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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रविष्टि तिथि: 10 JUL 2026 8:22AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि निस्वार्थ सेवा मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण की इसी भावना के साथ देश प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

 

“हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्।

तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये।।”

 

यह सुभाषितम् यह संदेश देता है कि मनुष्य को केवल वही कार्य करने चाहिए जो सभी प्राणियों के लिए हितकारी हो और आत्मा के लिए शांति देने वाला हो। यही ईश्वर के प्रति वास्तविक समर्पण भी है, क्योंकि यही मार्ग समस्त पुरुषार्थों और आध्यात्मिक उपलब्धियों का मूल आधार है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर लिखा:

“निःस्वार्थ कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। हम सेवा और समर्पण के इसी भाव के साथ हर किसी के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

 

हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम् ।

तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये ।।”

 

 

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पीके/केसी/बीयू/केके


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