कोयला मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

भुवनेश्वरी ओसीपी: नवाचार से उत्पादन को शक्ति और स्थिरता से विकास को आकार

प्रविष्टि तिथि: 06 AUG 2026 2:34PM by PIB Delhi

वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत की यात्रा में, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की भुवनेश्वरी ओपनकास्ट परियोजना (ओसीपी) उत्पादकता, प्रौद्योगिकी और स्थिरता के सामंजस्यपूर्ण एकीकरण का एक प्रमुख उदाहरण है। ओडिशा के कोयला समृद्ध तालचेर कोलफील्ड में स्थित, भुवनेश्वरी लगातार कोल इंडिया लिमिटेड की सबसे उन्नत और उत्पादक ओपनकास्ट खदानों में से एक के रूप में विकसित हुआ है। 30 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की पीक रेटेड क्षमता के साथ संचालित, खदान आज प्रमुख थर्मल पावर स्टेशनों को कोयले की आपूर्ति करती है, जो देशभर में लाखों घरों को रोशन करने के साथ-साथ उद्योगों को भी चालू रखती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भुवनेश्वरी ने प्रदर्शित किया है कि बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन पर्यावरण प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के साथ-साथ प्रगति कर सकता है।

निष्‍पाद जो परिचालन उत्कृष्टता को दर्शाता है

भुवनेश्वरी की परिचालन उपलब्धियां सावधानीपूर्वक योजना और निरंतर निष्पादन को दर्शाती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, खदान ने 25 मिलियन टन के वार्षिक कार्य योजना लक्ष्य के मुकाबले 26.477 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जो उसके लक्ष्य की तुलना में 105.98 प्रतिशत की महत्‍वपूर्ण वृद्धि है। अपनी स्थापना के बाद से परियोजना ने असाधारण 370.4 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है, जो भारत के ऊर्जा क्षेत्र में इसके स्थायी योगदान को दर्शाता है।

यह गति वित्त वर्ष 2026-27 में भी जारी रही है, जिसमें उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाकर 28 मिलियन टन कर दिया गया है खदान ने पहली तिमाही के दौरान पहले ही 7.62 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया है, जो मजबूत परिचालन तैयारियों और बढ़े हुए वार्षिक लक्ष्य को प्राप्त करने में विश्वास को दर्शाता है।

प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के रूप में प्रौद्योगिकी

भुवनेश्वरी में, प्रौद्योगिकी केवल एक परिचालन उपकरण नहीं है - यह एक रणनीतिक लाभ है जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए उत्पादकता को बढ़ाता है।

इस परियोजना ने कोयला निष्कर्षण के लिए शत-प्रतिशत विस्फोट-मुक्त सरफेस माइनर तकनीक को अपनाकर खुद को प्रतिष्ठित किया है, जिससे कोयला सीम में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इस उन्नत खनन पद्धति ने कोयले की रिकवरी में सुधार किया है, कोयले का लगातार आकार सुनिश्चित किया है, धूल उत्पादन को कम किया है और आसपास के क्षेत्रों में शोर और जमीन के कंपन को काफी कम किया है। नियंत्रित ब्लास्टिंग केवल ओवरबर्डन हटाने तक ही सीमित है, जहां उन्नत इलेक्ट्रॉनिक विलंब डेटोनेटर न्यूनतम पर्यावरणीय गड़बड़ी सुनिश्चित करते हैं।

खदान ने देश की सबसे उन्नत कोयला निकासी प्रणालियों में से एक के माध्यम से परिचालन दक्षता को और मजबूत किया है। 25 एमटीपीए फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) साइलो इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के साथ एकीकृत कवर कन्वेयर नेटवर्क पर्यावरण के अनुकूल रेल परिवहन के माध्यम से 85 प्रतिशत से अधिक कोयला प्रेषण को सक्षम बनाता है। भुवनेश्वरी कोल इंडिया लिमिटेड का पहला स्वचालित ट्रक लोडिंग सिस्टम (एटीएलएस) का भी केन्‍द्र है, जिससे मैनुअल क्रियाकलाप को काफी हद तक कम करते हुए ट्रक लोडिंग में शीघ्रता, पारदर्शिता और सटीकता आई है।

सामुदायिक भागीदारी से विकास

एक बड़ी खनन परियोजना की सफलता को केवल उत्पादन से मापा जाता है, बल्कि इसके आसपास के समुदायों के साथ उसके संबंधों से भी मापा जाता है। भुवनेश्वरी ने लगातार यह दर्शाया है कि सार्थक हितधारक जुड़ाव एक शक्तिशाली उत्पादन प्रवर्तक बन सकता है।

पुनर्वास के अलावा, परियोजना ने सड़कों, सामुदायिक केंद्रों, शैक्षिक सुविधाओं और आजीविका सहायता पहलों सहित सामुदायिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में महत्वपूर्ण निवेश किया है। वृक्षारोपण अभियान, फलदार और साल के पौधों के वितरण, पर्यावरण जागरुकता कार्यक्रमों और अन्य विकासोन्‍मुखी पहलों ने परियोजना तथा पड़ोसी समुदायों के बीच बंधन को मजबूत करते हुए इस सिद्धांत को सुदृढ़ किया है कि टिकाऊ खनन को साझा मूल्य बनाना चाहिए।

जिम्मेदारी के साथ उत्पादकता का संतुल

भुवनेश्वरी ने खुद को पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार खनन के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित किया है। इस परियोजना ने व्यापक पर्यावरण प्रबंधन के उपायों को लागू किया है, जिसमें निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी, व्यापक धूल शमन प्रणाली, पहिये धोने की सुविधाएं और एक समर्पित पांच हेक्टेयर साल नर्सरी द्वारा समर्थित व्यवस्थित वनीकरण कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों ने परियोजना को प्रतिष्ठित पर्यावरणीय मान्यता अर्जित की है, जिसमें पांच सितारा रेटिंग और कलिंगा पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार शामिल हैं, जो पारिस्थितिक प्रबंधन के प्रति इसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

परियोजना की परिचालन उत्कृष्टता सुरक्षा और वित्तीय प्रदर्शन तक समान रूप से फैली हुई है। पिछले पांच वर्षों से लगातार एक उत्कृष्ट शून्य-मृत्यु रिकॉर्ड बनाए रखते हुए, भुवनेश्वरी ने वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़े के दौरान शीर्ष सम्मान अर्जित किया है, जो कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वित्तीय रूप से यह परियोजना एमसीएल के सबसे मजबूत योगदानकर्ताओं में से एक बनी हुई है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 1792.60 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ सृजित करती है, जो यह प्रदर्शित करती है कि परिचालन उत्कृष्टता और वित्तीय स्थिरता साथ-साथ चलती है।

भविष्य के लिए एक बेंचमार्क

भुवनेश्वरी ओसीपी एक उच्च क्षमता वाली कोयला खदान से कहीं अधिक है। यह इस बात का एक आकर्षक उदाहरण है कि कैसे आधुनिक खनन उत्पादन, प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामुदायिक विकास को एकल, सतत विकास मॉडल में सफलतापूर्वक एकीकृत कर सकता है। उत्पादित कोयले का प्रत्येक टन वैज्ञानिक खदान नियोजन को दर्शाता है, प्रत्येक नवाचार परिचालन दक्षता को मजबूत करता है और प्रत्येक सामुदायिक पहल परियोजना की सामाजिक प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

जैसे-जैसे भारत में विश्वसनीय ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है, भुवनेश्वरी कोल इंडिया लिमिटेड इस विकास गाथा में सबसे आगे रहने के लिए अच्छी स्थिति में है। तकनीकी नेतृत्व, जिम्मेदार पर्यावरणीय प्रणालियों और समावेशी विकास के साथ उच्च उत्पादकता को लगातार जोड़कर, यह परियोजना टिकाऊ कोयला खनन के भविष्य के लिए नए मानक स्थापित कर रही है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में स्थायी योगदान दे रही है।

***

पीके/केसी/एसकेएस/पीके


(रिलीज़ आईडी: 2295479) आगंतुक पटल : 259
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil , Telugu