PIB Backgrounder
टीबी-मुक्त भारत की तरफ
प्रगति, नवाचार और सामुदायिक भागीदारी
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 4:48PM by PIB Delhi
भारत ने तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध संघर्ष में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं । वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में हर वर्ष सामने आने वाले टीबी के नए मामलों में 21% की कमी आई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 12% रही । भारत में टीबी उपचार का दायरा 92% तक पहुँच गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 78% है । टीबी मुक्त भारत अभियान को तेज गति प्रदान करते हुए अब तक कुल 28.1 करोड़ से अधिक लोगों की जाँच की जा चुकी है । 20 लाख से अधिक लोगों को टीबी निवारक उपचार (TPT) दिया गया है, 5.7 लाख नए निक्षय मित्र जोड़े गए हैं और 46,118 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त प्रमाणन प्रदान किया गया है । इस राष्ट्रीय अभियान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से उल्लेखनीय गति मिली है । हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों के इस्तेमाल से एक्स-रे जाँच में 34 गुना वृद्धि हुई है । ‘खुशी’ नामक एआई चैटबॉट से युक्त टीबी-मुक्त भारत ऐप शुरू किया गया है। इसके अलावा, दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों के लिए कम अवधि वाला, अधिक सुरक्षित बीपीएएलएम (BPaLM) उपचार शुरू किया गया है, जिसमें बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन शामिल हैं । साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उन्नत प्रारंभिक जाँच उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं । इसी प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए जेओएसएच (JOSH—Joint Squad for Health) अभियान युवाओं और समुदायों को टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने, समय पर जाँच कराने, शीघ्र उपचार शुरू करने, उपचार के दौरान नियमितता बनाए रखने और बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए संगठित करता है । सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करके यह अभियान टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जन आंदोलन की भावना को और सशक्त बनाता है ।
परिचय

भारत तपेदिक उन्मूलन की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में हर वर्ष सामने आने वाले टीबी के नए मामलों में 21% की कमी दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 12% रही। भारत में टीबी उपचार का दायरा 92% है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 78% है।

इस अवधि में टीबी के मामलों में आई गिरावट विश्व स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। भारत में टीबी की अधिक व्यापकता वाले अन्य देशों की तुलना में मामलों में कमी की गति भी अधिक रही है। इसी अवधि में टीबी से होने वाली मौतों में 28% की कमी आई। भारत सरकार द्वारा टीबी की पहचान, जाँच और उपचार के लिए अपनाई गई लक्षित एवं बहुआयामी रणनीति ने इस सकारात्मक बदलाव में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आधुनिक तकनीक, स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, सामुदायिक भागीदारी और किफायती उपचार ने भारत को इस व्यापक रूप से फैली और संभावित रूप से घातक बीमारी के उन्मूलन के लक्ष्य के करीब पहुँचाया है ।
टीबी उन्मूलन के लिए समुदायों को संगठित करने का जेओएसएच अभियान
टीबी उन्मूलन की दिशा में इस गति को और बढ़ाने के लिए 13 अक्टूबर, 2026 को देशव्यापी सोशल मीडिया अभियान आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत जेओएसएच (स्वास्थ्य के लिए संयुक्त दल) टीमों को प्रायोगिक आधार पर 11 राज्यों और 55 जिलों में सक्रिय किया गया । प्रत्येक जेओएसएच टीम में माई भारत के स्वयंसेवक, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट और एक नामित प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं । इनका उद्देश्य समय पर जाँच और उपचार के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है । यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने के लिए युवाओं को संगठित करती है । सभी मंत्रालयों, विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों, माई भारत के स्वयंसेवकों, युवा संगठनों, विद्यार्थियों और नागरिकों से अपील की गई है कि वे पोस्ट, तस्वीरों, वीडियो और युवाओं के नेतृत्व में किए गए प्रेरक कार्यों की कहानियों के माध्यम से टीबी के प्रति जागरूकता, शीघ्र पहचान, उपचार के प्रति नियमितता और बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक से मुक्त समुदायों के निर्माण में योगदान दें।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीबी मुक्त अभियान के संबंध में संसद सदस्यों और विधानसभाओं के सदस्यों के साथ कार्यशालाएँ आयोजित की थीं। हालाँकि, इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समुदायों की भागीदारी को आवश्यक माना गया। जेओएसएच अभियान सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अगला कदम है। यह जाँच और शीघ्र पहचान के महत्व पर विशेष जोर देता है ।
इस अभियान का उद्देश्य निदान और उपचार की आवश्यकता के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना भी है, ताकि सक्रिय जाँच का दायरा बढ़े और बिना लक्षण वाले मरीजों की भी पहचान की जा सके । विशेष रूप से कमजोर और वंचित आबादी के बीच सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का प्रसार भय को दूर करने तथा लोगों को जाँच एवं उपचार के प्रति जागरूक करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्थागत सहयोग और सामुदायिक लामबंदी के माध्यम से यह अभियान टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को वास्तविकता में बदलने का प्रयास करता है ।
टीबी और इसके लक्षण
तपेदिक (टीबी) क्या है?
तपेदिक (Tuberculosis-TB) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होने वाली बीमारी है । यह सामान्यतः फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों, जैसे मस्तिष्क, गुर्दे और रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकती है। इस जीवाणु से संक्रमित व्यक्ति बीमार हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में बीमारी के लक्षण विकसित नहीं होते । टीबी के निष्क्रिय मामले या सुप्त टीबी संक्रमण भी पाए जाते हैं । निष्क्रिय टीबी से पीड़ित व्यक्ति सामान्यतः सक्रिय टीबी के मरीज की तरह दूसरों में संक्रमण नहीं फैलाता, लेकिन उसमें किसी भी समय सक्रिय टीबी विकसित हो सकती है और वह बीमार पड़ सकता है । शिशुओं, बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण के बाद बीमार पड़ने की आशंका अधिक होती है । उचित उपचार न मिलने पर सक्रिय टीबी जानलेवा हो सकती है ।

टीबी के लक्षण
सक्रिय टीबी के लक्षण सामान्यतः इस बात पर निर्भर करते हैं कि जीवाणु ने शरीर के किस हिस्से को प्रभावित किया है। हालाँकि, कुछ लक्षण ऐसे भी हैं जो टीबी के विभिन्न प्रकारों में सामान्य रूप से दिखाई दे सकते हैं।
सक्रिय या लक्षणयुक्त टीबी से पीड़ित व्यक्ति दूसरों में टीबी के जीवाणु फैला सकता है। जब वह खाँसता, छींकता या बोलता है, तो जीवाणु युक्त बहुत छोटी बूँदें हवा में फैल सकती हैं। आसपास मौजूद लोग इन्हें साँस के माध्यम से अपने शरीर में पहुँचा सकते हैं। कम हवादार स्थानों में संक्रमण फैलने का जोखिम विशेष रूप से अधिक होता है।

हालाँकि, टीबी हवा के माध्यम से फैलती है, लेकिन यह निम्नलिखित तरीकों से नहीं फैलती:
- हाथ मिलाने से ।
- सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल से ।
- भोजन और बर्तनों को साझा करने से ।
- सामान्य सामाजिक मेलजोल से ।
फेफड़ों की टीबी से पीड़ित मरीज उचित टीबी दवाएँ कम-से-कम दो सप्ताह तक लेने के बाद सामान्यतः संक्रमण फैलाने की स्थिति में नहीं रहता। शरीर के फेफड़ों से अलग अन्य अंगों में टीबी होने पर मरीज आमतौर पर संक्रमण नहीं फैलाता।
लक्षण दिखाई देने पर क्या करें?
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों और अनेक निजी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की जाँच एवं उपचार निःशुल्क उपलब्ध हैं : यदि आपमें या आपके किसी परिचित में टीबी के लक्षण दिखाई दें, तो निम्नलिखित कदम उठाएँ:
• मार्गदर्शन के लिए निक्षय संपर्क टीबी एवं हेपेटाइटिस हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1800-11-6666 पर कॉल करें: और निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाएँ। सरकारी कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी की जाँच और उपचार निःशुल्क उपलब्ध हैं।
• अधिक जानकारी के लिए अपने एंड्रॉयड फोन पर टीबी आरोग्य साथी ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह ऐप निकटतम टीबी जाँच एवं उपचार केंद्रों का पता लगाने, दवाओं के दुष्प्रभावों के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त करने और टीबी मरीजों के लिए पोषण संबंधी सलाह हासिल करने में मदद करता है ।
भारत में टीबी उन्मूलन की रणनीतिक योजना

भारत सरकार सतत विकास लक्ष्य-3 (SDG 3) के अनुरूप तपेदिक उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य का उद्देश्य सभी लोगों के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना और उनके कल्याण को बढ़ावा देना है। जून 2020 में घोषित भारत में टीबी उन्मूलन की राष्ट्रीय रणनीतिक योजना 2020–25 का उद्देश्य चार प्रमुख स्तंभों के माध्यम से टीबी का उन्मूलन करना है। ये स्तंभ हैं—निर्माण, रोकथाम, पहचान और उपचार। इस योजना में शीघ्र निदान, संक्रमण के प्रसार को कम करने, मरीजों को उपयुक्त दवाओं एवं उपचार पद्धतियों से उपचारित करने और मरीजों के लिए सहायता प्रणालियाँ विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम
वर्ष 2020 में भारत सरकार ने संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (RNTCP) का नाम बदलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) कर दिया। यह बदलाव वर्ष 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पहले ही भारत में टीबी उन्मूलन करने के उद्देश्य को दर्शाता है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के चार स्तंभों पर आधारित है—पहचान, उपचार, रोकथाम और निर्माण । इस कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं:
- उच्च गुणवत्ता वाली जाँच के माध्यम से टीबी के मरीजों का शीघ्र निदान करना और कमजोर आबादी में छूट गए मरीजों की पहचान के लिए सक्रिय सामुदायिक पहुँच बढ़ाना ।
- दवा-प्रतिरोधी टीबी सहित सभी प्रकार की टीबी के लिए गुणवत्ता-आश्वस्त दवाओं और उपचार पद्धतियों से समय पर उपचार उपलब्ध कराना।
- निजी क्षेत्र में उपचार कराने वाले मरीजों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और निक्षय मित्र पहल के माध्यम से मरीज-केंद्रित उपचार सहायता एवं पोषण संबंधी सहयोग प्रदान करना।
- मरीजों के घरेलू संपर्कों, बच्चों, एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों (PLHIV) तथा उच्च जोखिम वाली और कमजोर आबादी में संपर्कों का पता लगाना और टीबी निवारक उपचार उपलब्ध कराना।
- वायुजनित संक्रमण की रोकथाम के उपाय लागू करना।
- बीमारी के सामाजिक निर्धारकों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास करना।
सरकार राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न योजनाएँ संचालित करती है:
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 9 सितंबर, 2022 को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त घटक के रूप में की गई थी। इस पहल का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लोगों को एकजुट करके इसे जन आंदोलन का रूप देना और देश में टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति को तेज करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं :
- उपचार के बेहतर परिणामों के लिए टीबी मरीजों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करना ।
- सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना ।
- कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का उपयोग करना ।
निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र कार्यक्रम
टीबी के मरीजों को उपचार के दौरान दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने के लिए उच्च प्रोटीन वाला आहार लेना आवश्यक होता है। वर्ष 2018 में शुरू की गई निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत प्रत्येक अधिसूचित टीबी मरीज को प्रतिमाह ₹1,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। अप्रैल 2018 में योजना शुरू होने के बाद से 1.38 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ₹4,454.68 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं। टीबी का उपचार लंबा होता है। यह कम-से-कम छह महीने तक चलता है और कुछ मामलों में इससे भी अधिक समय लग सकता है। निक्षय मित्र वह व्यक्ति या संस्था है जो उपचार की इस अवधि में टीबी मरीज को सहायता प्रदान करती है। कोई भी व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन, कंपनी, धार्मिक या सामुदायिक समूह, सरकारी अधिकारी अथवा सार्वजनिक जीवन से जुड़ा व्यक्ति निक्षय मित्र बनने के लिए स्वेच्छा से आगे आ सकता है। निक्षय मित्र मरीजों को नियमित रूप से खाद्य सामग्री की टोकरी उपलब्ध कराते हैं, जिससे उनके जेब से होने वाले खर्च में कमी आती है । वे नियमित संपर्क के माध्यम से मनोसामाजिक सहायता भी प्रदान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, मरीज के स्वस्थ होने के बाद उसे अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने में मदद के लिए व्यावसायिक सहयोग भी दिया जा सकता है ।
12 नवंबर, 2025 तक की स्थिति :
- 6,77,541 व्यक्तियों और संगठनों ने निक्षय मित्र के रूप में टीबी मरीजों को 45 लाख से अधिक खाद्य सामग्री की टोकरियाँ वितरित की थीं।
- माई भारत के 2 लाख से अधिक स्वयंसेवक निक्षय मित्र के रूप में सेवा देने के लिए आगे आए थे । माई भारत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की एक पहल है। यह 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों, निजी संगठनों और नागरिक समाज से जुड़ी साझेदारियों के साथ जोड़ती है, ताकि वास्तविक जीवन की चुनौतियों और समस्याओं का समाधान किया जा सके ।
100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 7 दिसंबर, 2024 को भारत के सबसे व्यापक टीबी उन्मूलन अभियानों में से एक, 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान, की शुरुआत की । यह अभियान 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में शुरू किया गया था। टीबी का शीघ्र निदान सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील आबादी की पहचान, जोखिम का मानचित्रण और उच्च जोखिम वाले समूहों की व्यवस्थित जाँच की गई। इस जन आंदोलन के अंतर्गत 30,000 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों और 24 संबंधित मंत्रालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। निक्षय मित्रों ने भी इस प्रयास में सहयोग दिया। यह टीबी उन्मूलन के लिए संपूर्ण समाज और संपूर्ण सरकार की भागीदारी पर आधारित दृष्टिकोण को दर्शाता है। टीबी मुक्त भारत अभियान की रणनीतियों का अब विस्तार करके देश के सभी जिलों में लागू किया गया है।
जून 2026 तक इस सघन अभियान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की । 28.1 करोड़ से अधिक लोगों की जाँच की गई। 20 लाख लोगों को टीबी निवारक उपचार (TPT) प्रदान किया या । 5.7 लाख नए निक्षय मित्र जोड़े गए। मार्च 2026 से शुरू हुए अभियान के दूसरे चरण में 1.2 लाख उच्च जोखिम वाले गाँवों और वार्डों में 1.7 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए। इस अभियान में 32 लाख विद्यार्थियों और माई भारत के 1.9 लाख स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी की। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपचार की सफलता दर बढ़कर 90% हो गई, जो 88% के वैश्विक औसत से अधिक है।
नई पहल
दवा-प्रतिरोधी टीबी के लिए नई उपचार पद्धति : कार्यक्रम के अंतर्गत दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों के लिए कम अवधि वाली, अधिक सुरक्षित और प्रभावी बीपीएएलएम (BPaLM) उपचार पद्धति शुरू की गई है। इसमें बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन दवाएँ शामिल हैं। इससे उपचार की अवधि घटकर छह महीने रह जाएगी। इस उपचार पद्धति के अंतर्गत 15,000 से अधिक मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट/रिफैम्पिसिन-रेसिस्टेंट टीबी (MDR/RR-TB) मरीजों का उपचार शुरू किया जा चुका है।
टीबी निवारक उपचार :यह मानते हुए कि बीमारी की रोकथाम भी उपचार जितनी ही महत्वपूर्ण है, पात्र लाभार्थियों को सक्रिय टीबी रोग विकसित होने से रोकने के लिए टीबी निवारक उपचार (TPT) दिया जाता है। लक्षित और नवाचारी दृष्टिकोण के माध्यम से इस कार्यक्रम ने वर्षों से टीबी मरीजों के घरेलू संपर्कों और एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों (PLHIV) को टीबी निवारक उपचार देकर सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की है। इस पहल को सक्रिय एवं व्यापक स्तर पर मरीजों की पहचान करने वाले अभियानों के साथ भी जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, अन्य कमजोर और उच्च जोखिम वाले समूहों तक इसका विस्तार किया गया है
आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनका उद्देश्य सभी लोगों को सार्वभौमिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। 13 अक्टूबर, 2026 तक भारत में कुल 1,87,250 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें उप-स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष केंद्र (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) तथा शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र शामिल हैं। टीबी के लक्षण दिखाई देने पर लोग इन केंद्रों पर जाकर अपनी जाँच करा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं की टीबी और अन्य बीमारियों की जाँच करते हुए। (20 सितंबर, 2025)
तकनीकी अवसंरचना
टीबी की शीघ्र पहचान और उपचार के लिए भारत में 9,800 से अधिक रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्टिंग केंद्र तथा कल्चर एवं औषधि संवेदनशीलता परीक्षण की 107 प्रयोगशालाएँ मौजूद हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा ऐसा नेटवर्क है।
- एआई-सक्षम हैंडहेल्ड चेस्ट एक्स-रे उपकरण: सामुदायिक स्तर पर जाँच के लिए 500 से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम पोर्टेबल छाती एक्स-रे उपकरण उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1,500 उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- निक्षय डिजिटल प्लेटफॉर्म: पोषण संबंधी सहायता के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की सुविधा प्रदान करता है।
- एक्स-रे जाँच में 34 गुना वृद्धि: देशभर में हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों की बड़े पैमाने पर तैनाती से जाँच की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- टीबी मुक्त भारत ऐप और ‘खुशी’ चैटबॉट: इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित चैटबॉट शामिल है। यह अभियान की प्रगति पर नज़र रखने, नागरिकों को लक्षणों के बारे में मार्गदर्शन देने और निकटतम जाँच केंद्रों का पता लगाने में सहायता करता है।
- क्षमता निर्माण: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत रेडियोग्राफर के पदों का विस्तार किया है। साथ ही, ट्रूनेट और सीबीएनएएटी (CBNAAT) जैसी नैदानिक मशीनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है।
दूरस्थ कश्मीर में टीबी के मामलों की पहचान
कश्मीर के बांदीपोरा जिले की दुर्गम गुरेज घाटी हिमालय में 2,400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और सर्दियों में अन्य क्षेत्रों से कट जाती है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की कश्मीर टीम ने व्यापक टीबी जाँच अभियान चलाया। उन्नत नैदानिक मशीनों और पोर्टेबल एक्स-रे उपकरणों से लैस मोबाइल जाँच वैन का उपयोग करते हुए टीम ने तीन दिनों में 1,250 लोगों की जाँच की । इनमें 250 से अधिक संभावित टीबी मरीजों की पहचान की गई, जिन्हें आगे की जाँच के लिए चिह्नित किया गया। टीम ने भारतीय सेना, स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों, ग्राम प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं के साथ जागरूकता सत्र भी आयोजित किए। यह प्रयास वर्ष 2025 तक ‘टीबी-मुक्त कश्मीर’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जम्मू-कश्मीर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित पहल
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और उपचार में तेजी लाने के उद्देश्य से सरकार टीबी की पहचान, निदान और उपचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणालियों का उपयोग कर रही है ,इनमें प्रमुख पहल निम्नलिखित हैं:
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स्वास्थ्य संबंधी
क्षेत्र
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एआई समाधान
/ पहल
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प्रक्रिया, तकनीक और प्रभाव
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उपचार प्रभाव
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/ परिचालित
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टीबी की जाँच
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कफ अगेंस्ट टीबी
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ध्वनि विश्लेषण पर आधारित एआई तकनीक स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से मरीज की खाँसी की तीन सेकंड की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करती है और टीबी से जुड़े विशिष्ट ध्वनि पैटर्न की पहचान करती है ।
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इसके माध्यम से 1.62 लाख से अधिक लोगों की जाँच की गई तथा पारंपरिक तरीकों की तुलना में 12–16% अतिरिक्त मामलों की पहचान हुई ।
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टीबी प्रबंधन
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प्रतिकूल परिणामों का पूर्वानुमान
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पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण के माध्यम से एआई उन मरीजों की पहचान करता है जिनमें उपचार विफल होने का जोखिम अधिक होता है। ऐसे मरीजों की पहचान होने पर उपचार शुरू किया जाता है ।
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देशव्यापी स्तर पर इसे लागू किए जाने के बाद प्रतिकूल परिणामों में 27% की कमी दर्ज होने की सूचना है।
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टीबी की प्रारंभिक छँटाई
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डीप सीएक्सआर (छाती का एक्स-रे)
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रेडियोलॉजी पर आधारित एआई डिजिटल एक्स-रे का स्वचालित विश्लेषण करके संभावित टीबी मामलों में गांठों और गुहाओं जैसे संकेतों की पहचान करता है ।
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इसे आठ राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया गया है और विशेषज्ञों की कमी की समस्या से निपटने के लिए यह सरकार को निःशुल्क उपलब्ध है।
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टीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ता भारत
भारत में टीबी के मामलों में लगातार आ रही गिरावट इस बात का सशक्त प्रमाण है कि निरंतर प्रतिबद्धता, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल वास्तविक परिवर्तन ला सकती हैं । निरंतर सतर्कता, स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से देश उस भविष्य के करीब पहुँच रहा है, जहाँ टीबी-मुक्त भारत केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक साकार होने वाली वास्तविकता होगा। जेओएसएच सोशल मीडिया अभियान का उद्देश्य टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समुदायों को इस बीमारी के उन्मूलन के लिए संगठित करना है। विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य संस्थानों, युवाओं और समुदायों को जोड़ने वाली इन पहल के माध्यम से भारत इस व्यापक और खतरनाक बीमारी को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है । यह प्रयास विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है ।
संदर्भ
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2189415
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275402®=1&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2114549
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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2184456
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https://mohfw.gov.in/?q=en/basicpage-
https://tbcindia.mohfw.gov.in/national-strategic-plan-to-end-tb-in-india-2020-25/
https://dghs.mohfw.gov.in/national-tuberculosis-elimination-programme.php
https://tbcindia.mohfw.gov.in/concept-note/
https://aam.mohfw.gov.in/
https://tbcindia.mohfw.gov.in/wp-content/uploads/2024/10/TB-Report_for-Web_08_10-2024-1.pdf
https://mohfw.gov.in/?q=/press-info/7783
https://www.mohfw.gov.in/?q=en/pressrelease-217
https://tbcindia.mohfw.gov.in/wp-content/uploads/2023/05/4193711960Social-action-plan-2013-Final-7th-Jan-14.pdf
https://tbcindia.mohfw.gov.in/wp-content/uploads/2023/05/4773363959TOG-Chapter-1-Introduction.pdf
पीआईबी बैकग्राउंडर
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2244661®=3&lang=1
पीआईबी शोध
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(रिलीज़ आईडी: 2323104)
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