सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सरकार ने 2026–31 के लिए वित्तीय परिव्यय में वृद्धि के साथ 'पीएम-अजय'  को जारी रखने का प्रस्ताव रखा


2021-22 से 'पीएम-अजय' के अंतर्गत 4,276.62 करोड़ रुपये से अधिक जारी; नीति आयोग के मूल्यांकन में अवसंरचना, शिक्षा और आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने पर जोर दिया गया

2018-19 से 'आदर्श ग्राम' घटक के तहत 3,112 गांवों की पहचान की गई; योजना का दायरा बढ़ाकर इसे जारी रखा जाएगा

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 7:26PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के माध्यम से अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करना जारी रखा है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने लोकसभा को सूचित किया कि विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ), नीति आयोग द्वारा किए गए एक स्वतंत्र मूल्यांकन में पाया गया है कि यह योजना अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में अवसंरचना, शिक्षा तक पहुंच, आजीविका के अवसरों और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

लोकसभा में श्री राजा ए के एक लिखित उत्तर में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने बताया कि वर्ष 2021-22 में शुरू की गई पीएम-अजय (पीएम-अजय) योजना को देश भर में अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए इसके तीन घटकों - आदर्श ग्राम, सहायता अनुदान और छात्रावास के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

मंत्री महोदय ने कहा कि पीएम-अजय के शुरू होने के बाद से, केंद्र सरकार ने 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2025-26 तक इस योजना के तहत 4,276.62 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए अवसंरचना के निर्माण, आजीविका सृजन और शैक्षणिक सहायता की दिशा में 3,185.072 करोड़ रुपये के उपयोग की सूचना दी है। केवल वर्ष 2025-26 के दौरान ही इस योजना के तहत 1,100.09 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जो विकासात्मक पहलों के विस्तार के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001LVPQ.jpg

मंत्रालय ने आगे बताया कि 'आदर्श ग्राम' योजना के तहत 2018-19 से अब तक 3,112 गांवों की पहचान की गई है। इनमें से तमिलनाडु के 3,111 गांवों को 'आदर्श ग्राम' घोषित किया गया है, जो बेहतर नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं की बेहतर डिलीवरी के साथ मॉडल गांव विकसित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।

विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) के मूल्यांकन ने यह निष्कर्ष निकाला कि 'पीएम-अजययोजना समावेशी और न्यायसंगत विकास के सरकार के उद्देश्य के अनुकूल है। अध्ययन में पाया गया कि इस योजना ने लाभार्थी गांवों में अनुसूचित जाति समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार करते हुए अवसंरचना, बिजली, बैंकिंग सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आजीविका के अवसरों तक पहुंच को बेहतर बनाया है।

इन पहलों को और अधिक मजबूत करने के लिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वित्तीय परिव्यय में वृद्धि के साथ वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 'पीएम-अजययोजना को जारी रखने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्तावित विस्तार का उद्देश्य योजना के दायरे को व्यापक बनाना, अवसंरचना के विकास में तेजी लाना, संवहनीय आजीविका के अवसर पैदा करना और अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए शैक्षणिक सहायता को बढ़ाना है, ताकि विकास का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।

सरकार 'पीएम-अजय' के तहत लक्षित पहलों के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाकर सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और न्यायसंगत प्रगति के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

***

पीके/केसी/एसके/एसएस


(रिलीज़ आईडी: 2290762) आगंतुक पटल : 107
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Gujarati