सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सरकार नशा मुक्त भारत अभियान के तहत पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से बुनियादी स्तर पर नशीली दवाओं की रोकथाम को मजबूत करती है


नशामुक्ति मित्रों के रूप में पंचायत संसाधन व्यक्तियों को नियुक्त किया जा रहा है ताकि गांवों को नशामुक्त किया जा सके

प्रविष्टि तिथि: 29 JUL 2026 6:38PM by PIB Delhi

भारत सरकार नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत नशाखोरी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास कर रही है, जिसके तहत जागरूकता पैदा करने और सामुदायिक लामबंदी में पंचायती राज संस्थाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवकों को ग्राम स्तर पर शामिल करके नशाखोरी के खिलाफ जन-नेतृत्व वाला आंदोलन खड़ा करना है।

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने आज राज्यसभा में श्री हर्ष महाजन के एक प्रश्न के उत्तर में दी।

मंत्री ने बताया कि हालांकि पंचायती राज संस्थाओं को राष्ट्रीय नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने की कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के साथ एकीकृत करने के लिए विशेष रूप से ग्राम स्तर पर नशीली दवाओं के बारे में जागरूकता के लिए कोई अलग से योजना तैयार नहीं की गई है, फिर भी हिमाचल प्रदेश सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी पंचायती राज विभागों से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत पंचायत संसाधन व्यक्तियों को नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम) के रूप में पहचान कर नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

इन नशा मुक्ति मित्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियानों के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ एनएमबीए की सामूहिक प्रतिज्ञा को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपा गया है। उन्हें मौजूदा जागरूकता अभियानों में भी शामिल किया जा रहा है और जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एनएमबीए लोगो, शुभंकर और राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मंत्री जी ने आगे बताया कि एनएपीडीडीआर योजना के राज्य कार्य योजना (एसएपी) घटक के तहत, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को निवारक शिक्षा, जागरूकता सृजन, क्षमता निर्माण और मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने संबंधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पिछले दो वित्तीय वर्षों (2023-24 और 2024-25) में हिमाचल प्रदेश को कोई धनराशि जारी नहीं की गई थी। हालांकि, राज्य कार्य योजना के अंतर्गत गतिविधियों के समर्थन के लिए 2025-26 के दौरान राज्य को 1.34 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की गई थी।

सरकार, पंचायती राज संस्थाओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों की सक्रिय भागीदारी से नशा मुक्त भारत अभियान को मजबूत कर रही है ताकि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ सतत जागरूकता पैदा की जा सके और नशा मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सके।

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पीके/केसी/पीएस/एसएस  


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