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भारतीय रेल ने मालदा डिवीजन में सिग्नलिंग आधुनिक बनाने के लिए 20 स्थानों पर 274 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को स्वीकृति दी


यह, पूर्वी रेलवे के व्यस्ततम गलियारों में से एक पर सिग्नलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता, दक्षता और रखरखाव क्षमता बढ़ाने की आधुनिकीकरण परियोजना है

प्रविष्टि तिथि: 02 JUL 2026 5:41PM by PIB Delhi

भारतीय रेल ने रेलवे सुरक्षा सुदृढ़ बनाने और सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्वी रेलवे के मालदा डिवीजन (मंडल) में 20 स्थानों पर रिले-आधारित इंटरलॉकिंग को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलने की 274 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

इस परियोजना के तहत पूर्वी रेलवे के उच्च यातायात मार्ग पर स्थित 18 रेलवे स्टेशनों और 2 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग (आईबीएस) स्थानों पर मौजूदा रिले रूम/पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई/आरआरआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदला जाएगा। यह कंप्यूटर-आधारित उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली सिग्नल, ट्रैक और स्विच को आपस में इस तरह जोड़ती है कि जब तक आगे का रास्ता पूरी तरह साफ और सुरक्षित न हो, तब तक किसी ट्रेन को आगे बढ़ने का सिग्नल नहीं मिलता।

उच्च आवागमन मार्ग पर सिग्नलिंग अवसंरचना का आधुनिकीकरण

स्वीकृत परियोजना में मालदा डिवीजन में 18 स्टेशनों और 2 आईबीएस स्थानों सहित 20 परिचालन स्थानों पर पारंपरिक रिले-आधारित सिग्नलिंग प्रणाली को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग तकनीक से बदला जाएगा।

इस आधुनिकीकरण से सिग्नलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता, दक्षता और रखरखाव क्षमता में काफी सुधार होगा, साथ ही यह पूर्वी रेलवे के सबसे व्यस्त रेल परिचालन गलियारों में से एक पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के संचालन का मजबूत तकनीकी आधार तैयार करेगा।

अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और विश्वसनीय ट्रेन संचालन

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग उन्नत, त्रुटि-रहित सिग्नलिंग तकनीक है जो रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित करती है, साथ ही उपकरण की खराबी और मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम कर देती है। उन्नत प्रणाली परिचालन स्थिति अनुरूपण को बढ़ाएगी, सेवा में व्यवधान में कमी लाएगी, गड़बड़ी के बाद सेवा बहाली त्वरित बनाएगी और समयबद्धता बढ़ाएगी।

यह परियोजना ट्रेन सुरक्षा मजबूत करने के साथ ही, परिचालन दक्षता में सुधार लाएगी और उच्च यातायात वाले मार्गों पर तेज और अधिक विश्वसनीय रेल आवागमन को बढ़ावा देगी। साथ ही यह कवच ​​और अन्य आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली जैसी भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए बेहतर आधार तैयार करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को स्वीकृति भारतीय रेलवे के उस निरंतर अभियान का हिस्सा है जिसके तहत उन्नत प्रौद्योगिकियों द्वारा राष्ट्रीय नेटवर्क में सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेलवे संचालन सुनिश्चित हो।

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पीके/केसी/एकेवी/पीके

 


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