कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्किल इंडिया पहल

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 3:53PM by PIB Delhi

भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों/संस्‍थानों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के जरिए देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों सहित उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।

 

वित्तीय वर्ष 2022-23 से लागू पीएमकेवीवाई 4.0 जिसमें भविष्य के कौशल और उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष जोर दिया गया है, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और ग्रीन प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, ताकि युवाओं को नए और उभरते जॉब रोल्स के अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।

 

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, औद्योगिक रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा और ग्रीन स्किल्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में 32 आधुनिक/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रमों सहित 170 एनएसक्यूएफ-अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य देश भर के युवाओं को उभरती प्रौद्योगिकियों में उद्योग-संबंधी कौशल से सुसज्जित करना, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की बढ़ती मांग को पूरा करना है। ये पाठ्यक्रम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से संचालित किए जाते हैं।

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकी से संबंधित कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की संख्या, वर्षवार और राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार अनुबंध में दी गई है।

 

वित्तीय वर्ष 2015-16 से वित्तीय वर्ष 2021-23 के दौरान लागू की गई पीएमकेवीवाई 1.0 से पीएमकेवीवाई 3.0 योजनाओं के अंतर्गत कुल 1.11 करोड़ उम्मीदवारों को प्रमाणित किया गया, जिनमें से 24.38 लाख उम्मीदवारों को अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) के अंतर्गत रोजगार प्राप्त हुआ। पीएमकेवीवाई 4.0 के अंतर्गत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को विभिन्न करियर अवसरों को चुनने के लिए सशक्त बनाना और उन्हें इसके लिए उपयुक्त मार्गदर्शन प्रदान करना मुख्य उद्देश्य है। इसलिए, पीएमकेवीवाई 4.0 के अंतर्गत रोजगार प्राप्ति की निगरानी नहीं की जाती है।

 

विभिन्न क्षेत्रों में स्किल इंडिया की विभिन्‍न पहलों के अंतर्गत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की रोजगार क्षमता और उद्योग की मांग का आकलन करने के लिए समय-समय पर कौशल अंतर अध्ययन किए जाते हैं। ये अध्ययन सरकार द्वारा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से किए जाने वाले उपायों में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। क्षेत्र कौशल परिषद (एसएससी) ने इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण आदि जैसे क्षेत्रों में कौशल अंतर अध्ययन किए हैं, जो मांग-आपूर्ति आकलन और मानव संसाधन अनुमान प्रदान करते हैं।

 

इसके अलावा, देश में कौशल विकास की पहलों में समन्वय स्थापित करने और क्षेत्रीय कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, एमएसडीई की योजनाएं राज्य कौशल विकास मिशन (एसएसडीएम) और जिला कौशल समितियों (डीएससी) के माध्यम से राज्यों और जिलों की भागीदारी के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर केंद्रित हैं। डीएससी रोजगार के अवसरों वाले क्षेत्रों के साथ-साथ जिले में कौशल की मांग की पहचान करते हैं और कौशल प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विश्‍लेषण करते हैं। आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अर्जन और ज्ञान जागरूकता (संकल्प) योजना ने राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) द्वारा किए गए एक 'राष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन' का भी समर्थन किया था। इस अध्ययन ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अंतर्गत कंप्यूटर प्रोग्रामिंग गतिविधियों सहित सात उच्च विकास वाले क्षेत्रों में कौशल के अंतर का आकलन करने के लिए एक मानकीकृत और डेटा-संचालित ढांचा प्रदान किया। कौशल अंतर से जुड़े ये अध्ययन सरकार को पूरे देश में उद्योग की मांग और भविष्य के कार्यबल की आवश्यकताओं के साथ कौशल पहलों को संरेखित (तालमेल बिठाने) करने में मदद करते हैं। सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की कमियों को दूर करने के लिए तैयार और कार्यान्वित किए जाते हैं।

 

कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की रोजगार क्षमता में अंतर को कम करने के लिए, एमएसडीई द्वारा निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:

 

  1. राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करती है।
  2. एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ मैप करें और उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।
  3. संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के प्रमुखों के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदें (एसएससी) स्थापित की गई हैं, जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।
  4. एमएसडीई के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईटीआई के छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।
  5. पीएमकेवीवाई के अंतर्गत, नई पीढ़ी/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप खासकर एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए।तैयार किया गया है।
  6. डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
  7. राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
  8. अहमदाबाद और मुंबई में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुसज्जित उद्योग के लिए उद्योग-तैयार कार्यबल का समूह बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
  9. कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन प्रमाणित उम्मीदवारों को रोजगार और शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए किया जाता है।
  10. सरकार ने 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगार क्षमता में परिवर्तन) नामक एक केंद्रीय प्रायोजित योजना शुरू की है। इस योजना के तहत देश भर में 1,000 सरकारी आईटीआई का उन्नयन किया जाएगा, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे। पीएम-सेतु का मुख्य उद्देश्य उद्योग-आधारित शासन के माध्यम से रोजगार क्षमता में सुधार करना है, और यह अप्रत्यक्ष रूप से स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देता है। इसके तहत शिक्षार्थियों (शुरुआती चरण के उद्यमों और पहली बार उद्यम करने वालों सहित) को उद्योग से संबंधित कौशल प्राप्त करने, वास्तविक कार्य वातावरण का अनुभव प्राप्त करने और सुदृढ़ संस्थागत प्रणालियों और उद्योग संबंधों के माध्यम से करियर मार्गदर्शन, प्लेसमेंट सहायता और स्वरोजगार सहायता प्राप्त करने में सक्षम बनाया जाता है।

अनुबंध

 

'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कौशल भारत पहल' के संबंध में दिनांक 27.07.2026 को उत्‍तर दिए जाने वाले लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1318 के भाग () से () के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध।

 

वर्ष और संघ राज्य क्षेत्रवार के अनुसार वर्ष 2019 से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के अंतर्गत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की संख्या

 

(i) पीएमकेवीवाई 4.0:

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम

2022-23

2023-24

2024-25

2025-26

2026-27 (30.06.2026 तक)

अंडमान व निकोबार द्वीप समूह

-

-

-

30

-

आंध्र प्रदेश

-

418

7,569

841

1,308

अरुणाचल प्रदेश

-

-

1,441

-

49

असम

-

685

6,015

189

1,789

बिहार

-

846

28,590

1,049

341

चंडीगढ़

-

19

-

-

70

छत्तीसगढ

-

64

2,922

102

-

दिल्ली

-

180

1,432

563

253

गोवा

-

-

-

12

-

गुजरात

-

465

6,377

327

371

हरियाणा

-

275

14,047

1,030

704

हिमाचल प्रदेश

-

105

3,672

1,813

295

जम्मू और कश्मीर

-

1,383

11,854

1,375

281

झारखंड

-

525

3,202

-

73

कर्नाटक

-

694

24,280

4,259

681

केरल

-

194

3,925

142

67

मध्य प्रदेश

-

3,229

67,064

5,260

2,588

महाराष्ट्र

-

954

15,425

1,659

106

मणिपुर

-

30

153

30

100

मेघालय

-

30

525

52

130

मिजोरम

-

244

763

90

136

नागालैंड

-

72

454

50

115

ओडिशा

-

407

4,729

371

40

पुदुचेरी

-

-

475

272

486

पंजाब

-

630

22,290

3,356

12,296

राजस्थान

-

1,106

84,144

2,707

329

सिक्किम

-

39

603

-

50

तमिलनाडु

-

2,717

22,645

7,086

280

तेलंगाना

-

1,016

10,646

3,831

1,257

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

-

-

309

75

54

त्रिपुरा

-

13

1,370

933

645

उत्तर प्रदेश

-

2,079

88,868

6,672

5,563

उत्तराखंड

-

351

7,697

616

146

पश्चिम बंगाल

-

771

4,855

301

805

(ii) सीटीएस/आईटीआई:

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम

2019

2020

2021

2022

2023

2024

2025

अंडमान निकोबार द्वीप समूह

10

5

8

5

24

41

40

आंध्र प्रदेश

0

0

0

0

0

0

5

अरुणाचल प्रदेश

0

0

0

0

0

0

21

असम

0

0

0

20

112

70

99

बिहार

32

111

17

143

209

434

491

चंडीगढ़

0

0

0

0

24

24

68

छत्तीसगढ

11

54

41

78

75

98

119

दिल्ली

16

0

14

0

23

175

269

गोवा

0

12

18

19

23

44

58

गुजरात

28

156

121

117

170

226

304

हरियाणा

186

98

55

85

125

82

86

हिमाचल प्रदेश

64

131

62

174

139

168

116

जम्मू और कश्मीर

24

24

46

47

48

170

202

झारखंड

8

19

46

34

391

368

587

कर्नाटक

35

21

3282

5552

5956

4052

5826

केरल

224

162

171

163

249

269

318

लद्दाख

0

0

10

19

20

16

18

मध्य प्रदेश

13

1

4

0

118

219

431

महाराष्ट्र

195

145

210

322

650

785

3113

मणिपुर

0

0

0

0

0

0

20

मेघालय

0

0

0

0

0

12

29

ओडिशा

134

243

216

735

1323

1385

1876

पुदुचेरी

0

0

0

0

0

0

27

पंजाब

7

0

0

0

27

27

133

राजस्थान

82

33

67

82

194

329

385

तमिलनाडु

175

189

235

470

7470

6047

7082

तेलंगाना

64

8

36

134

566

3134

11629

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

0

0

0

0

14

6

1

त्रिपुरा

0

25

0

31

0

24

0

उत्तर प्रदेश

239

152

156

172

398

6048

8139

उत्तराखंड

54

12

25

33

33

31

156

पश्चिम बंगाल

163

94

178

176

785

607

690

 

 

 

(iii) एनएपीएस (नियोजित प्रशिक्षु):

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र

2019-20

2020-21

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25

2025-26

2026-27

आंध्र प्रदेश

0

0

0

0

1

9

79

36

असम

0

0

0

0

0

0

0

1

बिहार

0

0

0

1

0

3

37

14

चंडीगढ़

0

0

0

0

0

1

5

0

छत्तीसगढ

0

0

4

0

0

0

0

0

दिल्ली

0

0

0

40

1

26

79

46

गोवा

0

0

0

2

2

2

5

0

गुजरात

0

7

56

120

514

892

1,205

175

हरियाणा

0

5

0

5

299

373

530

97

हिमाचल प्रदेश

0

0

0

0

57

57

25

1

जम्मू और कश्मीर

0

0

0

0

0

0

2

3

झारखंड

0

0

0

1

2

5

2

0

कर्नाटक

0

3

0

144

152

324

1,895

181

केरल

0

0

0

7

11

2

14

3

मध्य प्रदेश

0

0

0

16

47

44

674

65

महाराष्ट्र

0

0

10

859

4,163

2,073

1,713

203

ओडिशा

0

0

0

0

2

4

119

28

पुदुचेरी

0

0

0

0

0

6

0

0

पंजाब

0

0

0

8

41

19

31

5

राजस्थान

0

0

0

0

20

213

726

49

सिक्किम

0

0

0

0

0

1

1

0

तमिलनाडु

0

0

4

322

471

361

448

75

तेलंगाना

1

 

1

12

24

323

735

55

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

0

0

0

0

1

0

4

0

त्रिपुरा

0

0

0

0

2

10

0

0

उत्तर प्रदेश

0

0

1

83

29

95

866

150

उत्तराखंड

0

0

1

6

162

148

244

44

पश्चिम बंगाल

0

0

1

7

6

6

21

1

 

यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री जयन्‍त चौधरी द्वारा आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।

*****

पीके/केसी/डीवी/डीए


(रिलीज़ आईडी: 2290018) आगंतुक पटल : 152
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil