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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
कौशल भारत मिशन
प्रविष्टि तिथि:
20 JUL 2026 4:14PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (नैप्स) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के माध्यम से देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है। एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षित/नामांकित उम्मीदवारों का राज्यवार ब्यौरा अनुबंध-I में दिया गया है।
एमएसडीई की योजनाओं में से, पीएमकेवीवाई के केवल पहले तीन संस्करणों (पीएमकेवीवाई 1.0, पीएमकेवीवाई 2.0 और पीएमकेवीवाई 3.0) के तहत प्लेसमेंट का रिकॉर्ड रखा गया, जो 2015-16 से 2021-22 तक लागू किए गए थे। पीएमकेवीवाई के पहले तीन संस्करणों (1.0 से 3.0) के तहत प्लेसमेंट पाने वाले उम्मीदवारों का राज्यवार ब्यौरा अनुबंध-II में दिया गया है। अल्पकालिक प्रशिक्षण के अंतर्गत, प्रमाणित 56.89 लाख उम्मीदवारों में से 24.3 लाख उम्मीदवारों को प्लेसमेंट मिल चुका है, जिससे कुल प्लेसमेंट दर 42.8% हो जाती है। पीएमकेवीवाई 4.0 के अंतर्गत, मुख्य ध्यान प्रशिक्षित उम्मीदवारों को उद्योग-प्रासंगिक कौशल पाठ्यक्रमों के माध्यम से मार्गदर्शन देकर अपने विविध करियर पथ को चुनने के लिए सशक्त बनाना है, जिसमें ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) भी शामिल है।
व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षुता के अलावा, एमएसडीई के तत्वावधान में राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निस्बड़) और भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई) देशव्यापी उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम (ईएपी) और उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) संचालित करते हैं, जिनका उद्देश्य प्रशिक्षण, ऋण और बाजार तक पहुंच पर केंद्रित उद्यमशीलता की मानसिकता को बढ़ावा देना है। सितंबर 2023 में शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना, 18 पारंपरिक ट्रेड़ों में कारीगरों को समग्र सहायता (कौशलोन्नयन, टूलकिट और संपार्श्विक रहित ऋण) प्रदान करती है। एमएसडीई ने महिला उम्मीदवारों में उद्यमशीलता की मानसिकता विकसित करने के लिए फरवरी 2025 में पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में स्वावलंबिनी कार्यक्रम शुरू किया। अब तक, ईएपी के तहत कुल 1200 महिला उम्मीदवारों को और ईडीपी के तहत 602 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) एक एकीकृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्लेटफॉर्म है जो पाठ्यक्रम खोज, नामांकन और प्रमाणन की सुविधा प्रदान करता है। एमएसडीई ने पीएमकेवीवाई और सीटीएस जैसी योजनाओं के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, मेकाट्रॉनिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे उभरते क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। डीजीटी ने आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आईबीएम, माइक्रो सॉफ्ट, ऑटो डेस्क, एडबल्यूएस, शेल आदि सहित वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के अग्रणी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस (एसओएआर) कार्यक्रम छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए संरचित मूलभूत और व्यावहारिक एआई कौशल विकास प्रदान करता है।
सरकार स्किल इंडिया मिशन के अंतर्गत कौशलीकरण पहलों की समय-समय पर समीक्षा करती है, जिसमें नामांकन, प्रमाणन, प्लेसमेंट, स्वरोजगार के परिणाम और नियोक्ताओं की फीडबैक का आकलन करके रोजगार क्षमता और भविष्य के कौशल को मजबूत करने में उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाता है। प्रमुख कार्यक्रमों के प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनों का विवरण इस प्रकार है:
पीएमकेवीवाई 4.0: वर्ष 2025 में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के एक स्वायत्त संस्थान, अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजेएनआईएफएम) द्वारा पीएमकेवीवाई 4.0 का एक स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण ने अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) उम्मीदवारों के रोजगार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार लाने में योगदान दिया है। प्रशिक्षण से पहले कार्यरत और स्व-रोजगार प्राप्त एसटीटी उत्तरदाताओं का संयुक्त हिस्सा 26.6% था, जो पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण के बाद बढ़कर 45.4% हो गया, जो 18.8 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्शाता है। जिसमें 41.4% एसटीटी उम्मीदवारों और 48.9% पूर्व अधिगम मान्यता (आरपीएल) उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद आय में वृद्धि दर्ज की है। कुल मिलाकर, पीएमकेवीवाई 4.0 ने औपचारिक कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाया है और लाभार्थियों के एक बड़े हिस्से के लिए कौशल आत्मविश्वास, रोजगार भागीदारी और आय परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
जेएसएस: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के एक स्वायत्त संस्थान, अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजे एनआईएफएम) द्वारा 2025 में जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन किया गया, ताकि योजना की पहुंच, प्रभावशीलता और आजीविका परिणामों का आकलन किया जा सके। मूल्यांकन में योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को उजागर किया गया, जिसमें 33.94 लाख व्यक्ति नामांकित हुए, जिनमें से 32 लाख को प्रशिक्षित किया गया और 31.52 लाख को प्रमाणित किया गया, जो 99 प्रतिशत की समग्र सफलता दर को दर्शाता है। कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत थी, जबकि 73 प्रतिशत लाभार्थी हाशिए पर स्थित वर्गों से थे, जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (36 प्रतिशत) और अन्य पिछड़ा वर्ग (37 प्रतिशत) शामिल हैं। आजीविका पर प्रभाव उल्लेखनीय रहा है, जिसमें 90 प्रतिशत पूर्व छात्र अर्जित कौशल का उपयोग आय सृजन के लिए कर रहे हैं, 82 प्रतिशत प्रशिक्षण के छह महीने के भीतर आर्थिक रूप से कार्यरत हो गए हैं और 60 प्रतिशत पूर्व में कमाई नहीं करने वाले व्यक्ति प्रशिक्षण के बाद कमाई शुरू कर चुके हैं।
एनएपीएस (नैप्स): प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (पीएमएनएपीएस-2) का वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक (30 नवंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर) एक तृतीय-पक्ष मूल्यांकन अध्ययन अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजेएनआईएफएम) द्वारा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पीएमएनएपीएस-2 का मूल्यांकन अवधि के दौरान उल्लेखनीय विस्तार हुआ, जिसमें 46 लाख के संचयी लक्ष्य की तुलना में 34.69 लाख प्रशिक्षुओं को रोजगार दिया गया, जो लगभग 75 प्रतिशत की समग्र उपलब्धि को दर्शाता है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के संस्थागतकरण से वित्तीय पारदर्शिता और पूर्वानुमान में सुधार हुआ है।
मध्य प्रदेश और उसके सतना जिले में प्रशिक्षित उम्मीदवारों और स्थापित या कार्यरत प्रशिक्षण केंद्रों का ब्यौरा अनुबंध-III में दिया गया है।
उद्योग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, ग्रीन जॉब्स, उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ संरेखित करने के लिए, एमएसडीई ने अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बॉडीज (एबी) और/या मूल्यांकन एजेंसियों (एए) के रूप में मान्यता देता है।
- अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, वर्ष 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों के साथ संरेखित करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें। एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 10209 योग्यताओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 2975 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं तथा 7234 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) आईटीआई के छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी समझौता ज्ञापन योजना और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईटी टेक और आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, ऑटोडेस्क, एडब्ल्यूएस, शेल आदि जैसी अन्य कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक होंगी।
- पीएमकेवीवाई के तहत, नई पीढ़ी/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप, विशेष एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में तैयार किया गया है।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क, एआई प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
- संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणियों के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदों (एसएससी) की स्थापना की गई है, जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है।
दिनांक 20.07.2026 को लोक सभा में उत्तरार्थ अतारांकित प्रश्न संख्या 66 के भाग (क), (ख) और (घ) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध।
अनुबंध-I
एमएसडीई की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षित/कार्यरत/नामांकित उम्मीदवारों का राज्यवार ब्यौरा:
|
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
|
पीएमकेवाई
(स्थापना से लेकर 30.06.2026 तक)
|
जेएसएस
(2018-19 से 30.06.2026 तक)
|
नैप्स
(2018-19 से 30.06.2026 तक)
|
सीटीएस/ आईटीआई
(2018 से 2025 तक)
|
|
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
|
5,838
|
8,097
|
569
|
4,574
|
|
आंध्र प्रदेश
|
535,681
|
84,506
|
1,17,246
|
4,16,695
|
|
अरुणाचल प्रदेश
|
98,231
|
726
|
446
|
5,059
|
|
असम
|
848,120
|
74,425
|
53,738
|
31,356
|
|
बिहार
|
764,075
|
2,46,242
|
37,050
|
8,84,949
|
|
चंडीगढ़
|
28,230
|
13,006
|
7,022
|
7,679
|
|
छत्तीसगढ
|
205,017
|
1,58,564
|
32,728
|
1,76,809
|
|
दिल्ली
|
528,800
|
42,656
|
1,33,771
|
80,267
|
|
गोवा
|
10,496
|
13,766
|
49,960
|
16,408
|
|
गुजरात
|
473,270
|
1,29,951
|
5,65,729
|
6,80,947
|
|
हरियाणा
|
764,665
|
55,380
|
3,99,524
|
4,30,045
|
|
हिमाचल प्रदेश
|
177,549
|
95,942
|
48,947
|
1,63,850
|
|
जम्मू और कश्मीर
|
433,724
|
15,153
|
5,878
|
57,682
|
|
झारखंड
|
315,290
|
1,13,998
|
59,921
|
2,83,095
|
|
कर्नाटक
|
609,367
|
1,52,682
|
4,47,703
|
5,64,167
|
|
केरल
|
275,165
|
1,25,363
|
78,383
|
2,69,251
|
|
लद्दाख
|
4,076
|
1,529
|
204
|
2,005
|
|
लक्षद्वीप
|
390
|
5,177
|
59
|
2,356
|
|
मध्य प्रदेश
|
1,233,837
|
3,92,298
|
1,49,759
|
5,82,081
|
|
महाराष्ट्र
|
1,337,900
|
2,93,055
|
13,46,717
|
9,45,222
|
|
मणिपुर
|
115,543
|
51,070
|
609
|
3,482
|
|
मेघालय
|
60,807
|
6,999
|
1,212
|
5,661
|
|
मिजोरम
|
44,449
|
7,057
|
473
|
2,533
|
|
नागालैंड
|
55,711
|
13,802
|
176
|
2,014
|
|
ओडिशा
|
603,909
|
3,36,577
|
61,896
|
4,43,484
|
|
पुदुचेरी
|
36,333
|
-
|
17,048
|
6,040
|
|
पंजाब
|
577,143
|
24,311
|
96,176
|
3,37,863
|
|
राजस्थान
|
1,409,480
|
1,02,323
|
1,15,488
|
8,46,973
|
|
सिक्किम
|
19,529
|
-
|
2,249
|
2,569
|
|
तमिलनाडु
|
894,314
|
1,09,851
|
5,41,317
|
2,84,559
|
|
तेलंगाना
|
469,063
|
83,340
|
2,27,138
|
2,55,735
|
|
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव
|
11,971
|
17,436
|
14,708
|
4,640
|
|
त्रिपुरा
|
163,792
|
22,032
|
2,771
|
17,811
|
|
उत्तर प्रदेश
|
2,522,287
|
6,58,156
|
4,10,215
|
25,50,273
|
|
उत्तराखंड
|
254,149
|
1,00,558
|
1,15,059
|
83,686
|
|
पश्चिम बंगाल
|
653,478
|
1,01,992
|
1,56,508
|
2,90,331
|
|
कुल
|
16,541,679
|
36,58,020
|
52,98,397
|
1,07,42,151
|
अनुबंध-II
पीएमकेवीवाई (1.0 से 3.0) के तहत नियोजित उम्मीदवारों का राज्यवार ब्यौरा:
|
राज्य
|
नियोजित उम्मीदवारों की संख्या
|
|
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह
|
124
|
|
आंध्र प्रदेश
|
111,640
|
|
अरुणाचल प्रदेश
|
14,014
|
|
असम
|
67,257
|
|
बिहार
|
127,855
|
|
चंडीगढ़
|
6,361
|
|
छत्तीसगढ
|
28,142
|
|
दिल्ली
|
78,349
|
|
गोवा
|
1,105
|
|
गुजरात
|
69,289
|
|
हरियाणा
|
158,981
|
|
हिमाचल प्रदेश
|
27,185
|
|
जम्मू और कश्मीर
|
53,656
|
|
झारखंड
|
29,461
|
|
कर्नाटक
|
74,225
|
|
केरल
|
26,385
|
|
लद्दाख
|
1,063
|
|
लक्षद्वीप
|
-
|
|
मध्य प्रदेश
|
221,845
|
|
महाराष्ट्र
|
80,950
|
|
मणिपुर
|
16,094
|
|
मेघालय
|
13,608
|
|
मिजोरम
|
9,682
|
|
नगालैंड
|
6,181
|
|
ओडिशा
|
71,066
|
|
पुदुचेरी
|
10,504
|
|
पंजाब
|
128,913
|
|
राजस्थान
|
186,018
|
|
सिक्किम
|
3,942
|
|
तमिलनाडु
|
172,336
|
|
तेलंगाना
|
112,967
|
|
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीप
|
2,817
|
|
त्रिपुरा
|
18,682
|
|
उत्तर प्रदेश
|
338,882
|
|
उत्तराखंड
|
52,597
|
|
पश्चिम बंगाल
|
115,711
|
|
कुल मिलाकर
|
2,437,887
|
अनुबंध-III
प्रशिक्षित/कार्यरत उम्मीदवारों का ब्यौरा:
| |
पीएमकेवाई
(शुरुआत से लेकर)
जून, 2026)
|
जेएसएस
(2018-19 से)
जून, 2026)
|
नैप्स
(2018-19 से)
जून 2026 तक)
|
सीटीएस / आईटीआई
(2018 से 2025 तक)
|
|
मध्य प्रदेश
|
1,233,837
|
3,92,298
|
1,49,759
|
5,82,081
|
|
सतना ज़िला
|
24,277
|
14,299
|
1,101
|
14,759
|
प्रशिक्षण केंद्रों का ब्यौरा:
| |
पीएमकेवीवाई 4.0
केंद्र-
(एसटीटी+एसपी)*
|
जेएसएस
केंद्र-
|
नैप्स
प्रतिष्ठान
|
आईटीआई
(सरकारी और निजी)
|
|
मध्यप्रदेश
|
1417
|
30
|
1,394
|
847
|
|
सतना ज़िला
|
30
|
01
|
44
|
18
|
* अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) और विशेष परियोजनाएं (एसपी)
यह जानकारी आज कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी द्वारा लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
*****
पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2286664)
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