नीति आयोग
नीति आयोग ने "स्ट्रेटेजिक रोडमैप फॉर मेकिंग आयुर्वेद ग्लोबल" पर रिपोर्ट जारी की
प्रविष्टि तिथि:
02 JUL 2026 8:41PM by PIB Delhi
नीति आयोग ने 2 जुलाई 2026 को "स्ट्रेटेजिक रोडमैप फॉर मेकिंग आयुर्वेद ग्लोबल" शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की जिसमें वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की वर्तमान स्थिति का व्यापक आकलन प्रस्तुत करते हुए आयुर्वेद को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए चरणबद्ध रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास तथा आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में जारी की गई। इस अवसर पर नीति आयोग, आयुष मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, विभिन्न सरकारी संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि आयुर्वेद का वैश्वीकरण भारत को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इससे न केवल देश को उल्लेखनीय आर्थिक लाभ प्राप्त होगा, बल्कि रोजगार सृजन, निर्यात में वृद्धि तथा भारत की सांस्कृतिक एवं ज्ञान-आधारित सॉफ्ट पावर को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी मंत्रालयों समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि निर्धारित समय-सीमा में इसका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने कहा कि आयुर्वेद का वैश्वीकरण केवल इसके बाज़ार का विस्तार करने या निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका मूल उद्देश्य विश्वभर के लोगों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करना तथा उन्हें स्वस्थ, संतुलित और अधिक संतोषपूर्ण जीवन के लिए उपचार का साक्ष्य-आधारित अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है। साथ ही, यह "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की भावना को साकार करता है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों तथा पिछले एक दशक में प्राप्त उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में प्रस्तुत सिफारिशें मंत्रालय के वर्तमान प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाएंगी तथा आयुर्वेद को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को नई गति प्रदान करेंगी।
विदेश मंत्रालय के अपर सचिव (यूएनईएस) श्री अक्विनो विमल ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सहभागिताओं और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से आयुर्वेद के वैश्वीकरण को आगे बढ़ाने में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।
यह अध्ययन नीति आयोग के स्वास्थ्य प्रभाग द्वारा प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के सहयोग से किया गया है। इसमें आयुर्वेद के वैश्वीकरण से संबंधित अवसरों और चुनौतियों की पहचान करने के लिए व्यापक हितधारक परामर्श, अंतरराष्ट्रीय मानकों का तुलनात्मक अध्ययन तथा साक्ष्य-आधारित विश्लेषण का उपयोग किया गया है।
रिपोर्ट में आयुर्वेद के वैश्वीकरण के लिए तीन-स्तंभीय रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें शामिल हैं—
• उपलब्धता: वैश्विक स्तर पर काम करने के तरीके और कार्यबल, वैश्विक निर्यात और विनिर्माण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास, और वैश्विक मानकों के अनुरूप आयुर्वेद शिक्षा।
- स्वीकार्यता : नियमों एवं दिशानिर्देशों का पालन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग (शैक्षणिक और औद्योगिक), बीमा कवरेज, और स्थानीय आवश्यकताओं एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप आयुर्वेद को अनुकूल बनाना।
- प्रसार : आयुर्वेद की रणनीतिक ब्रांडिंग एवं वैश्विक पहचान को मजबूत करना। अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रचार, चिकित्सा मूल्य पर्यटन और वैश्विक संस्थाओं में आयुर्वेद की उपस्थिति सुनिश्चित करना।
रिपोर्ट में विकसित भारत@2047 की कल्पना के अनुरूप वर्ष 2047 तक के लिए चरणबद्ध रणनीति प्रस्तुत की गई है।
रिपोर्ट नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के हितधारकों, आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संस्थाओं सहित विभिन्न पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को प्रोत्साहित करना तथा समन्वित प्रयासों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करना है। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति, अनुसंधान, शिक्षा, निर्यात, नियामक समन्वय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं पर विशेष बल दिया गया है। यह रिपोर्ट "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" की भारत की व्यापक प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करती है तथा अपनी समृद्ध ज्ञान-परंपराओं के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को और अधिक मजबूत करती है।
पूरी रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है : https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-07/Strategic-Roadmap-for-Globalization-of-Ayurveda.pdf
***
पीके/केसी/केपी / डीके
(रिलीज़ आईडी: 2280594)
आगंतुक पटल : 148