रक्षा मंत्रालय
तरंग शक्ति अभ्यास-2026 के अंतर्गत सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज और भारतीय वायु सेना ने सेमिनार का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
12 OCT 2026 1:33PM by PIB Delhi
सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज (सीएपीएसएस) ने भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायु सेना सभागार में तरंग शक्ति-26 अभ्यास के दौरान एक संगोष्ठी का आयोजन किया। “बदलते युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में सभी महाद्वीपों की सहयोगी वायु सेनाओं के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और मीडिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श किया कि वायु शक्ति कैसे युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुकूल हो रही है।
इस हवाई अभ्यास के दौरान प्राप्त परिचालन अनुभवों के आधार पर, टीमों ने संगोष्ठी के दौरान वैचारिक स्तर पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य सैद्धांतिक प्राथमिकताओं और भविष्य में सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करना और सहयोगी वायु सेनाओं के बीच सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना था।
सीएपीएसएस के महानिदेशक एयर मार्शल नागेश कपूर (सेवानिवृत्त) ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने वर्तमान समय के संघर्षों में वायु शक्ति की भूमिका को स्पष्ट किया और इसे बढ़ावा देने में सीएपीएसएस के योगदान पर प्रकाश डाला। सीएपीएसएस की स्थापना 2001 में राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु और अंतरिक्ष संबंधी मुद्दों पर केंद्रित एक स्वायत्त अनुसंधान और विश्लेषण निकाय के रूप में की गई थी। वर्ष 2026 सीएपीएसएस की रजत जयंती का वर्ष है।
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने हवाई युद्ध में उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए एकीकृत क्षमताओं, परिचालन मजबूती और बेहतर अंतर-संचालनीयता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट तैनाती सिद्धांतों द्वारा निर्देशित मानवयुक्त और मानवरहित अभियानों के समवर्ती विकास और सभी सेंसर, हथियार प्रणालियों और मानवरहित प्लेटफार्मों को संचार और डेटा नेटवर्क के साथ प्रारंभ से ही एकीकृत करने पर बल दिया। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, नवीन प्रशिक्षण विधियों को अपनाने और दीर्घकालिक अभियानों को बनाए रखने की क्षमता बढ़ाने का भी आह्वान किया। मानवीय सहायता, सहयोगी देशों को समर्थन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने में वायु शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने सूचना युद्ध और धारणा प्रबंधन पर केंद्रित विचार-विमर्श के साथ-साथ परिचालन अनुभव के अधिक आदान-प्रदान और सामान्य चुनौतियों से निपटने के लिए वायु सेनाओं के बीच बेहतर सहयोग पर बल दिया।
पहले कार्य सत्र में 21वीं सदी में हवाई युद्ध के रूपांतरण पर विचार-विमर्श किया गया और इसकी अध्यक्षता पूर्व वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने की। इस सत्र में हवाई श्रेष्ठता से आगे बढ़कर युद्धक्षेत्र पर नियंत्रण, निर्णय लेने में प्रभुत्व स्थापित करने तथा मीडिया की एक रणनीतिक हथियार के रूप में भूमिका में हो रहे बदलावों पर चर्चा की गई। पैनलिस्टों ने तर्क दिया कि वायु शक्ति अब केवल आकाश पर अधिकार करने तक सीमित नहीं है, इसमें एक संपूर्ण परिचालन प्रणाली शामिल है। सत्र में पारंपरिक अवधारणाओं के साथ-साथ आधुनिक विषयों पर भी चर्चा हुई। दूसरे सत्र की अध्यक्षता रॉयल ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना के प्रमुख एयर मार्शल स्टीफन चैपल ने की। सत्र में राष्ट्रीय शक्ति की रणनीति के रूप में वायु शक्ति का विश्लेषण किया गया, जिसमें निवारण, दबाव, तनाव नियंत्रण और मानव पूंजी विकास शामिल थे। सत्र में युद्धक्षेत्र की उभरती और भविष्य की आवश्यकताओं को समग्र रूप से पूरा करने के लिए वायु शक्ति के क्षेत्र में आवश्यक सुधारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही, प्रतिरोध स्थापित करने और संघर्ष की तीव्रता को नियंत्रित करने में वायु शक्ति की भूमिका का भी गहन विश्लेषण किया गया।
यह चर्चा अत्यंत ज्ञानवर्धक और रोचक रही, जिसने प्रतिभागियों तथा ऑनलाइन माध्यम से जुड़े दर्शकों को वायु शक्ति के भविष्य के संबंध में बहुमूल्य, समृद्ध और विविध दृष्टिकोण प्रदान किए।

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पीके/केसी/आरटी/बीयू/ओपी
(रिलीज़ आईडी: 2322230)
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