विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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क्षेत्रीय भाषाओं के एकीकरण के माध्यम से विधिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन


विधि कार्य विभाग और बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में विधिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दस वर्षीय परिप्रेक्ष्य कार्य योजना पर संयुक्त रूप से विचार-विमर्श किया

प्रविष्टि तिथि: 11 JUL 2026 4:43PM by PIB Delhi

 

भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया  (बीसीआई) के सहयोग से आज नई दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के परिसर में "क्षेत्रीय भाषाओं के एकीकरण के माध्यम से विधिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाना" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

इस सम्मेलन में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की विधिक शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सह-अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन, सांसद (राज्यसभा) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष माननीय श्री मनन कुमार मिश्रा, विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

यह सम्मेलन हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में विधिक शिक्षा को बढ़ावा देने और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि, प्रमुख विधिक शिक्षा केंद्रों के कुलपति, बार एसोसिएशन के सदस्य, न्यायपालिका के प्रतिनिधि और प्रख्यात विधिक शिक्षाविद भारत में बहुभाषी विधिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए।

विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य विधिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं को एकीकृत करने के लिए एक चरणबद्ध, व्‍यवस्थित, मापने योग्य और सुनिश्चित- गुणवत्ता ढांचा विकसित करना था, साथ ही अंग्रेजी को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में संरक्षित रखना था। प्रस्तावित ढांचे का लक्ष्य द्विभाषी और उत्तरोत्तर बहुभाषी विधिक शिक्षा मॉडल को बढ़ावा देना है, जिससे विधिक समझ में वृद्धि हो, न्याय तक पहुंच में सुधार हो, कानूनी सहायता और नैदानिक ​​विधिक शिक्षा को सुदृढ़ किया जा सके और भविष्य के विधिक पेशेवरों को जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के समक्ष कार्य करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।

प्रतिभागियों ने कानूनी व्यवस्था में भाषा के एकीकरण को गति देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया। इस बात पर बल दिया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सुसज्जि‍त अनुवाद उपकरण, डिजिटल कानूनी संग्रह, मानकीकृत कानूनी शब्दावलियों और शब्दावली डेटाबेस सहित उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए, बशर्ते कि कानूनी और भाषाई विशेषज्ञों द्वारा इनका अच्‍छी तरह से सत्यापन किया जाए ताकि भारतीय भाषाओं में सटीक और विश्वसनीय कानूनी शिक्षा को सुगम बनाया जा सके।

आगे, सम्मेलन में विधिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं पर एक राष्ट्रीय घोषणा की दिशा में काम करने, चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए दस वर्षीय परिप्रेक्ष्य कार्य योजना के व्यापक ढांचे को अंतिम रूप देने और प्रस्तावित सुधारों के कार्यान्वयन की देखरेख, मार्गदर्शन और निगरानी के लिए विधि कार्य विभाग और बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से गठित एक राष्ट्रीय संचालन समिति की स्थापना करने का संकल्प लिया गया।

सम्मेलन ने भारतीय भाषाओं को सुनियोजित तरीके से एकीकृत करके भारत सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सभी हितधारकों की समावेशी, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की जिससे न्याय तक समान पहुंच की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा सके और @2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में योगदान दिया जा सके।

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पीके/केसी/पीपी/आर


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