विद्युत मंत्रालय
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भारत ने 2026 में ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक आयोजित की


ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों ने राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास प्राथमिकताओं और ऊर्जा प्रवाह को सम्मान देने के महत्व दोहराया

ब्रिक्स देशों के सामूहिक दृष्टिकोण और सहमति दर्शाते हुए, बैठक, 11वें ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों के संयुक्त विज्ञप्ति अपनाने के साथ संपन्न

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ

प्रविष्टि तिथि: 25 JUN 2026 3:19PM by PIB Delhi

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत, "स्थिति से दृढ़ता से उबरने, नवाचार, सहयोग और संवहनीयता के लिए निर्माण" विषय पर आधारित 11 वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक 25 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में आयोजित हुई।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्रियों, उप मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श और ऊर्जा क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग पर चर्चा की गई। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) सहित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

 “सर्वेषां ऊर्जम् (सभी के लिए ऊर्जा)” विषय पर आधारित चर्चा तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित रही:

प्राथमिकता 1: ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता , जिसमें स्थिति अनुरूप ऊर्जा प्रणालियों, विविध ऊर्जा स्रोतों, महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और सुरक्षित, किफायती ऊर्जा आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया गया।

प्राथमिकता 2: ऊर्जा पहुंच और समानता, जिसमें सस्ती, भरोसेमंद, संवहनीय और आधुनिक ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुंच, खाना पकाने के स्वच्छ समाधान, किफायती वित्तपोषण, क्षमतावर्द्धन और उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया।

प्राथमिकता 3: प्रौद्योगिकी और नवाचार , जिसमें स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला (उत्पादन, भंडारण और वितरण, तथा अंतिम उपयोग अनुप्रयोग), ऊर्जा प्रणालियों का डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा दक्षता, जैव ईंधन, कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों तथा ब्रिक्स देशों में अनुसंधान और नवाचार सहयोग मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास प्राथमिकताओं और ऊर्जा मार्गों (ऊर्जा स्रोत और भविष्य रूपरेखा) का सम्मान करने के महत्व की पुष्टि की।

11 वें ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों द्वारा संयुक्त विज्ञप्ति अपनाए जाने के साथ बैठक संपन्न हुई, जो ऊर्जा सुरक्षा, संवहनीयता, नवाचार, स्थिति सक्षम बुनियादी ढांचे और क्षमता वर्द्धन के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर ब्रिक्स देशों के सामूहिक दृष्टिकोण और सहमति को दर्शाता है।

भारत का ऊर्जा रूपांतरण और वैश्विक नेतृत्व

केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और मानव विकास के लिए ऊर्जा,मूलभूत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपने लोगों की उचित आकांक्षाएं पूरी करते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय, संसाधन और नीतिगत उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने “सर्वेषां ऊर्जाम्” के सिद्धांत से निर्देशित स्थिति दृढ़, भविष्योन्मुखी और जन-केंद्रित ऊर्जा प्रणाली निर्मित करने की भारत की प्रतिबद्धता रेखांकित की।

केंद्रीय विद्युत मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आए उल्लेखनीय बदलाव  की चर्चा करते हुए बताया कि भारत विश्व में बिजली का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बनकर उभरा है, जिसकी विद्युत स्थापन क्षमता लगभग 540 गीगावाट तक पहुंच गई है जिसमें गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों का योगदान कुल स्थापन क्षमता के आधे से अधिक है। उन्होंने भारत में स्वच्छ ऊर्जा के तीव्र विस्तार का उल्लेख किया, जिसमें सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर आज 154 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में तेजी लाने और ऊर्जा स्रोत परिवर्तन में नागरिकों की भागीदारी बढाने में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसी प्रमुख पहल की चर्चा की।

श्री मनोहर लाल ने 2032 तक 400 गीगावाट घंटे से अधिक ऊर्जा भंडारण क्षमता और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने की भारत की महत्वाकांक्षाओं का उल्लेख किया, साथ ही उन्होंने निर्धारित समय से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण हासिल करने और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) तथा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहल में भारत के नेतृत्व उपलब्धियों की चर्चा की।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में हासिल परिणाम

भारत की अध्यक्षता में हासिल प्रमुख परिणाम ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग प्लेटफॉर्म (ईआरसीपी) के अंतर्गत स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र ( https://brics-dcoe.global/ ) का शुभारंभ रहा। यह केंद्र ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान साझाकरण, क्षमता वर्द्धन, नीति और नियामक सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और अग्रिम योजना पहल विकसित करने के स्वैच्छिक सहयोगी मंच का कार्य करेगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि में, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाया गया, जो भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा पहुंच प्रदान करने के साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को सुगम बनाने में आधुनिक, स्थिति अनुकूल और डिजिटल सक्षम विद्युत प्रणालियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों ने हाइड्रोजन वैल्यू चेन 2026 पर ब्रिक्स संयुक्त रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के प्रयासों की भी सराहना की, जो हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों, मानकों, औद्योगिक अनुप्रयोगों और भविष्य की मूल्य श्रृंखला पर बेहतर सहयोग का आधार प्रदान करेगा।

बैठक में ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग प्लेटफॉर्म (ईआरसीपी) के नवीनतम संदर्भ शर्तों का भी अनुमोदन किया गया, जिससे ब्रिक्स देशों के बीच अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और ज्ञान आदान-प्रदान के लिए संस्थागत ढांचा मजबूत हुआ।

भारत की अध्यक्षता में वरिष्ठ ऊर्जा अधिकारियों के स्तर पर आयोजित कई दौर के परामर्शों में 11 वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के सफल परिणामों की पुष्टि हुई। इन परामर्शों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विस्तृत चर्चा और आम सहमति बनाने में मदद मिली और मंत्रिस्तरीय बैठक में अपनाए गए निर्णयों में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वरिष्ठ ऊर्जा अधिकारियों की बैठक में, भारत ने स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी और विद्युत उपकरण मानकों को बढ़ाने पर दो सह-कार्यक्रम भी आयोजित किए। इन चर्चाओं में ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ ऊर्जा अधिकारी, नीति निर्माता, उद्योग दिग्गज, विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने ब्रिक्स देशों में ऊर्जा सुरक्षा, संवहनीयता और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीन दृष्टिकोण साझा किए।

संयुक्त विज्ञप्ति में ऊर्जा सुरक्षा, समानता और नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि

संयुक्त विज्ञप्ति में इस बात की पुष्टि की गई कि ऊर्जा सुरक्षा ब्रिक्स सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसमें विविध, स्थिति अनुरूप ढलने और पारदर्शी ऊर्जा प्रणालियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित, भरोसेमंद, किफायती और संवहनीय ऊर्जा तक सबकी पहुंच आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, औद्योगीकरण और मानवीय गरिमा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ब्रिक्स मंत्रियों ने संतुलित और विविध ऊर्जा मिश्रण के महत्व, स्वच्छ और अधिक कुशल ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन, हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों (उद्योगों और बिजली संयंत्रों से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण में जाने से रोकना), डिजिटलीकरण और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर देते हुए किफायती वित्तपोषण के महत्व की पुष्टि की।

भविष्य की ऊर्जा प्रणालियों को आकार देने में अनुसंधान और युवा भागीदारी की भूमिका मानते  हुए, ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स युवा ऊर्जा शिखर सम्मेलन के आयोजन का समर्थन किया और ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग मंच के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

उन्होंने 11 वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के सफल आयोजन और भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स ऊर्जा सहयोग बढ़ाने में उसके नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने सुरक्षित, किफायती, संवहनीय और स्थिति सुदृढ़ ऊर्जा प्रणालियों के समर्थन में सहयोग को और गहन बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वर्ष 2027 में चीन की अध्यक्षता में इस पर सहयोग जारी रखने की आशा व्यक्त की।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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