सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
भविष्य की रफ्तार से जुड़ता दिल्ली का भूमिगत संपर्क: राजधानी की कनेक्टिविटी को नया स्वरूप देने वाली सुरंग
प्रविष्टि तिथि:
25 JUL 2026 5:37PM by PIB Delhi
हर वर्ष भारत की राजधानी आने वाले लाखों लोगों के लिए दिल्ली की पहली छवि अक्सर हवाई अड्डे तक पहुंचने वाले भीड़भाड़ वाले मार्गों, यातायात अवरोधों और प्रमुख व्यावसायिक, राजनयिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों के बीच लंबी यात्रा से बनती है। इस महीने की शुरुआत में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा अनुमोदित एनएच-148एई पर 6-लेन द्वारका रोड सुरंग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी आवाजाही को नई परिभाषा देने के लिए तैयार है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली 8.1 किलोमीटर लंबी, छह-लेन की इस परियोजना को एनएच(ओ) योजना के अंतर्गत हाइब्रिड एन्यूटी मोड (एचएएम) पर ₹6,969.67 करोड़ की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा। यह परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे (एनएच-248बीबी) पर स्थित शिव मूर्ति इंटरचेंज को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। यह कॉरिडोर पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच एक उच्च गति, नियंत्रित प्रवेश वाला संपर्क प्रदान करेगा, जिससे विशेष रूप से गुरुग्राम, द्वारका, आईजीआई हवाई अड्डे और पश्चिमी दिल्ली से आने-जाने वाले यातायात को लाभ होगा। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता 3.14 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग है, जिसमें सदर्न रिज के नीचे 1.98 किलोमीटर लंबा हिस्सा शामिल है, जो दिल्ली के सबसे पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील परिदृश्यों में से एक को संरक्षित रखते हुए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करेगा।
शहरी आवाजाही की नई परिकल्पना
द्वारका सुरंग कॉरिडोर द्वारका एक्सप्रेसवे और दक्षिण दिल्ली के बीच सीधा एवं निर्बाध संपर्क प्रदान करेगा, जिससे धौला कुआँ–आईजीआई हवाई अड्डा–महिपालपुर, छतरपुर–महिपालपुर और रंगपुरी जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले मार्गों पर निर्भरता कम होगी। यातायात प्रवाह में सुधार और यात्रा में होने वाली देरी को कम करके यह परियोजना निवासियों, हवाई अड्डे के उपयोगकर्ताओं तथा वाणिज्यिक यातायात के लिए दैनिक आवागमन को अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगी।
यह कॉरिडोर दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एकीकरण को भी सुदृढ़ करेगा, जिससे प्रमुख आवासीय क्षेत्रों, वाणिज्यिक केंद्रों, संस्थागत केंद्रों तथा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच बेहतर होगी। एनएचएआई के प्रस्तावित एम्स–महिपालपुर एलिवेटेड कॉरिडोर, जो इस सुरंग को बारापुल्ला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा, के साथ मिलकर यह परियोजना पूरे शहर में निर्बाध पूर्व-पश्चिम संपर्क स्थापित करेगी, जिससे पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा की यात्रा को लाभ होगा तथा एक अधिक दक्ष शहरी परिवहन नेटवर्क का निर्माण होगा।
पर्यटन और आगंतुक अनुभव को बेहतर बनाना
दिल्ली हर वर्ष लाखों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों का स्वागत करती है, और उनकी यात्रा के अनुभव में दक्ष संपर्क व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। द्वारका सुरंग कॉरिडोर हवाई अड्डे और द्वारका एक्सप्रेसवे से राजधानी के कई प्रतिष्ठित स्थलों तक पहुंच को बेहतर बनाएगा, जिनमें कुतुब मीनार, महरौली पुरातात्विक उद्यान, हौज खास हेरिटेज कॉम्प्लेक्स, हुमायूं का मकबरा, लोधी गार्डन और छतरपुर मंदिर शामिल हैं। यह भारत मंडपम्, इंडिया गेट तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आयोजनों की मेजबानी करने वाले अन्य प्रमुख स्थलों तक अधिक सुगम यात्रा भी सुनिश्चित करेगा।
हवाई अड्डा कॉरिडोर और प्रमुख यातायात अवरोधों के आसपास भीड़भाड़ कम करके यह परियोजना आगंतुकों को अधिक तेज और आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी, साथ ही दिल्ली के आतिथ्य, पर्यटन तथा मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेज़ एंड एग्ज़ीबिशन्स (एमआईसीई) पारिस्थितिकी तंत्र को भी सुदृढ़ करेगी।
दिल्ली के वैश्विक प्रवेश द्वार को सुदृढ़ बनाना
राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हर वर्ष लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान करता है। नया कॉरिडोर हवाई अड्डे और दिल्ली के राजनयिक क्षेत्र, व्यावसायिक जिलों, कन्वेंशन केंद्रों तथा संस्थागत केंद्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, व्यावसायिक यात्रियों और निवेशकों के लिए यात्रा अधिक तेज और समय के लिहाज से अधिक सुनिश्चित होगी। हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच संपर्क को सुदृढ़ करके यह परियोजना वाणिज्य, कूटनीति और वैश्विक सहभागिता के प्रमुख केंद्र के रूप में दिल्ली की स्थिति को और मजबूत करेगी।
चिरस्थायी अवसंरचना का निर्माण
इस परियोजना की एक विशिष्ट विशेषता इसका पर्यावरण के प्रति संवेदनशील डिज़ाइन है। 3.14 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग, जिसमें सदर्न रिज के नीचे का 1.98 किलोमीटर लंबा हिस्सा शामिल है, दिल्ली के मूल्यवान हरित क्षेत्र को संरक्षित रखते हुए तथा सतह पर होने वाले व्यवधान को न्यूनतम रखते हुए महत्वपूर्ण परिवहन अवसंरचना के विकास को संभव बनाती है। यह दृष्टिकोण अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रति एमओआरटीएच की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
द्वारका सुरंग कॉरिडोर केवल एक शहरी सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आवाजाही में एक रणनीतिक निवेश का प्रतिनिधित्व करता है। संपर्क व्यवस्था में सुधार, यातायात की भीड़भाड़ में कमी तथा प्रमुख परिवहन कॉरिडोरों के एकीकरण के माध्यम से यह शहरी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ करेगा तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निरंतर विकास को समर्थन प्रदान करेगा।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2289420)
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