नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने चेन्नई में ‘विंडर्जी इंडिया 2026’ का उद्घाटन किया; 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का रोडमैप प्रस्तुत किया


सितंबर 2026 तक पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट तक पहुंची: श्री प्रल्हाद जोशी

प्रविष्टि तिथि: 08 OCT 2026 3:58PM by PIB Delhi

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 8 अक्टूबर, 2026 को चेन्नई में 'विंडर्जी इंडिया 2026' के 8वें संस्करण का उद्घाटन किया। यह आयोजन 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित हो रहे प्रमुख वैश्विक पवन ऊर्जा सम्मेलन की शुरुआत का प्रतीक है। तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन एवं विधि मंत्री श्री थिरु सी.टी.आर निर्मल कुमार इस उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे। इस अवसर पर केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, पवन ऊर्जा संघों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता भी उपस्थित थे।

'विंडर्जी इंडिया 2026' वैश्विक पवन ऊर्जा इकोसिस्टम को एक साझा मंच पर लाया है, जिसमें 20 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 400 प्रदर्शक, 500 प्रतिनिधि और डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के समर्पित कंट्री पवेलियन (देश-विशिष्ट मंडप) शामिल हैं।

मुख्य भाषण देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने देश में पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं और इसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले विशाल अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र ने मजबूत गति प्रदर्शन किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 (एफवाई 2026) में 6.05 गीगावाट (जीडब्ल्यू) की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक स्थापना हासिल की गई है। हमें विश्वास है कि वार्षिक पवन ऊर्जा स्थापनाएं वित्त वर्ष 2027 में इस रिकॉर्ड को पार कर जाएंगी, जो भारत की पवन ऊर्जा यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रमाण होगा। यह निरंतर वृद्धि 2030 तक 100 गीगावाट स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की नींव को मजबूत करेगी और भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र के विकास को और गति प्रदान करेगी। एक मजबूत परियोजना पाइपलाइन और सहायक नीतिगत ढांचे के साथ भारत इस गति को बनाए रखने और पवन ऊर्जा विकास के अगले चरण के लिए आवश्यक पैमाने को हासिल करने के लिए पूरी तरह से तौयार है।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र निरंतर विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। 30 सितंबर, 2026 तक 59.20 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता के आंकड़े को पार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है, जिससे पवन ऊर्जा उत्पादन और निर्यात में वैश्विक नेतृत्व के लिए एक ठोस आधार तैयार हो रहा है।

तमिलनाडु के ऊर्जा मंत्री थिरु सीटीआर निर्मल कुमार ने पवन ऊर्जा विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका और नई पहलों, जैसे कि राज्य की ‘रीपॉवरिंग’ नीति को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए सक्रिय कदमों को रेखांकित किया।

भूमि सुगमता, समय पर मंजूरी और मार्ग अधिकार (आरओडब्ल्यू) संबंधी मुद्दों के समाधान के माध्यम से पवन ऊर्जा विकास को आगे बढ़ाने में असाधारण नेतृत्व के लिए विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय प्रगति को बढ़ावा देने के लिए आईडब्ल्यूटीएमए-बीडब्ल्यूई वैश्विक समझौता ज्ञापन, आईडब्ल्यूटीएमए-पीटीबी आशय पत्र और आईडब्ल्यूटीएमए-ओईसीडी सहयोग सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और घरेलू समझौतों की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त उद्घाटन समारोह के दौरान "तमिलनाडु में ऊर्जा संक्रमण (परिवर्तन)" और "भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए संविदात्मक तंत्र की पुनर्कल्पना" शीर्षक वाली रिपोर्टें भी जारी की गईं।

प्रतिभागियों को सार्थक सहयोग, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और नई साझेदारियों के लिए ‘विंडर्जी इंडिया 2026’ को एक गतिशील मंच के रूप में उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। भारत की पवन ऊर्जा महत्वाकांक्षा के विशाल दायरे के लिए सरकार, उद्योग जगत, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। एक साथ मिलकर भारत संपूर्ण पवन ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ कर सकता है, नवाचार और तैनानी में तेजी ला सकता है तथा पवन ऊर्जा के एक अग्रणीय वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

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पीके/केसी/आरटी/आईएम/एनजे


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