युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेलो इंडिया संवाद में खेलों के संदर्भ में विकसित भारत के लिए अपना विजन प्रस्तुत किया
खेलो इंडिया देशभर में खेल प्रतिभाओं को पोषित करने का एक शानदार मंच बन गया है; यह युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों को साकार करने के अवसर और समर्थन प्रदान कर रहा है: प्रधानमंत्री श्री मोदी
जब मैं खेलों की बात करता हूं, तो यह सिर्फ पदक जीतने के बारे में नहीं है; यह भारत की खेलशक्ति और युवाशक्ति को एक साथ जोड़कर एक विकसित भारत के निर्माण का अभियान है: प्रधानमंत्री श्री मोदी
अन्य देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं जिनमें भारत भाग भी नहीं लेता; हमें इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी: प्रधानमंत्री श्री मोदी
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भारत के खेल भविष्य के निर्माण में प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की
डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी के व्यक्तिगत जुड़ाव और चैंपियनों के प्रति उनके अटूट समर्थन की प्रशंसा की
प्रविष्टि तिथि:
27 AUG 2026 5:46PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार, 27 अगस्त, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खेलो इंडिया संवाद में भाग लिया और राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 समारोह के तहत देश भर के 5,000 से अधिक संस्थानों से जुड़े युवाओं और एथलीटों को संबोधित किया।
खेलो इंडिया संवाद का आयोजन राष्ट्रीय खेल दिवस के समारोहों के हिस्से के रूप में किया गया, जो हर साल 29 अगस्त को पूर्व भारतीय हॉकी दिग्गज मेजर ध्यानचंद की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में खेलों के गहरे उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "जब मैं खेलों की बात करता हूं, तो इसका मतलब सिर्फ पदक जीतना नहीं है; यह भारत की खेलशक्ति और युवाशक्ति को एक साथ जोड़कर एक विकसित भारत का निर्माण करने का अभियान है। मैंने हमेशा कहा है, 'जो खेलेंगे, वे खिलेंगे।'"

वैश्विक खेल विधाओं में भारत की उपस्थिति बढ़ाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "अन्य देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं जिनमें भारत भाग भी नहीं लेता; हमें इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी।"
उन्होंने कहा, "पदक की संख्या बढ़ाने के लिए हमें इन खेलों में महारत हासिल करनी ही होगी।"
इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने 2036 के ओलंपिक के लिए भारत की दीर्घकालिक रणनीति की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, ताकि बड़ी संख्या में भारतीय एथलीट न केवल क्वालीफाई करने में सक्षम हों, बल्कि विभिन्न प्रकार के खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन भी कर सकें।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को लक्षित करते हुए एक विशाल राष्ट्रीय प्रतिभा खोज अभियान के शुभारंभ की जानकारी दी। श्री मोदी ने कहा, "इसके लिए सरकार से जिस भी सहयोग की आवश्यकता होगी, सरकार इसमें आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।"
केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर से प्रधानमंत्री का वर्चुअल माध्यम से स्वागत करते हुए कहा, "देश ने पहली बार खेलों को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा है।"

खेल मंत्री ने प्रधानमंत्री के खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा, "खिलाड़ियों के साथ आपका व्यक्तिगत जुड़ाव ही आपकी खेल संबंधी विजन की सबसे बड़ी ताकत है। आपने चैंपियनों की जीत का जश्न मनाया है, हमेशा उनकी प्रशंसा और उनका प्रोत्साहन किया है। लेकिन जब भी किसी खिलाड़ी को हार का सामना करना पड़ा, आपने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। यही कारण है कि भारत के खिलाड़ी आपको अपना मानते हैं।"
डॉ. मांडविया ने मायभारत प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच की सराहना करते हुए कहा, "देश भर में 2.4 करोड़ से अधिक युवा पहले ही इससे जुड़ चुके हैं और अपने करियर के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।"

नीति-निर्माण के प्रति सरकार के युवा-केंद्रित दृष्टिकोण पर उन्होंने कहा, "युवाओं के विचारों पर आधारित इस वर्ष के बजट को युवा-केंद्रित बजट कहा गया। आज देश के युवा महसूस करते हैं कि उनके विचारों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें लागू किया जा रहा है।"
डॉ. मंडाविया ने पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से खेल प्रशासन को मजबूत करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष अवसर को मजबूत करने के प्रयास से यह सुनिश्चित होता है कि प्रतिभा को उसका उचित सम्मान मिले।"

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग ने आईआईटी गांधीनगर में उपस्थित युवाओं के साथ एक एथलीट के रूप में अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की।
नारंग ने कहा, “आजकल खेलों में प्रशासनिक बदलावों की बदौलत खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतरीन उपकरण मिलते हैं। इन्हीं बदलावों के कारण हम यहां आए हैं।”
उनके साथ 2024 पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता शीतल देवी भी थीं, जिन्होंने उपस्थित लोगों के साथ अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। उन्होंने कहा, “आज मानसिकता बदल गई है। जो लोग पहले सवाल करते थे, 'ये (पैरा-एथलीट) क्या हासिल कर सकते हैं,' आज कहते हैं, 'हां, वे हासिल करेंगे, वे ही पदक घर लाएंगे'।”

आईआईटी गांधीनगर के छात्रों ने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं के सामने एक प्रस्तुति दी, जो प्रधानमंत्री द्वारा उल्लिखित पांच प्रमुख विषयों - खेल, ओलंपिक आकांक्षाएं, युवा नेतृत्व, विकसित भारत और नशा मुक्त युवा - पर आधारित थी, जिसमें खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की दिशा में भारत की यात्रा पर विशेष ध्यान दिया गया था।
***
पीके/केसी/एसकेएस/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2303887)
आगंतुक पटल : 108