स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर अंगदान आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया


अंगदान करुणा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है, जो लोगों को जीवन का एक दूसरा मौका देता है: श्रीमती अनुप्रिया पटेल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अपील का प्रभाव पांच लाख से अधिक आधार-सत्यापित अंगदान प्रतिज्ञाओं में परिलक्षित हुआ : श्रीमती अनुप्रिया पटेल

वर्ष 2025 में 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए – यह एक वर्ष में सबसे अधिक संख्‍या है

भारत में जीवित दाता अंग प्रत्यारोपण में वैश्विक नेतृत्व बरकरार रखा है; कुल अंग प्रत्यारोपण में दुनिया में तीसरे स्थान पर

मृतक दाताओं से अंग प्रत्यारोपण की संख्‍या वर्ष 2013 के 837 से बढ़कर 2025 में 3,526 हुई - चार गुने से अधिक वृद्धि

केंद्रीय मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने 'जुग जुग जियो अभियान', ई-प्रत्यारोपण प्लेटफॉर्म और एनओटीटीओ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया

अंग प्रत्यारोपण ढांचे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय मस्तिष्‍क स्टेम मृत्‍यु प्रमाणन दिशा-निर्देश और स्वैप प्रत्‍यारोपण पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए गए

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 2:28PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) द्वारा आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ 16वां भारतीय अंगदान दिवस (आईओडीडी) मनाया गया। इस अवसर पर सरकार ने भारत के अंगदान एवं प्रत्यारोपण कार्यक्रम को और सुदृढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा मृतक अंगदाताओं और उनके परिजनों के अमूल्य योगदान का सम्‍मान किया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, एनओटीटीओ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, दाता परिवार, प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने 16वें भारतीय अंगदान दिवस को सेवा और मानवता की भावना का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि अंगदान करुणा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है, क्योंकि यह अंतिम चरण के अंग विफलता से जूझ रहे लोगों को जीवन का एक दूसरा मौका देता है। उन्होंने दिवंगत अंगदाताओं के परिवारों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिनके निस्वार्थ निर्णयों ने राष्ट्र को प्रेरित किया है और भारत के अंगदान आंदोलन को मजबूत बनाया है। उन्होंने विभिन्न राज्य सरकारों के सराहनीय प्रयासों की भी सराहना की और उन्हें देश भर में अंगदान और प्रत्यारोपण सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

भारत की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल प्रतिज्ञा पोर्टल के शुभारंभ के बाद से देश में आधार-सत्यापित अंगदान प्रतिज्ञाओं का आंकड़ा पांच लाख से अधिक हो चुका है। उन्होंने इस बढ़ती जनभागीदारी का श्रेय सरकार के निरंतर जागरूकता प्रयासों और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा की गई प्रेरणादायक अपील को दिया, जिसने नागरिकों को अंगदान के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया है और साथ ही प्राप्तकर्ताओं तक अंगों के समय पर और सुरक्षित परिवहन को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने उल्‍लेख किया कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और प्रत्यारोपणों की संख्या वर्ष 2013 में 4,990 से बढ़कर 2025 में 20,000 से अधिक हो गई है, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे उच्चतम आंकड़ा है। अंग प्रत्यारोपण की कुल संख्या में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने आगे कहा कि मृतक दाताओं से अंग प्रत्यारोपण की संख्या वर्ष 2013 में 837 से बढ़कर 2025 में 3,500 से अधिक हो गई। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अंगों की मांग और उनकी उपलब्धता के बीच अभी भी एक बडा अंतर मौजूद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अंतर को दूर करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी प्रमुख धर्म अंगदान का निषेध नहीं करता; बल्कि सभी धर्म करुणा, सेवा और जीवन बचाने के मूल्यों को बढ़ावा देते हैं, जिससे अंगदान एक महान मानवीय कार्य बन जाता है।

इस अवसर पर शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मस्तिष्‍क स्टेम मृत्‍यु प्रमाणन दिशानिर्देश और स्वैप प्रत्‍यारोपण पर राष्ट्रीय दिशा-निर्देश देश भर में प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने और नीति कार्यान्वयन को मजबूत करने में मदद करेंगे। उन्होंने 'जुग जुग जियो  अभियान' के शुभारंभ पर भी प्रकाश डाला, जो एक साल तक चलने वाला राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य अंगदान का संदेश हर समुदाय तक पहुंचाना है और यह सुदृढ़ करना है कि अंगदान जीवन का सबसे बड़ा उपहार है, जिससे दाताओं की विरासत प्राप्तकर्ताओं के माध्यम से जीवित रहती है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने एनओटीटीओ, पांच क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठनों (आरओटीटीओ), 26 राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठनों (एसओटीटीओ) और लगभग 1,200 पंजीकृत अस्पतालों को मिलाकर एक मजबूत संस्थागत नेटवर्क स्थापित किया है। इन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए सरकार ने 'ई-प्रत्यारोपण' नामक एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जो नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाते हुए एक निर्बाध, पारदर्शी और कुशल अंगदान एवं प्रत्यारोपण इकोसिस्‍टम का निर्माण करेगा।

राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (एनओटीपी) के तहत सरकार के निरंतर समर्थन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, दाताओं के रखरखाव, अंग पुनर्प्राप्ति और परिवहन के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत गुर्दा प्रत्यारोपण को स्वास्थ्य लाभ पैकेज में शामिल किया गया है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि 20,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों का बढ़ता नेटवर्क प्रत्यारोपण के बाद की दवाओं सहित सस्ती दवाओं तक पहुंच में सुधार कर रहा है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए श्रीमती पटेल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार करना आवश्यक है, लेकिन मुख्‍य उद्देश्य बीमारी की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता को कम करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने योग, फिट इंडिया मूवमेंट और अन्य जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसी पहलों के माध्यम से निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल को उपचारात्मक देखभाल के साथ एकीकृत करके एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से, मादक पदार्थों के सेवन से बचने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया और इस बात पर बल दिया कि रोकथाम ही स्वास्थ्य की रक्षा करने और उन पुरानी बीमारियों के बोझ को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है, जो अक्सर अंग विफलता का कारण बनती हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने दाता परिवारों, प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों, अस्पतालों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, एनओटीटीओ, आरओटीटीओ, एसओटीटीओ और सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भारत के अंगदान आंदोलन को मजबूत और अधिक प्रभावशाली बनाने में योगदान दिया है।

इस अवसर पर शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'ई-प्रत्यारोपण' प्लेटफॉर्म, एनओटीटीओ मोबाइल एप्लिकेशन और राष्ट्रीय मस्तिष्‍क स्टेम मृत्‍यु प्रमाणन दिशा-निर्देश तथा स्वैप प्रत्‍यारोपण पर राष्ट्रीय दिशा-निर्देश प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे, पारदर्शिता और समन्वय में सुधार करेंगे तथा अंगदान और प्रत्यारोपण इकोसिस्‍टम को और मजबूत करेंगे।

कार्यक्रम के तहत हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एनओटीटीओ-आरओटीटीओ- एसओटीटीओ नेटवर्क अब 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है, जिससे कुशल अंग खरीद और आवंटन के लिए अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय संभव हो रहा है। उन्होंने यह भी सूचित किया कि सरकार ने अपीलों की सुनवाई का अधिकार विकेंद्रीकृत कर दिया है, जिससे यह प्रणाली अधिक कुशल और समयबद्ध हो गई है।

उन्होंने आगे रेखांकित किया कि नई दिल्ली स्थित एम्स के अलावा दस नए एम्स अब गुर्दा प्रत्यारोपण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इनमें से एम्स जोधपुर, एम्स भुवनेश्वर, एम्स पटना और एम्स ऋषिकेश ने यकृत प्रत्यारोपण भी शुरू कर दिया है, जबकि एम्स भोपाल ने हृदय प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है, जिससे पूरे देश में उन्नत प्रत्यारोपण देखभाल तक पहुंच का विस्तार हुआ है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 'मन की बात' के 131वें एपिसोड में दिए गए उस कथन को याद करते हुए कि "अंगदान के बारे में जागरूकता लगातार बढ़ रही है", उन्होंने कहा कि आज शुरू किया गया 'जुग जुग जियो अभियान' इस विजन को मूर्तरूप देता है और जागरूकता एवं जनभागीदारी को और मजबूत करेगा। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (एनओटीपी) के तहत उपलब्ध सहायता का पूर्ण उपयोग करके अंगदान और प्रत्यारोपण सेवाओं का और विस्तार करने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने कहा कि 16वां भारतीय अंगदान दिवस अंगदाताओं और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जीवन के इस उपहार का जश्न मनाने का दिन है। उन्होंने बताया कि यह दिन 3 अगस्त 1994 को किए गए भारत के पहले सफल मृतक अंग प्रत्यारोपण की स्मृति में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर शुरू की गई पहलें अधिक जागरूकता, बेहतर समन्वय और बढी हुई पारदर्शिता के माध्यम से अंगदान इकोसिस्‍टम को मजबूत करेगी। नागरिकों से मृतक अंगदान को बढ़ावा देने का आग्रह करते हुए उन्‍होंने सभी से अपने अंगों और ऊतकों को दान करने का संकल्प लेने और इस जीवन रक्षक आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की।

इस अवसर पर जन जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल परिवर्तन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से भारत के अंगदान और प्रत्यारोपण इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ किया गया।

इन पहलों का नेतृत्‍व करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने 'जुग जुग जियो अभियान' की शुरूआत की, जो अंगदान को एक जीवन रक्षक कार्य के रूप में बढ़ावा देने और इस संदेश को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया एक राष्ट्रव्यापी जन जागरूकता अभियान है कि दाताओं की विरासत उनके अंगों और ऊतकों के प्राप्तकर्ताओं के माध्यम से जीवित रहती है। इस अभियान का लक्ष्य निरंतर जन सहभागिता और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से देश के प्रत्येक गांव में अंगदान के प्रति जागरूकता का विस्तार करना है।

केंद्रीय मंत्री ने 'ई-प्रत्‍यारोपण' नामक एक एकीकृत, सुरक्षित, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया, जो अस्पतालों, डॉक्टरों, दाताओं, प्राप्तकर्ताओं और अन्य हितधारकों को एक निर्बाध नेटवर्क पर डिजिटल रूप से एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म पंजीकरण, प्रतीक्षा सूची प्रबंधन, अंग आवंटन, निगरानी और सार्वजनिक सूचना सेवाओं को एक एकीकृत डिजिटल इकोसिस्‍टम में समेकित करता है, जो अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम अंगदान और प्रत्यारोपण कार्यक्रम की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है।

डिजिटल सेवा वितरण को और मजबूत करते हुए नागरिकों, प्रत्यारोपण पेशेवरों, अस्पतालों और प्रशासकों को अंगदान और प्रत्यारोपण से संबंधित सेवाओं और जानकारी तक आसान पहुंच प्रदान करने के लिए नया एनओटीटीओ मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया।

एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल के तहत राष्ट्रीय मस्तिष्‍क स्टेम मृतक प्रमाणन दिशानिर्देश और स्वैप प्रत्‍यारोपण पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश भी जारी किए गए। ये दिशानिर्देश प्रत्यारोपण पेशेवरों के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करते हैं और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक मजबूत, नैतिक और कुशल अंगदान एवं प्रत्यारोपण कार्यक्रम को लागू करने में सहायता करते हैं। इनसे राष्ट्रीय प्रत्यारोपण इकोसिस्‍टम को मजबूती मिलने और देश भर में सुरक्षित, न्यायसंगत और उच्च गुणवत्ता वाली प्रत्यारोपण सेवाओं तक व्यापक पहुंच की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इस कार्यक्रम में एनओटीटीओ की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 भी जारी की गई , जिसमें भारत के अंगदान एवं प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत हासिल की गई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे उच्‍चतम स्‍तर है। यह वर्ष 2013 में 4,990 प्रत्यारोपणों से चार गुना वृद्धि और 2024 में 18,911 प्रत्यारोपणों की तुलना में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। अंग प्रत्यारोपणों की कुल संख्या में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि जीवित दाता अंग प्रत्यारोपणों में यह विश्व स्तर पर प्रथम स्थान पर है। मृतक दाता अंग प्रत्यारोपणों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो वर्ष 2013 में 837 से बढ़कर 2025 में 3,526 हो गए, यानी चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष के दौरान 25 लाख से अधिक नागरिकों ने अपने अंग और ऊतक दान करने का संकल्प लिया, जो इस राष्ट्रीय आंदोलन में बढ़ती जन जागरूकता और भागीदारी को दर्शाता है। वर्ष 2025 के प्रमुख आंकड़े नीचे संलग्‍न हैं :   

इस अवसर पर एनओटीटीओ ई-न्यूज़लेटर का नवीनतम संस्करण भी जारी किया गया, जिसमें एनओटीटीओ, क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठनों (आरओटीटीओ) और राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठनों (एसओटीटीओ) की वर्ष भर की गतिविधियों, उपलब्धियों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया है।

समारोह के अंतर्गत देश में अंगदान और प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ करने में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठनों (आरओटीटीओ), अस्पतालों, प्रत्यारोपण पेशेवरों और अन्य हितधारकों को राष्ट्रीय अंगदान पुरस्कार प्रदान किए गए। पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ को उत्तरी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (आरओटीटीओ) का पुरस्कार दिया गया। तमिलनाडु को सबसे अधिक मृतक अंगदाताओं की संख्या दर्ज करने के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में मान्यता दी गई, जबकि असम को उत्तर पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार मिला। दिल्ली को सर्वश्रेष्ठ केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय अंगदान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में उनके अनुकरणीय प्रयासों को मान्यता देते हुए अस्पतालों को अंग प्रत्यारोपण और अंग पुनर्प्राप्ति में उत्कृष्टता, प्रत्यारोपण पेशेवरों और अन्य हितधारकों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस कार्यक्रम में दिवंगत अंगदाताओं को श्रद्धांजलि भी दी गई और उनके परिजनों की असाधारण उदारता को सराहा गया, जिनके नि:स्वार्थ निर्णयों ने हजारों मरीजों को नया जीवन दिया है। देश भर के अंगदाता परिजनों को मानवता के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

पृष्ठभूमि

भारतीय अंगदान दिवस मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (टीएचओए) 1994 के लागू होने के बाद एम्स, नई दिल्ली में 3 अगस्त, 1994 को भारत में किए गए पहले सफल हृदय प्रत्यारोपण की स्‍मृति में आयोजित किया जाता है।

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पीके/केसी/आईएम/जीआरएस

 


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