रक्षा मंत्रालय
सीमावर्ती अवसंरचना भविष्य की प्रौद्योगिकी-केन्द्रित युद्धकला में अपरिहार्य बनी रहेगी: बीआरओ सामरिक अवसंरचना सम्मेलन में रक्षा मंत्री का संबोधन
“बीआरओ विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए विशिष्ट तकनीकों को अपना रहा है”
“कनेक्टिविटी सभ्यतागत विकास का अनिवार्य घटक है, सरकार ने सुनिश्चित किया कि किसी भी दूरस्थ क्षेत्र का निवासी मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे”
“नवोन्मेषण, अनुसंधान और उत्कृष्ट क्रियान्वयन भविष्य के लिए तैयार रणनीतिक अवसंरचना की कुंजी
प्रविष्टि तिथि:
16 JUL 2026 1:26PM by PIB Delhi
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 16 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही युद्धकला की बदलती प्रकृति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, फिर भी बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़कें और सुरंगें भविष्य में अपरिहार्य भूमिका निभाती रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि युद्ध का परिणाम बहुत हद तक सैन्य शक्ति, सटीक क्षमताओं और आधुनिक प्रौद्योगिकियों द्वारा निर्धारित होता है, फिर भी बुनियादी ढांचा सैन्य अभियानों को सक्षम बनाने के लिए अत्यधिक महत्व रखता है।

श्री राजनाथ सिंह ने बीआरओ की सराहना करते हुए कहा कि कभी-कभी युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो हमारे सैनिकों को अग्रिम पंक्ति तक ले जाती है। इसलिए, उस सड़क का निर्माण करने वाला व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण संरक्षक है जितना कि सीमा पर तैनात सैनिक। उन्होंने बीआरओ द्वारा मजबूत बुनियादी ढांचा स्थापित करने और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा को निरंतर मजबूत करने और भारत को 2047 तक विकसित भारत में बदलने के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाने की प्रशंसा की।
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले साढ़े छह दशकों में बीआरओ ने खुद को सामान्य सड़क निर्माण एजेंसी से रूपांतरित कर विश्व के सबसे सम्मानित रणनीतिक अवसंरचना संगठनों में से एक के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अटल सुरंग, उमलिंग ला दर्रा और सेला सुरंग जैसी उपलब्धियां बीआरओ की क्षमता और कड़ी मेहनत का जीता-जागता प्रमाण हैं। बीआरओ के समर्पित कर्मियों ने बार-बार यह साबित किया है कि राष्ट्र सेवा की भावना से, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

श्री राजनाथ सिंह ने बीआरओ को नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाने में अग्रणी संगठन बताते हुए 'सुरंग निर्माण प्रौद्योगिकी' का विशेष उल्लेख किया, जिसने शहरों में मेट्रो निर्माण से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में राजमार्ग विकास तक में क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा कि विश्व के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में बीआरओ जिस गति से सड़कों और राजमार्गों का निर्माण करता है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने इसे मानवीय संकल्प तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की संयुक्त शक्ति का प्रतिबिंब बताया।
रक्षा मंत्री ने 'कनेक्टिविटी' को सभ्यतागत विकास का एक अनिवार्य घटक बताया और सड़क, रेल, हवाई तथा डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से सभी प्रकार की कनेक्टिविटी प्रदान करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बुनियादी ढांचे पर देश की क्षमताओं और आवश्यकताओं के अनुरूप ध्यान नहीं दिया गया। हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाला नागरिक मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे। रक्षा मंत्री ने कहा कि हम 'जीवंत ग्राम कार्यक्रम' के अंतर्गत सीमावर्ती गांवों को, जिन्हें कभी अंतिम गांव कहा जाता था, देश के पहले गांवों के रूप में विकसित कर रहे हैं। मजबूत बुनियादी ढांचे वाले राष्ट्र का ही भविष्य उज्ज्वल होता है। आज हम जिस अवसंरचना का निर्माण कर रहे हैं, वह अगले एक या दो शताब्दियों तक हमारी सभ्यता को परिभाषित करेगा।

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि अवसंरचना विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने उद्योगों से नवोन्मेषण करने, शिक्षाविदों से अनुसंधान में प्रगति करने, इंजीनियरों से समाधान विकसित करने और प्रशासकों से उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना होगा जो उत्कृष्टता को बढ़ावा दे, जहां प्रत्येक हितधारक पूरी निष्ठा के साथ अपनी भूमिका निभाए।
इस अवसर पर सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि रणनीतिक क्षमता का मापदंड अब केवल निर्माण कार्यों से ही निर्धारित नहीं होता; बल्कि यह इस बात से भी निर्धारित होता है कि हम कितनी बुद्धिमत्ता से योजना बनाते हैं, कितनी तेजी से क्रियान्वयन करते हैं, कितने प्रभावी ढंग से निगरानी करते हैं और कितने टिकाऊ तरीके से अवसंरचना परिसंपत्तियों का रखरखाव करते हैं। उन्होंने कहा कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्थागत सुधारों से प्रेरित संगठनात्मक परिवर्तन की यात्रा आरंभ कर दी है। उन्होंने कहा कि गतिशील और भविष्य के लिए तैयार रणनीतिक अवसंरचना के निर्माण के लिए डिजिटल योजना, एआई-सक्षम समाधान, आधुनिक निर्माण पद्धतियों, मशीनीकरण और उद्योग तथा शिक्षा जगत के साथ मजबूत सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।


रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन और बुनियादी ढांचा विकास में उत्कृष्टता को सम्मानित करते हुए बीआरओ की विभिन्न परियोजनाओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने परियोजना प्रबंधन और भर्ती के लिए दो डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए, जो बीआरओ के डिजिटल रूपांतरण और संगठनात्मक आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
श्री राजनाथ सिंह ने बीआरओ की तीन प्रमुख पुस्तकों - 'पथ प्रदर्शक', 'ऊंची सड़कें' और 'पथ विकास' का भी विमोचन किया, जिनमें संगठन की उपलब्धियों, इंजीनियरिंग नवाचारों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और भविष्य के विज़न का प्रलेखन किया गया है। बीआरओ कर्मयोगियों के अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता और निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करते हुए बीआरओ राष्ट्रगान का भी अनावरण किया गया।

15 जुलाई, 2026 को आरंभ इस दो दिवसीय सम्मेलन ने उभरती प्रौद्योगिकियों, नवोन्मेषी इंजीनियरिंग समाधानों, उत्पादकता में सुधार के लिए योजना, परियोजना निगरानी और कार्यान्वयन में डिजिटल रूपांतरण, टिकाऊ निर्माण पद्धतियों और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। इसका उद्देश्य भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक अवसंरचना के विकास में तेजी लाना था। इस आयोजन में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, नीति निर्माता, अवसंरचना विशेषज्ञ, बीआरओ अधिकारी, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों और प्रौद्योगिकी भागीदार रणनीतिक अवसंरचना विकास के भविष्य पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए।
सम्मेलन को विभिन्न विषयगत सत्रों में आयोजित किया गया था, जिसमें योजना और डिजाइन से लेकर कार्यान्वयन, निगरानी और भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अपनाने तक- रणनीतिक अवसंरचना विकास के संपूर्ण जीवनचक्र को शामिल किया गया था। प्रत्येक सत्र में 'प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषण और उत्कृष्ट कार्यान्वयन के माध्यम से क्षमता संवर्धन' थीम से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसका उद्देश्य भविष्य की रणनीतिक अवसंरचना के विकास के लिए व्यावहारिक समाधान खोजना था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भविष्य की रणनीतिक अवसंरचना को केवल कड़े श्रम से नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और उत्कृष्ट कार्यान्वयन के माध्यम से अधिक कुशलता के साथ कार्य करके ही प्राप्त किया जा सकता है।
इस सम्मेलन में अग्रणी अवसंरचना कंपनियों, उपकरण विनिर्माताओं, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी भागीदारों के साथ एक उद्योग संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने रणनीतिक अवसंरचना निर्माण से संबंधित विशेषज्ञता, उन्नत उपकरण और उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। इसमें विशेष रूप से बीआरओ के अनूठे प्रचालनगत वातावरण के अनुकूल उपयुक्त समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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पीके/केसी/एसकेजे/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2285382)
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