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हर स्कूल, एक मॉडल स्कूल


पीएम श्री' और भविष्य के लिए तैयार स्कूलों की दिशा में भारत की पहल

प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2026 12:17PM by PIB Delhi

7 सितंबर 2022 को शुरू की गई प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप 14,500 से अधिक मॉडल (उत्कृष्ट) स्कूलों का विकास करना है। वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक 27,360 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय आवंटन के साथ, यह योजना छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करने के साथ-साथ अवसंरचना, शिक्षण शास्त्र, समावेशिता और संवहनीयता को मजबूत करती है। जुलाई 2026 तक, लक्ष्य के लगभग 90% हिस्से को पूरा करते हुए, 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों का चयन किया जा चुका है, जिनमें केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अंतर्गत आने वाले स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों का चयन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर तीन चरणों वाली 'चैलेंज मोड' प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। आसपास के स्कूलों के लिए मार्गदर्शक संस्थानों के रूप में परिकल्पित, 'पीएम श्री' स्कूल केवल अवसंरचना के विकास के बजाय एक समग्र, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

'पीएम श्री': मिसाल पेश करने वाले आदर्श स्कूलों का निर्माण

भारत में स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव हो रहा है, जिसमें गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ से ज़्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत की शिक्षा व्यवस्था का ध्यान अब सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने और एक ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करने पर केंद्रित है, जो हर छात्र के सर्वांगीण विकास में मदद करे।  राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 इस बदलाव के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार करती है, जबकि 'पीएम श्री' पहल स्कूल  स्तर पर इसके दृष्टिकोण  को लागू करती है जिससे नीतिगत उद्देश्यों को संस्थागत व्यवहार में बदला जा सके। 7 सितंबर 2022 को शुरू की गई 'प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (पीएम श्री) योजना, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा लागू की जाने वाली एक केंद्र-प्रायोजित योजना है। इस योजना का मकसद मौजूदा स्कूलों को बेहतर बनाना और उन्हें ऐसे आदर्श संस्थानों के तौर पर विकसित करना है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को असरदार ढंग से लागू करने का उदाहरण पेश करें। 27,360 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली यह योजना 14,500 से ज़्यादा मौजूदा स्कूलों को आदर्श संस्थानों के रूप में मज़बूत करने पर केंद्रित है। इन स्कूलों में सीखने के लिए सुरक्षित, उत्साह बढ़ाने वाला और स्वागतपूर्ण माहौल देने की परिकल्पना की गई है, जिसमें अच्छी बुनियादी सुविधाएं, उपयुक्त शिक्षण संसाधन और विविध शिक्षण अनुभव शामिल होंगे।

जुलाई 2026 तक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों को 'पीएम श्री' स्कूलों के तौर पर चुना गया है। इनमें केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के तहत आने वाले स्कूल भी शामिल हैं। यह तय किए गए लक्ष्य का लगभग 90% है। इस योजना से 20 लाख से ज़्यादा छात्रों को सीधे फ़ायदा होने की उम्मीद है।

'पीएम श्री' का रणनीतिक फोकस

यह योजना सिर्फ़ अलग-अलग स्कूलों को मज़बूत करने तक सीमित नहीं है बल्कि उससे आगे बढ़कर सहायता प्रदान करती है। 'पीएम श्री' स्कूलों को अपने इलाके के लिए मॉडल के तौर पर देखा जाता है, जो अपने तौर-तरीके साझा करते हैं और आस-पास के स्कूलों को मार्गदर्शन, सहायता, सहयोग और क्लस्टरिंग के ज़रिए मदद करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य एक व्यापक प्रभाव पैदा करना है, जिससे समय के साथ अधिक से अधिक स्कूल उत्कृष्ट (मॉडल) मानकों के अनुरूप विकसित हो सकें।

इस योजना के केंद्र में शिक्षा का एक ऐसा नज़रिया है जो जीवन भर सीखने को बढ़ावा देता है और छात्रों को सीखने, पुरानी बातें भूलकर नई बातें सीखने और फिर से सीखने की क्षमता और सोच देता है। इसका व्यापक मकसद ऐसे सक्रिय, उत्पादक और ज़िम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो एक समान, समावेशी और विविधतापूर्ण समाज बनाने में योगदान दे सकें।

पीएम श्री के माध्यम से स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ बनाना

'प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (पीएम श्री) योजना को 2022–23 से 2026–27 तक, यानी पांच साल के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना की कुल लागत 27,360 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 18,128 करोड़ रुपये है। परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) द्वारा मंज़ूर किए गए खर्च में केंद्र का हिस्सा 2023–24 में 2,520 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026–27 में 5,224 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 107% की बढ़ोतरी है, जो 'पीएम श्री' स्कूलों को मज़बूत करने में निवेश के बढ़ते दायरे को दिखाता है।

पीएम श्री स्कूल: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना

पीएम श्री योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी पहलुओं को लागू करना है। यह योजना सिर्फ़ दिमागी विकास पर ही नहीं, बल्कि 21वीं सदी के ज़रूरी कौशलों से लैस लोगों को तैयार करने पर भी ध्यान देती है ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। इस योजना का लक्ष्य सीखने का ऐसा माहौल बनाना है जो सबके लिए समान, समावेशी और आनंददायक हो और जो अलग-अलग पृष्ठभूमि और शैक्षणिक क्षमताओं वाले बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करे। इन स्कूलों को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि छात्र सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हों और यह पक्का किया जा सके कि हर बच्चे को सुरक्षित और उत्साहजनक माहौल में स्वागत, देखभाल और सहयोग का अनुभव हो।

पीएम श्री के तहत गुणवत्ता और उत्कृष्टता के प्रमुख आयाम

पीएम श्री स्कूलों को ऐसे मॉडल स्कूलों के रूप में डिज़ाइन किया गया है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना, समावेशी तौर-तरीकों और संवहनीय विकास के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख सिद्धांतों को दिखाते हैं।

  • समावेशी शिक्षण: विविध पृष्ठभूमियों, बहुभाषी आवश्यकताओं और विभिन्न शिक्षण क्षमताओं का ध्यान रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाली, न्यायसंगत और आनंददायक शिक्षा प्रदान करना।
  • मार्गदर्शन: ‘पीएम श्री’ स्कूल आदर्श विद्यालयों के रूप में कार्य करेंगे और अपने क्षेत्रों के अन्य स्कूलों को नेतृत्व एवं मार्गदर्शन करेंगे।
  • हरित विद्यालय: स्कूल की गुणवत्ता के एक महत्वपूर्ण मानक के रूप में संवहनीय और पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीकों को बढ़ावा देना।
  • अनुभवात्मक शिक्षण: अनुभवात्मक, समग्र, एकीकृत, प्रश्न करने और शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोणों पर जोर देना, जिसमें शुरुआती वर्षों में खेल खेल में और खिलौनों के ज़रिए सीखना भी शामिल है।
  • सीखने के परिणाम: सीखने के परिणामों और ज्ञान के इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीकों और मूल्यांकन पर ध्यान दिया जाता है।
  • गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना: इसमें स्कूल की अवसंरचना का मूल्यांकन कई पैमानों पर किया जाता है, जैसे कि ज़रूरत के हिसाब से सुविधाएँ, काम करने की क्षमता, सुंदरता और सुरक्षा।
  • भविष्य के लिए तैयार कौशल: 21वीं सदी के कौशलों से अवगत कराता है  और स्कूलों को स्थानीय उद्यमिता इकोसिस्टम से जोड़ता है।
  • गुणवत्ता मूल्यांकन: स्कूल गुणवत्ता मूल्यांकन ढांचा (एसक्यूएएफ) पीएम श्री स्कूलों की गुणवत्ता का मूल्यांकन और निगरानी करने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र प्रदान करता है।

पीएम श्री स्कूलों के छह स्तंभ

पीएम श्री स्कूल योजना एनईपी 2020 के 9 अध्यायों से लिए गए छह प्रमुख स्तंभों के उप-क्षेत्रों के विकास पर आधारित है, जो इस प्रकार हैं:

पीएम श्री स्कूल स्कूली शिक्षा का कायाकल्प कैसे करते हैं

बच्चों की ज़रूरतों के हिसाब से बनाई गई शिक्षा

पीएम श्री स्कूल अपनी सम्बद्धता के अनुसार सीबीएसई या संबंधित राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश के पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। उनका पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 5+3+3+4 पाठ्यचर्या और शिक्षण-शास्त्रीय संरचना के अनुसार विकसित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) या राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एससीएफ) का अनुसरण करता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास मुख्य सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम को ढालने की छूट है।

पीएम श्री स्कूल बस्ता-मुक्त दिनों, स्थानीय कारीगरों के साथ इंटर्नशिप, स्थानीय कलाओं, शिल्पों और परंपराओं के अध्ययन, महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और पारंपरिक ज्ञान व तौर-तरीकों को सहेजने के ज़रिए अनुभव-आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा देते हैं।

समानता, समावेश और बहुभाषी शिक्षा

पीएम श्री स्कूलों ने समावेशी और समान शिक्षा देने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि ग्रामीण और वंचित समुदायों सहित विविध पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुँच हो। शिक्षा में असमानता को दूर करने पर ध्यान देकर, इन स्कूलों ने पूरे भारत में सीखने का एक समान माहौल बनाने में मदद की है।

यह योजना विशेष रूप से शुरुआती कक्षाओं में शिक्षण और सीखने के माध्यम के रूप में मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा के उपयोग को भी बढ़ावा देती है। नवीनतम यूडीआईएसइ+ 2025–26 के आंकड़ों के अनुसार, ‘पीएम श्री स्कूलों में 6,102 संस्कृत शिक्षक, 1,994 उर्दू शिक्षक, और 9,152 क्षेत्रीय भाषा के शिक्षक कार्यरत हैं। यह स्थानीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षण को बढ़ावा देने में सामुदायिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती है। यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे में पढ़ने-लिखने और संख्याज्ञान की बुनियादी समझ विकसित हो।

प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण

पीएम श्री स्कूलों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि, शिक्षण और सीखने के वातावरण में प्रौद्योगिकी को व्यवस्थित तरीके से शामिल करना है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और 'स्टेम'-आधारित कार्यक्रमों का प्रावधान अधिक संवादात्मक, अनुभवात्मक और शिक्षार्थी-केंद्रित शैक्षिक वातावरण बनाने में योगदान दे रहा है। ये प्रयास न केवल विविध शिक्षण संसाधनों तक पहुँच बढ़ाते हैं, बल्कि डिजिटल साक्षरता, तकनीकी दक्षता, आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान कौशल के विकास में भी सहायता करते हैं। 'दीक्षा' जैसे प्लेटफॉर्म उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल शैक्षिक संसाधनों के भंडार के रूप में कार्य करते हैं और शिक्षकों व छात्रों के बीच शिक्षण सामग्री के आदान-प्रदान एवं प्रसार को सुगम बनाते हैं, जिससे प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण पद्धतियाँ मज़बूत होती हैं।

छात्रों का सर्वांगीण विकास

पीएम श्री स्कूल छात्रों के विकास के लिए एक सर्वांगीण दृष्टिकोण अपनाते हैं, जिसमें पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ पाठ्येतर गतिविधियों, खेल, कला और जीवन-कौशल की शिक्षा को भी शामिल किया जाता है। यह बहुआयामी दृष्टिकोण केवल पारंपरिक शैक्षणिक उपलब्धियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, सामाजिक-भावनात्मक कौशल और आपसी बातचीत के कौशल को भी बढ़ावा देता है। सीखने और भागीदारी के विविध अवसर प्रदान करके, ये स्कूल छात्रों की क्षमता बढ़ाने, सशक्त और अनुकूलनशील बनाने का प्रयास करते हैं। जिससे वे भविष्य की शैक्षिक, पेशेवर और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकें।

शिक्षकों और स्कूल नेतृत्व को सशक्त बनाना

पीएम श्री स्कूल जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (डीआईईटी) द्वारा सहायता प्राप्त संरचित व्यावसायिक विकास पहल के माध्यम से शिक्षक क्षमता और संस्थागत नेतृत्व को मजबूत करते हैं। पहल के तहत, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए प्रति डीआईईटी 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जबकि विषय शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, विशेष शिक्षकों, आईसीटी शिक्षकों और मास्टर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए प्रति शिक्षक 2,500 रुपये तक की सहायता दी जाती है।

प्रधानाचार्यों को शैक्षिक नेतृत्व, स्कूल प्रबंधन और योग्यता-आधारित शिक्षण योजना का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे संस्थागत योजना और शैक्षिक  प्रशासन को मजबूत करने में सक्षम बनते हैं। शिक्षकों को समग्र प्रगति कार्ड, स्कूल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण, शुरूआती स्तर की काउंसलिंग तथा आईसीटी एकीकरण जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक विकास प्रशिक्षण प्राप्त होता है। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षण क्षमताओं में सुधार करना, स्कूल नेतृत्व को मजबूत करना और शैक्षिक कर्मियों के बीच निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना है।

एक बढ़ता हुआ राष्ट्रीय नेटवर्क

पीएम श्री पहल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 चुने हुए स्कूलों का एक बड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क बनाया है। इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के तहत आने वाले संस्थान भी शामिल हैं। इस पहल ने 725 ज़िलों और 8,340 ब्लॉक/शहरी स्थानीय निकायों को कवर करते हुए एक व्यापक भौगोलिक पहुँच हासिल की है, जिससे देश भर में एक विस्तृत संस्थागत और क्षेत्रीय उपस्थिति बनी है।

चुने गए 13,092 स्कूलों में से 1,305 प्राइमरी स्कूल, 3,102 अपर प्राइमरी स्कूल, 3,141 माध्यमिक स्कूल और 5,544 उच्चतर माध्यमिक स्कूल हैं। इस नेटवर्क में 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), 913 केवीएस स्कूल, 620 एनवीएस स्कूल और 4 एनसीईआरटी स्कूल भी शामिल हैं। इस नेटवर्क का दायरा और विविधता पीएम श्री स्कूलों की बढ़ती पहुंच को दर्शाते हैं।

गुणवत्ता मानकों पर आधारित चयन

पीएम श्री स्कूलों का चयन 'चैलेंज मोड' के माध्यम से किया जाता है, जिसमें स्कूल मिसाल पेश करने वाले मॉडल स्कूल बनने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह चयन एक निश्चित समय-सीमा वाली तीन-चरणों की प्रक्रिया के ज़रिए किया जाता है, जो इस प्रकार है:

  • पहला चरण: समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करते हैं। इसमें वे ज़रूरी सहायता देने और चुने गए स्कूलों को पीएम श्री स्कूलों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों को हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करते हैं।

  • चरण 2: पात्र स्कूलों की पहचान

यू-डीआईएसई+ डेटा के माध्यम से उपलब्ध निर्धारित न्यूनतम मानदंडों और प्रासंगिक संकेतकों के आधार पर पीएम श्री स्कूलों के रूप में चयन के लिए पात्र स्कूलों के एक समूह की पहचान की जाती है।

  • चरण 3: चैलेंज विधि के माध्यम से चयन

चरण 2 में पहचाने गए पात्र स्कूल निर्दिष्ट मानदंडों के अनुपालन को प्रदर्शित करने के लिए चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया में भाग लेते हैं। स्कूल निर्धारित शर्तों के तहत आवश्यकताओं की पूर्ति को सिद्ध करते हुए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।

  • संबंधित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों, केवीएस, या एनवीएस अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के माध्यम से शर्तों के पूरा होने की पुष्टि और प्रमाणीकरण किया जाता है जिसके बाद वे चयनित स्कूलों की सूची की सिफारिश मंत्रालय से करते हैं।

स्कूलों के अंतिम चयन के लिए शिक्षा मंत्रालय के सचिव (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता) की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। स्कूलों के लिए कुछ न्यूनतम मानकों को पूरा करना अनिवार्य है, जैसे—पक्की इमारत, बिना रुकावट के आने-जाने की सुविधा, सुरक्षा उपाय, अलग- अलग शौचालय, पीने का पानी, हाथ धोने की सुविधा, बिजली, शिक्षकों के लिए पहचान पत्र, प्रारंभिक और उच्च माध्यमिक स्तरों पर राज्य के औसत नामांकन से अधिक नामांकन तथा पुस्तकालय या खेल सुविधाएँ। 'चैलेंज विधिके तहत शहरी क्षेत्रों के स्कूलों को न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। इस मूल्यांकन में अवसंरचना, सीखने के नतीजे, शिक्षण-शास्त्र, पीएम पोषण, व्यावसायिक शिक्षा, हरित पहल और हितधारकों की प्रतिबद्धता शामिल है।

व्यापक बदलाव के मॉडल के रूप में स्कूल

पीएम श्री’, स्कूल के विकास के लिए सिर्फ़ अवसंरचना पर ध्यान देने वाले नज़रिए से हटकर, सर्वांगीण, समावेशी, समान और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण संस्थान बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। यह पहल गुणवत्ता और योग्यता-आधारित शिक्षा, शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास, प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा और एक सुरक्षित, समावेशी व सक्षम स्कूल वातावरण के निर्माण पर जोर देकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को व्यावहारिक रूप देती है।

पीएम श्री स्कूलों को ऐसे आदर्श संस्थानों के तौर पर देखा जा रहा है जो नई और अनोखी शिक्षा पद्धतियों को अपनाकर उन्हें पेश करेंगे और फैलाएंगे। इन तरीकों को आस-पास के स्कूल भी अपना सकते हैं और लागू कर सकते हैं, जिससे स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार हो सके। इसका मुख्य मकसद ऐसे काबिल, आत्मविश्वासी, रचनात्मक और ज़िम्मेदार विद्यार्थी तैयार करना है, जिनके पास ज्ञान, कौशल और मूल्य हों ताकि वे एक ऐसे भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें जो ज़्यादा न्यायपूर्ण, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हो।

संदर्भ

शिक्षा मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2290004&reg=48&lang=2

https://pmshri.education.gov.in/#aboutPmshri

https://pmshri.education.gov.in/assets/pdf/part1_pmshri.pdf

https://pmshri.education.gov.in/faqs

https://pmshri.education.gov.in/#main-content

https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2291330&reg=1&lang=1

https://education.vikaspedia.in/viewcontent/education/policies-and-schemes/pm-schools-for-rising-india-scheme?lgn=en

https://sansad.in/getFile/annex/271/AU1144_1PgQNc.pdf?source=pqars

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2291279&reg=1&lang=1

https://x.com/EduMinOfIndia/status/1567485212476702721

 

नीति आयोग

https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2026-05/School-Education-System-in-India.pdf

 

पीआईबी शोध

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