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बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर भारत-बेल्जियम संयुक्त वक्तव्य

प्रविष्टि तिथि: 03 SEP 2026 2:48PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री श्री बार्ट डी वेवर 2 से 4 सितंबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री श्री थियो फ्रेंकेन और अधिकारियों तथा व्यापारिक नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। फरवरी 2025 में पदभार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री डी वेवर की भारत की यह पहली यात्रा है।

प्रधानमंत्री डी वेवर ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद उनहोंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जो पहले सीमित प्रारूप में और बाद में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। चर्चा में दोनों देशों के संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत हुई। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री डी वेवर और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए दोपहर का भोजन आयोजित किया।

दोनों नेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्लैंडर्स फील्ड्स में 9 हजार से अधिक भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने यह भी याद किया कि बेल्जियम उन पहले यूरोपीय देशों में से था जिन्होंने 1947 में भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों नेताओं ने कहा कि तब से यह साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों, परस्पर विश्वास, आर्थिक  सहयोग और सुदृढ़ जन-संबंधों में प्रगाढ़ता से और बढी है। दोनों नेताओं ने इस बहुआयामी संबंध को और विस्तारित और गहरा बनाने की इच्छा व्यक्त की। वर्ष 2027 बेल्जियम-भारत राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ है जो भारत और बेल्जियम को द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा व्यापक बनाने का ऐतिहासिक अवसर होगा।

दोनों नेताओं ने 15 जुलाई 2026 को ब्रुसेल्स में भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता आरंभ होने का स्वागत किया, जिसकी सह-अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने की। प्रधानमंत्री मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक व्यापक साझेदारी पर आधारित इस वार्ता में व्यापार और निवेश, हरित परिवर्तन, प्रौद्योगिकी, संपर्क, रक्षा, सुरक्षा और जन-संबंधों में सहयोग बढ़ाने के लिए नियमित और व्यापक तंत्र स्थापित किए जाने की सराहना की। इस बारे में, उन्होंने आगामी विदेश कार्यालय परामर्श के आयोजन का स्वागत किया, जो रणनीतिक वार्ता के तहत निर्धारित प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।

दोनों नेताओं ने न्यायसंगत और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने, वैश्विक चुनौतियों के समाधान और तकनीकी तथा आर्थिक क्षेत्रों सहित उभरती स्थितियों के लिए दुनिया को तैयार करने हेतु संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर केंद्रित, विस्तारित और प्रभावी बहुपक्षवाद का आह्वान दोहराया। दोनों नेताओं ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया जिससे मौजूदा विश्व का अधिक प्रतिनिधित्व हो सके। बेल्जियम ने सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी के समर्थन पर भी सहमति जताई। इसमें भारत 2028-29 कार्यकाल के लिए और बेल्जियम 2037-2038 कार्यकाल के लिए उम्मीदवारी करेगा।

भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी और मुक्त व्यापार समझौता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-बेल्जियम संबंधों में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में रहने की पुष्टि की। उन्होंने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की सफल वार्ता संपन्न होने का स्वागत किया और भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के लिए यूरोपीय संघ-भारत निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत समझौते पर वार्ता भी जल्द पूरा करने का आह्वान किया।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को रणनीतिक साझेदारी में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए, उन्होंने मूल्य श्रृंखलाओं के विविधीकरण और नए बाजार खोलकर व्यापार और निवेश सहयोग की वास्तविक क्षमता साकार करने के लिए समझौते को समय पर कार्यान्वित करने का आह्वान किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने जुलाई 2026 में ब्रुसेल्स में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक सहित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया। प्रगति का उद्देश्य व्यापार और प्रौद्योगिकी के बढ़ते अंतर्संबंधों के बीच एकीकृत, सुदृढ़ और संधारणीय आर्थिक तथा तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देना है। इस सिलसिले में उन्होंने व्यापार, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सुरक्षा और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में भारत, बेल्जियम और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों पक्षों ने 2030 के लिए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे का भी समर्थन किया, जिसका उद्देश्य दोनों के बीच सहयोग व्यापक तथा गहन बनाकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनाना है, जिससे दोनों साझेदारों और पूरे विश्व को लाभकारी, ठोस और परिवर्तनकारी परिणाम मिले। उन्होंने यह भी माना कि भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर से समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरे, अंतरिक्ष और आतंकवाद निरोधक उपायों सहित साझा हितों के क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग और गहरा होगा।

व्यापार, आर्थिक सहयोग और निवेश

बेल्जियम विश्व की 24वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत का लक्ष्य आगामी वर्षों में 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। दोनों नेताओं ने पारस्परिक लाभप्रद साझेदारियों के प्रचुर अवसरों की भी चर्चा की। अपनी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत पूरक क्षमता को समझते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग और बढाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस सिलसिले में उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के निरंतर विस्तार और द्विपक्षीय व्यापार विविध क्षेत्रों में विस्तारित होने का स्वागत किया। उन्होंने अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना बनाने के उद्देश्य से साझा हित के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की  दृढ़ संकल्पता भी व्यक्त की।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मार्च 2025 में राजकुमारी एस्ट्रिड के नेतृत्व में भारत में आयोजित बेल्जियम के सफल आर्थिक मिशन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस मिशन को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा सहित व्यवसायों और संस्थानों के बीच नई साझेदारी विकसित करने और जीवन विज्ञान, दवा और स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, विमानन और अंतरिक्ष, प्रचालन तंत्र, परिवहन और बंदरगाह, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और हरित इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान, उन्नत सामग्री और विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में इसे महत्वपूर्ण बताया। इसी सिलसिले में उन्होंने दवा, जैव प्रौद्योगिकी, नैदानिक ​​अनुसंधान, नवाचार और उन्नत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में दोनों देशों की पूरक शक्तियों पर आधारित जीवन विज्ञान क्षेत्र में भारत और बेल्जियम के बीच साझेदारी की संभावनाएं रेखांकित की और उद्योग, शैक्षणिक जगत तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने बेल्जियम की क्षेत्रीय व्यापार और निवेश एजेंसियों सहित नियमित उच्च स्तरीय यात्राओं द्वारा सहयोग निरंतरता बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विकास और विविधीकरण पर संतोष व्यक्त किया तथा सेमीकंडक्टर, रसायन, दवा, रक्षा औद्योगिक सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों के शोधन और पुनर्चक्रण, संवहनीय उद्योगों और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का स्वागत किया, जिसमें निजी क्षेत्र को शामिल करते हुए सहयोग के उभरते अवसरों का पता लगाना भी शामिल है। दोनों नेताओं ने एंटवर्प को मुंबई और सूरत से जोड़ने वाले हीरा व्यापार के स्थायी महत्व को भी स्वीकार किया और आर्थिक जुड़ाव तथा साझा विकास के नए अवसरों का पता लगाकर साझेदारी और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।

दोनों देशों के बीच समुद्री और बंदरगाह सहयोग के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने बंदरगाहों के विकास, प्रचालन तंत्र, कनेक्टिविटी, ड्रेजिंग (बंदरगाह या समुद्र के तल से मशीनों द्वारा गाद, रेत, कचरा और अन्य मलबे बाहर निकालना) और अपतटीय पवन ऊर्जा अवसंरचना में सहयोग गहन बनाने के अवसरों का स्वागत किया। इस सिलसिले में उन्होंने अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग में बेल्जियम की फ्लेमिश सरकार (देश के डच-भाषी फ्लेमिश समुदाय और फ्लेमिश क्षेत्र (फ्लैंडर्स) की कार्यकारी शाखा या प्रशासनिक सरकार) की गतिशीलता और पत्तन मंत्री, एनिक डी रिडर की निर्धारित भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने एंटवर्प/फ़्लैंडर्स पोर्ट ट्रेनिंग सेंटर और भारत के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी -जेएनपीए के बीच, भारतीय बंदरगाह क्षेत्र और व्यापक रूप से समुद्री क्षेत्र में, सभी स्तरों के प्रबंधन पर अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान और क्षमता विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावना का भी स्वागत किया। उन्होंने भारत के बंदरगाह अवसंरचना विकास में बेल्जियम की ड्रेजिंग विशेषज्ञता और अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग संबंधी भूमिका को भी स्वीकार किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते सहयोग का स्वागत किया। यह सहयोग बेल्जियम-भारतीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी नेटवर्क-बीआईएनए द्वारा विकसित हो रहा है। उन्होंने भारत में कई महत्वपूर्ण खगोलीय सुविधाओं - देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप, देवस्थल इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप, माउंट आबू टेलीस्कोप और उदयपुर स्थित मल्टी-एप्लिकेशन सोलर टेलीस्कोप में बेल्जियम के योगदान को सराहा।

दोनों नेताओं ने भारत-बेल्जियम निवेश त्वरित समाधान तंत्र आरंभ किए जाने का स्वागत किया और इसे द्विपक्षीय निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह तंत्र भारत में बेल्जियम के निवेश और बेल्जियम में भारतीय निवेश को सुगम बनाने और उनके विस्तार, व्यवसायों को सहयोग निवेश बाधाओं को दूर करने और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग हेतु अनुकूल माहौल बनाने में समर्पित मंच होगा।

दोनों नेताओं ने बेल्जियम के संप्रभु धन कोष, फेडरल होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी और भारत के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के बीच जारी सहभागिता का भी स्वागत किया। उन्होंने भारत-बेल्जियम आर्थिक और निवेश गलियारे की स्थापना में सहयोग के लिए एसएफपीआईएम-एनआईआईएफ के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिए जाने की आशा व्यक्त की। उन्होंने विकासशील देशों के लिए बेल्जियम निवेश कंपनी- बीआईओ इन्वेस्ट के योगदान का भी स्वागत किया और परस्पर हित के क्षेत्रों में बीआईओ इन्वेस्ट और एनआईआईएफ के बीच संभावित सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के प्रमुख तंत्र के रूप में भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक संघ - बीएलईयू संयुक्त आर्थिक आयोग के महत्व की भी पुष्टि की और कहा कि वे इस वर्ष के अंत में होने वाले इसके 19वें सत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ बेल्जियम की एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए आतंकवादी हमले की फिर से निंदा की। उन्होंने आतंकवाद विरोधी व्यापक/वैश्विक दृष्टिकोण की प्रतिबद्धता पर बल दिया और कहा कि आतंकवाद के किसी भी रूप को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के अपराधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने कहा कि आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 प्रतिबंध व्यवस्था द्वारा नामित संगठन, आतंकवादी नेटवर्क, उनके सुरक्षित ठिकाने और उन्हें दी जाने वाली वित्तीय सहायता के विरूद्ध यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल- एफएटीएफ के माध्यम से भी की जानी चाहिए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध तंत्र सहित आतंकवाद रोकने और इसका मुकाबला करने में मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने उभरते आतंकवादी खतरों से निपटने में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के के लिए बेल्जियम-भारत आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने की संभावना तलाशने की मंशा जताई।

रक्षा सहयोग पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। इससे नियमित आधिकारिक यात्रा, रक्षा अधिकारी वार्ता, शिक्षा और प्रशिक्षण, अनुसंधान सहयोग और रक्षा-औद्योगिक साझेदारी का ढांचा तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि यह समझौता मार्च 2025 में भारत और बेल्जियम के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने और उसे सुदृढ बनाने के समझौते पर आधारित है। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, शिक्षा और सैन्य आदान-प्रदान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच लगातार बढ़ते जुड़ाव का स्वागत किया। इस सिलसिले में उन्होंने 5 से 8 नवंबर 2026 तक बेल्जियम के फ्रिगेट लियोपोल्ड I पोत के भारत की यात्रा पर आने, बेल्जियम डिफेंस कॉलेज द्वारा भारत में विश्व अध्ययन यात्रा 2027 आयोजित करने की प्रस्तावित योजना और अक्टूबर 2026 में सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की बेल्जियम की यात्रा का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने इसे दोनों देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच उच्च स्तरीय संपर्क सहयोग मजबूत करने का ठोस अवसर बताया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नई दिल्ली में बेल्जियम द्वारा रक्षा अटैशे की नियुक्ति का स्वागत किया और निकट भविष्य में ब्रुसेल्स स्थित भारतीय दूतावास में एक स्थायी रक्षा अटैशे की नियुक्ति के भारत के फैसले का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच निरंतर बढ़ते जुड़ाव का स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते रक्षा-औद्योगिक सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि मार्च 2025 में भारत में बेल्जियम के आर्थिक मिशन के दौरान ऐसी साझेदारियों को और मजबूती मिली। रक्षा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सह-विकास और सह-उत्पादन में आगे सहयोग बढने की संभावनाओं पर दोनों नेताओं ने बेल्जियम और भारतीय रक्षा उद्योगों के बीच हुए कई समझौतों और साझेदारियों पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने  दोनों पक्षों के उद्योगों के बीच सहयोग जारी रखने को भी प्रोत्साहित किया।

दोनों नेताओं ने यप्रेस स्थित फ्लैंडर्स फील्ड्स म्यूजियम और नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर आर्म्ड फोर्सेज हिस्टोरिकल रिसर्च- सीएएफएचआर के बीच सहयोग पर भी गौर किया, जो भारत और बेल्जियम की साझा ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित और विकसित कर रहे हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर अपराध और ऐसे मामलों से निपटने में सहयोग के लिए भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो- सीबीआई और बेल्जियम की संघीय पुलिस के बीच समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता संस्थागत संबंधों को मजबूत बनाकर सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगा, क्षमता विकास और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, भगोड़े अप‍राधियों का पता लगाने में सहयोग बढ़ाएगा और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर अपराध और संबंधित मामलों से निपटने में द्विपक्षीय कानून प्रवर्तन सहयोग गहन बनाएगा।

हरित परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियां, स्वास्थ्य सेवा सहयोग और स्टार्टअप

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और बेल्जियम के बीच नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग पर नवीनीकृत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नया समझौता ज्ञापन 2015 के ढांचे के तहत स्थापित सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूह के कार्यों पर आधारित है, जिससे हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, अपतटीय पवन ऊर्जा, जैव-ऊर्जा, लघु जलविद्युत और पंप भंडारण संयंत्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढेगा।

दोनों देशों ने औद्योगिक साझेदारी और ज्ञान साझाकरण सहित हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने जीएच2 इंडिया, बेल्जियम हाइड्रोजन काउंसिल और फ्लैंडर्स इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेड के बीच हुए समझौता ज्ञापन सहयोग, ब्रुसेल्स में एग्मोंट इंस्टीट्यूट के हरित हाइड्रोजन एक्सचेंज कार्यक्रम में भारतीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और दोनों देशों के सरकारी, उद्योग और अनुसंधान प्रतिनिधियों की पारस्परिक यात्राओं को स्वीकार किया। उन्होंने उत्पादन, परिवहन, भंडारण और अंतिम उपयोग के लिए हरित हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला मजबूत बनाने में भारत और बेल्जियम की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जाए, नवाचार को बढ़ावा मिले और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाकर सतत आर्थिक विकास प्रोत्साहित किया जा सके।

बेल्जियम और भारत पेरिस समझौते, तापमान घटाने सहित इसके दीर्घकालिक लक्ष्यों और इसके सिद्धांतों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इनमें समानता और समान लेकिन विभेदित दायित्व और संबंधित राष्ट्रीय परिस्थितियां शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन सीओपी 31 की सफलता का समर्थन किया जो कार्यान्वयन गति और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सभी स्रोतों से पर्याप्त, पूर्वानुमानित और सुलभ जलवायु वित्तीय जुटाने, जलवायु प्रौद्योगिकी के विकास और प्रसार तथा क्षमता विकास और इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत बनाने के महत्व पर बल दिया। दोनों पक्षों ने जलवायु अनुकूलन, स्थिति सुदृढता और आपदा तैयारियां मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने जलवायु स्थितिसुदृढता, सतत विकास और तटीय समुदायों के कल्याण में महासागरों और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों की अहम भूमिका भी स्वीकार की। सतत विकास और जलवायु स्थितिसुदृढता के घटक के रूप में महासागर शासन व्यवस्था मजबूत बनाने के महत्व को समझते हुए, उन्होंने राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे जैव विविधता समझौते और समुद्री मामलों में व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।

दोनों नेताओं ने भारतीय माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स पारितंत्र, के बीच सहयोग प्रोत्साहित किया, जिसमें सेमीकंडक्टर कंपनियां, चिपइन सेंटर, सी-डीएसी, विश्वविद्यालय और बेल्जियम की आईएमईसी शामिल हैं।  सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में गहन साझेदारी विकसित करने के लिए उन्होंने अंतःक्रियाओं के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इससे दोनों देशों में मजबूत और उन्नत प्रौद्योगिकी पारितंत्र निर्मित किया जा सकेगा।

दोनों नेताओं ने भारत द्वारा आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में फ्लैंडर्स सरकार के मंत्री-राष्ट्रपति की भागीदारी का स्वागत किया और कहा कि इस यात्रा से कृत्रिम बुद्धिमत्ता- एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार में बढता सहयोग रेखांकित हुआ है।

दोनों पक्षों ने स्टार्टअप इनक्यूबेशन के क्षेत्र में सहयोग का स्वागत किया। इस सिलसिले में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्टार्ट अप हब और हब ब्रुसेल्स के साथ ही अन्य स्टार्टअप हब और कौशल विकास केंद्रों के बीच सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। इसका उद्देश्य नवाचार-आधारित उद्यमिता को सहयोग देकर डिजिटल कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा स्टार्टअप पारितंत्र विकसित करना है।

संपर्क, गतिशीलता, शिक्षा, संस्कृति और जन-जन संबंध

दोनों नेताओं ने वीज़ा सेवा बेहतर बनाकर दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और संपर्क बढाने के महत्व को स्वीकार किया। इस सिलसिले में उन्होंने सुगम और त्वरित प्रक्रिया की आवश्यकता स्वीकार की। भारत और बेल्जियम के बीच आवाजाही बढ़ने के साथ, बेल्जियम और भारत में स्थित राजनयिक मिशनों की वीज़ा प्रक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसे देखते हुए दोनों नेताओं ने भारत में बेल्जियम की वीज़ा सेवा बेहतर बनाने के प्रयास का स्वागत किया।

गतिशीलता संबंधी व्यापक सहयोग ढांचे पर यूरोपीय संघ के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और भारत में एक पायलट यूरोपीय संघ कानूनी गेटवे कार्यालय आरंभ किए जाने का स्वागत करते हुए दोनों नेताओं ने पेशेवर कर्मियों, कुशल कार्यबल और विद्यार्थियों की आवाजाही के लिए वैधानिक उपायों को बढ़ावा देने और भारत और यूरोपीय संघ के बीच लोगों के आपसी संबंध मजबूत बनाने की इसकी भूमिका रेखांकित की। उन्होंने व्यापार, निवेश और लोगों के आपसी संबंधों में निरंतर प्रगाढता के साथ ही कुशल पेशेवरों, छात्रों, शोधकर्ताओं और व्यावसायिक यात्रियों की आवाजाही की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने कनेक्टिविटी बढाने के महत्व पर जोर दिया और एयरलाइन संचालकों को बेल्जियम और भारत के बीच सीधी हवाई उड़ान सेवा स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उन्होंने बेल्जियम के स्वास्थ्य संस्थानों और भारत के बीच जारी सहयोग का स्वागत किया, जिसमें भारत से बेल्जियम में कुशल नर्सों की आवाजाही सुविधाजनक बनाने की पहल के साथ ही स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में बेल्जियम और भारत के बीच व्यापक नागरिक समाज सहयोग शामिल हैं। उन्होंने गतिशीलता और प्रवासन समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के लिए निरंतर बातचीत को भी प्रोत्साहित किया।

बेल्जियम आर्थिक मिशन के दौरान स्थापित अनेक शैक्षणिक साझेदारियों का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बेल्जियम के प्रमुख विश्वविद्यालयों और अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए आमंत्रित किया। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों, संस्थानों और उद्योग हितधारकों को भारत और बेल्जियम के कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रणालियों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्र विकसित करने को प्रोत्साहित किया। इसमें सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं का क्षमता निर्माण, प्रशिक्षुता और कार्य-आधारित शिक्षा, उभरते और भविष्योन्मुखी कौशल सहयोग और शैक्षणिक योग्यताओं में सामंजस्य बैठाने और मान्यता देने पर बातचीत शामिल हैं, ताकि रोजगार क्षमता बढाकर कुशल पेशेवरों की एक दूसरे के यहां रोजगार संभावना बढाई जा सके। दोनों नेताओं ने भारतीय साझेदारों के साथ अनुसंधान सहयोग, नवाचार और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में फ्लेमिश इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजिकल रिसर्च- वीआईटीओ के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और बेल्जियम के संघीय लोक सेवा विदेश मंत्रालय के बीच राजनयिक प्रशिक्षण सहयोग का स्वागत किया।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे

दोनों प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने यूक्रेन युद्ध के संबंध में, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार संवाद और कूटनीति द्वारा व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। पश्चिम एशिया की स्थिति पर उन्होंने क्षेत्र के हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की और इनके शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्बाध समुद्री नौवहन बनाए रखने के महत्व पर भी बल दिया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने परस्पर विश्वास, शांति, समृद्धि और विकास के साझा दृष्टिकोण से प्रेरित भारत-बेल्जियम साझेदारी और अधिक प्रगाढ बनाने तथा इसे विविध क्षेत्रों में विस्तारित करने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विस्तारित द्विपक्षीय साझेदारी- लोकतंत्र, विधि सम्मत शासन, मानवाधिकारों के सम्मान, लैंगिक समानता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता द्वारा निर्देशित होती रहेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन्हीं सिद्धांतों पर बढ़ते हुए भारत-बेल्जियम साझेदारी दोनों देशों के लोगों और पूरे विश्व के लिए लाभकारी बनी रहेगी तथा साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत और यूरोप के बीच सहयोग मजबूत बनाने में सहायक होगी।

भारत-बेल्जियम साझेदारी मजबूत बनाने और विविध क्षेत्रों में विस्तारित करने तथा भारत-यूरोप के बढ़ते जुड़ाव और भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों को और प्रगाढ बनाने के सिलसिले में  प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को आपसी सहमति से सुविधाजनक तिथि पर बेल्जियम की द्विपक्षीय यात्रा करने का निमंत्रण दिया।

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पीके/केसी/एसकेवी/एसके


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