कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कौशल विकास और कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एमएसडीई मंत्रालय ने भारत और जापान के बीच हितधारक बैठक बुलाई


परामर्श में ईएसडीपी, जापानी भाषा प्रशिक्षण, नियोक्ताओं के साथ संपर्क और उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल विकास पर ध्यान केन्‍द्रित किया गया

प्रविष्टि तिथि: 14 AUG 2026 5:33PM by PIB Delhi

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज नई दिल्ली में भारत-जापान कौशल विकास हितधारक बैठक आयोजित की। इसमें विदेश मंत्रालय, राज्य सरकारों और भेजने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ जापान सरकार के प्रतिनिधि, जापानी उद्योग जगत के प्रतिनिधि, भर्ती एजेंट, प्रशिक्षण भागीदार और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए। इसका उद्देश्य भारत और जापान के बीच कौशल विकास तथा कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सहयोग को मजबूत बनाना था।

बैठक के दौरान 2025 में आयोजित 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के अवसर पर संयुक्त रूप से जारी भारत-जापान मानव संसाधन आदान-प्रदान और सहयोग के लिए कार्य योजना को आगे बढ़ाने पर ध्यान केन्‍द्रित किया गया। चर्चा में उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण, जापानी भाषा और संस्कृति की तैयारी, मान्यता प्राप्त आकलन, नियोक्ताओं के साथ मजबूत जुड़ाव तथा दोनों देशों के संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से भारतीय युवाओं को जापान में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक को कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी; भारत में जापान के राजदूत महामहिम श्री ओनो केइइची; विदेश मंत्रालय के उत्प्रवास नीति एवं कल्याण (ईपीऔरडब्‍ल्‍यू) प्रभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जीना उइका; एमएसडीई सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी; एमएसडीई के अपर सचिव श्री निरंजन कुमार सुधांशु; तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अरुण कुमार पिल्लई ने संबोधित किया। परामर्श में जेनकन कार्पोरेशन केयर, सोम्‍पो केयर, फोर्थ वैली, कोनोईके ग्रुप और टोयोटा किर्लोस्‍कर के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एक श्रव्य-दृश्य प्रस्तुति भी दिखाई गई, जिसमें जापान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार हासिल करने वाले भारतीय उम्‍मीदवारों के अनुभवों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से मौजूदा सहयोग ढांचों के ठोस परिणामों को उजागर किया गया।

बैठक के दौरान कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने कहा, “भारत के युवाओं को सही कौशल, आत्मविश्वास और तैयारी के साथ वैश्विक अवसरों तक पहुंचने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। हमारा ध्यान केवल विदेशों में रोजगार के अवसरों के लिए मार्ग तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि प्रत्येक उम्‍मीदवार प्रासंगिक तकनीकी कौशल, भाषा दक्षता और कार्यस्थल की समझ से सुसज्जित हो। उन्होंने कहा कि जापान के साथ साझेदारी मजबूत उद्योग भागीदारी के साथ सुव्यवस्थित मार्ग तैयार करने का अवसर प्रदान करती है और इन चर्चाओं से भारतीय युवाओं के लिए अवसरों के विस्तार के उद्देश्य को स्पष्ट कार्ययोजना में बदलने में मदद मिलेगी।”

मुख्य भाषण में, भारत में जापान के राजदूत महामहिम श्री ओनो केइइची ने कहा, “जापान और भारत में एक-दूसरे की पूरक क्षमताएं हैं। जापान में कुशल मानव संसाधनों की बढ़ती मांग भारत के विशाल युवा प्रतिभा समूह के अनुरूप है। इन क्षमताओं को उपयुक्त कौशल विकास, जापानी भाषा प्रशिक्षण और विश्वसनीय रोजगार मार्गों के माध्यम से जोड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों को व्यावहारिक सहयोग के लिए एक मंच पर लाने के एमएसडीई के प्रयासों का स्वागत किया, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा जन-जन के संबंध और मजबूत होंगे।”

एमएसडीई सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने कहा किकार्य योजना एक स्पष्ट दिशा प्रदान करती है और तत्काल आवश्यकता इसे सभी हितधारकों के बीच समन्वित क्रियान्वयन में बदलने की है। उन्होंने उम्‍मीदवारों के जुटने, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल, भाषा प्रशिक्षण, आकलन प्रणालियों, प्रस्थान-पूर्व तैयारी और नियोक्ताओं की मांग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस परामर्श से मंत्रालयों, राज्यों, प्रशिक्षण संस्थानों, भेजने वाले संगठनों और उद्योग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने में मदद मिली है। उन्होंने दोहराया कि एमएसडीई का ध्यान गुणवत्ता, प्रासंगिकता और परिणामों पर केन्‍द्रित रहेगा, ताकि उम्‍मीदवार पूरी तरह तैयार हों और नियोक्ताओं को उनके कौशल पर भरोसा हो।”

इस बैठक में भारत और जापान के विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने व्यापक रूप से भाग लिया। इनमें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के संस्थानों, विदेश मंत्रालय, उत्प्रवास नीति एवं कल्याण (ईपी और डब्‍ल्‍यू) प्रभाग, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, राज्य कौशल एवं श्रम विभाग, राज्य भर्ती एजेंसियां तथा तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीआईटीपी) के तहत सूचीबद्ध भेजने वाले संगठन शामिल थे। जापान की ओर से भारत में जापान का दूतावास, जापान फाउंडेशन, जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए), जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जेट्रो), जापान इंटरनेशनल ट्रेनी एंड स्किल्ड वर्कर कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन, भारत में जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा जापान सरकार का अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) शामिल हुए। इस प्रकार नीति, कौशल विकास, प्रशिक्षण, भर्ती और नियोक्ताओं के दृष्टिकोण को एक ही मंच पर लाया गया।

परामर्श के तीन सत्रों में भारत-जापान कौशल सहयोग के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की गई। पहले सत्र में तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीआईटीपी), निर्दिष्ट कुशल कर्मी (एसएसडब्‍ल्‍यू) और आगामी कौशल विकास के लिए रोजगार कार्यक्रम (ईएसडीपी) के तहत कौशल विकास के मार्गों की समीक्षा की गई। इसमें कार्यान्वयन संरचनाओं, आपसी समन्वय के क्षेत्रों और ईएसडीपी की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। दूसरे सत्र में मानव संसाधन आदान-प्रदान संबंधी कार्य योजना पर चर्चा हुई। इसमें जापानी भाषा प्रशिक्षण के विस्तार, क्षेत्र-विशिष्ट पाठ्यक्रम, आकलन तक पहुंच तथा केन्‍द्र, राज्यों, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

तीसरे सत्र में जापानी भर्ती कंपनियों और नियोक्ताओं को हितधारकों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। इसमें व्यावसायिक कौशल, भाषा दक्षता, कार्यस्थल के लिए तैयारी और उम्‍मीदवारों को सहायता से संबंधित जानकारी साझा की गई तथा वास्तविक समय में उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकास पर जोर दिया गया। सभी सत्रों में हुई चर्चाओं के आधार पर ईएसडीपी के प्रभावी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने और भारत-जापान के बीच प्रभावी कार्यबल मार्ग विकसित करने के लिए समन्वित कार्रवाई के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई।

परामर्श का एक प्रमुख परिणाम एमएसडीई के नेतृत्व में एक व्यापक भारत-जापान कौशल रोडमैप विकसित करने का निर्णय रहा, जो कार्य योजना के क्रियान्वयन में सहायता करेगा और ईएसडीपी के लिए तैयारी सुनिश्चित करेगा। यह रोडमैप ईएसडीपी के तहत मार्ग और टीआईटीपी तथा एसएसडब्‍ल्‍यू जैसे मौजूदा मार्गों के साथ इसके समन्वय को अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा। साथ ही, इसमें उम्‍मीदवारों के जुटने, तकनीकी एवं क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण, जापानी भाषा और संस्कृति संबंधी तैयारी, आकलन प्रणालियों, नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव तथा प्रस्थान-पूर्व तैयारी से संबंधित कार्यों को जोड़ा जाएगा।

बैठक में प्रमुख कार्यान्वयन प्राथमिकताओं और परिचालन संबंधी कमियों की भी पहचान की गई। इनमें जापानी भाषा प्रशिक्षण का विस्तार, आकलन संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सत्यापित मार्गों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, राज्यों, भेजने वाले संगठनों, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग के बीच समन्वय को बेहतर बनाना तथा जापानी नियोक्ताओं की कौशल, भाषा दक्षता और कार्यस्थल की तैयारी संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण को तैयार करना शामिल है।

रोडमैप में अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक कार्यों को निर्धारित किया जाएगा। इसमें मंत्रालयों, राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग की स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की जाएंगी तथा मापनीय लक्ष्यों और एक सुव्यवस्थित शासन एवं समीक्षा तंत्र का प्रावधान होगा। इससे ईएसडीपी के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने, नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव को गहरा करने और भारत-जापान के बीच अधिक प्रभावी कार्यबल मार्ग विकसित करने के लिए बहु-हितधारक कार्य ढांचा उपलब्ध होगा।

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पीके/केसी/केपी


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