना और स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त वातावरण स्थापित करने और बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना।
  3. तंबाकू मुक्त गांवों का विस्तार: स्थानीय प्रशासन, पंचायती राज संस्थानों और सामुदायिक हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करके तंबाकू मुक्त गांवों की पहल को अधिक समुदायों तक ले जाना।
  4. तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत करना: समन्वित प्रवर्तन और अनुपालन गतिविधियों के माध्यम से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम (पीईसीए), 2019 के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना।
  5. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाना: अधिक जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए डिजिटल संचार, सोशल मीडिया अभियानों और युवा-उन्मुख आउटरीच के माध्यम से तंबाकू रोकथाम संदेशों की पहुंच का विस्तार करना।
  6. विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को शामिल करना: तंबाकू मुक्त परिसरों को बढ़ावा देने, छात्रों के नेतृत्व वाली जागरूकता को प्रोत्साहित करने और तंबाकू की रोकथाम को परिसर स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियों में एकीकृत करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों पर विशेष जोर देना।

इन कार्यनीतियों को कई स्तरों पर तंबाकू नियंत्रण को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें तंबाकू का सेवन शुरू करने से रोकने, तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने और मौजूदा कानूनों और दिशानिर्देशों का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

तंबाकू नियंत्रण को मजबूत करने के लिए संपूर्ण सरकारी तंत्र का समन्वित दृष्टिकोण

टीएफवाईसी 4.0 में संपूर्ण सरकारी तंत्र के दृष्टिकोण को अपनाया जाएगा, यह मानते हुए कि युवाओं को तंबाकू से बचाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा विकास, स्थानीय शासन, कानून प्रवर्तन, संचार और अन्य क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सहित अन्य मंत्रालयों के साथ सहयोग को मजबूत करेगा।

कार्यान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, प्रवर्तन एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय प्रमुख बना रहेगा।

यह अभियान व्यापक पहुंच, प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकास भागीदारों, नागरिक समाज संगठनों, स्वास्थ्य पेशेवरों और समुदाय-आधारित संस्थानों के साथ सहभागिता को और मजबूत करने का भी प्रयास करेगा।

विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर टीएफवाईसी 4.0 का उद्देश्य तंबाकू की रोकथाम को एक साझा जिम्मेदारी के रूप में सुदृढ़ करना और देश भर के संस्थानों और समुदायों में तंबाकू नियंत्रण प्रयासों को एकीकृत करना है।

विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए नशा-मुक्त युवा आवश्यक: केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के तंबाकू नियंत्रण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता, समन्वित संस्थागत कार्रवाई और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल को तंबाकू मुक्त परिसर होने पर बधाई दी और तंबाकू नियंत्रण को बढ़ावा देने तथा रोगियों, छात्रों, स्वास्थ्य पेशेवरों और आगंतुकों के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने में संस्थान की पहलों की सराहना की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने रेखांकित किया कि देश की प्रगति काफी हद तक देश की युवा आबादी के स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, उत्पादकता और कल्याण पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और व्यसन मुक्त पीढ़ी आवश्यक है।

युवाओं से तंबाकू और अन्य हानिकारक नशे की लत वाले पदार्थों से दूर रहने का आग्रह करते हुए उन्होंने उनसे स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और एक ऐसी संस्कृति में योगदान करने का आह्वान किया, जिसमें तंबाकू के सेवन को हतोत्साहित किया जाता है और सकारात्मक स्वास्थ्य विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाता है।

उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में निरंतर तंबाकू रोकथाम गतिविधियों के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए सामूहिक कार्रवाई और व्यवहार परिवर्तन महत्वपूर्ण हैं।

तंबाकू सेवन की मानवीय कीमत को उजागर करने के लिए रोगी का अनुभव और जागरूकता संबंधी फिल्में प्रदर्शित

इस शुभारंभ कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, स्वास्थ्य पेशेवरों, छात्रों, विकास भागीदारों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों और मीडिया के सदस्यों सहित 300 से अधिक लोगों की भागीदारी देखी गई।

उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक; डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद, निदेशक, डॉ. आरएमएल अस्पताल; और डॉ. इवान हुटिन, भारत में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि शामिल थे। इसके अतिरिक्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

एबीवीआईएमएस के छात्रों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया, जो तंबाकू की रोकथाम में युवाओं की भागीदारी पर अभियान के जोर को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम में तंबाकू के हानिकारक प्रभावों और तंबाकू से संबंधित बीमारियों को रोकने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक शैक्षिक वीडियो की स्क्रीनिंग की गई।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण ‘वॉयस ऑफ टोबैको विक्टिम’ (वीओटीवी) पहल के तहत एक रोगी द्वारा अपना अनुभव साझा करना था। रोगी ने तंबाकू के कारण हुई बीमारी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव बताए। इससे ये स्पष्ट हुआ कि तंबाकू का सेवन व्यक्ति और उसके परिवार के लिए कितने गंभीर और विनाशकारी परिणाम उत्पन्न कर सकता है।

इस कार्यक्रम में एक विशेष अभियान वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें 2023 से 2025 तक तंबाकू मुक्त युवा अभियान के पिछले तीन संस्करणों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। वीडियो में तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों, तंबाकू मुक्त गांवों, प्रवर्तन और सामुदायिक भागीदारी को आगे बढ़ाने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की गई प्रगति पर प्रकाश डाला गया है।

जागरूकता गतिविधियों ने इस अभियान के केंद्रीय संदेश को मजबूत किया कि तंबाकू से संबंधित नुकसान को रोका जा सकता है और समय रहते हुए रोकथाम, सूचित विकल्प और तम्बाकू छोड़ने के लिए उपलब्ध सहायता से लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

'तंबाकू को कहें ना' को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने व्यापक जन भागीदारी का आह्वान किया

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, नागरिक समाज संगठनों, विकास भागीदारों, स्वास्थ्य पेशेवरों, युवा संगठनों और नागरिकों से टीएफवाईसी 4.0 में सक्रिय रूप से भाग लेने और इसके राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन में योगदान देने का आह्वान किया है।

हितधारकों को जागरूकता गतिविधियां शुरू करने, तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों और गांवों को बढ़ावा देने, प्रवर्तन को मजबूत करने, तंबाकू छोड़ने में सहायता उपलब्ध कराने और निरंतर तंबाकू रोकथाम प्रयासों में समुदायों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

मंत्रालय ने संस्थानों और नागरिकों से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से तंबाकू नियंत्रण संदेशों का व्यापक प्रसार करने, अभियान की गतिविधियों और अच्छी कार्य प्रणालियों को साझा करने और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का भी आग्रह किया है।

इस पहल के केंद्र में युवाओं को रखते हुए तथा सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों के बीच सहयोग को मजबूत करके तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 का उद्देश्य जागरूकता को कार्रवाई और कार्रवाई को स्थायी व्यवहार परिवर्तन में बदलना है।

चौथा संस्करण युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य की रक्षा करने और ऐसे समाज के निर्माण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जहां बच्चे और युवा तंबाकू और नशे की लत से मुक्त रहकर विकास कर सकें, सीख सकें और अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर सकें।

'तम्बाकू को कहें ना' के संदेश को केंद्र में रखते हुए टीएफवाईसी 4.0 का उद्देश्य युवाओं के नेतृत्व में और समाज के प्रत्येक वर्ग के सहयोग से राष्ट्रव्यापी आंदोलन को प्रेरित करना है, जिससे स्वस्थ, नशा-मुक्त और विकसित भारत के विजन को साकार करने में योगदान मिलेगा।

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पीके/केसी/आरटी/आईएम/केके


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