कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 'आईएएस ई-सिविल सूची 2026' जारी की; उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिभा मानचित्रण शासन और प्रशासनिक नियोजन को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाता है


ई-सिविल लिस्ट विशेषज्ञता की पहचान करने, कैडर प्रबंधन में सुधार करने और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायक एक महत्वपूर्ण शासन उपकरण के रूप में कार्य करती है

अधिकारियों की योग्यता, अनुभव, कैडर और तैनाती से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच सरकारों और संस्थानों को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है और समग्र शासन ढांचे को मजबूत करती है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल लिस्ट का डिजिटलीकरण पहुंच, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है

प्रविष्टि तिथि: 22 JUN 2026 5:17PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में आईएएस ई-सिविल सूची 2026 जारी की।

शासन में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि ई-सिविल लिस्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक योजना, प्रतिभा पहचान और देश भर में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की योग्यता, अनुभव, पद और तैनाती से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच सरकारों और संस्थानों को सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाती है और समग्र शासन ढांचे को मजबूत करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल लिस्ट अब केवल अधिकारियों की एक निर्देशिका भर नहीं रह गई है, बल्कि यह आज सरकारों, संस्थानों और हितधारकों के लिए एक सक्रिय और उपयोगी ज्ञान स्रोत के रूप में उभर चुकी है। उन्होंने इसकी उन्नत खोज क्षमताओं और हाइपरलिंकिंग जैसी सुविधाओं पर जोर देते हुए बताया कि डिजिटल प्रारूप उपयोगकर्ताओं को अधिकारियों की पेशेवर पृष्ठभूमि, विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर पहचानने में सक्षम बनाता है। इससे न केवल प्रशासनिक योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में सहायता मिलती है, बल्कि नीति क्रियान्वयन की प्रक्रिया को भी सुगम बनाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, राज्य सरकारों और विभिन्न विभागों के समन्वय से, डेटाबेस को अपडेट कर इसे बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष व्यापक प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन प्रक्रियाओं में सुधार लाने के साथ-साथ अधिक दक्षता, सुगमता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डेटा-आधारित शासन के महत्व पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में कर्मचारियों की संख्या की समीक्षा की और राज्यों एवं केंद्र की बदलती मानव संसाधन आवश्यकताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शासन संबंधी जिम्मेदारियां विभिन्न क्षेत्रों और प्रदेशों में लगातार बढ़ रही हैं जिससे कुशल मानव संसाधन नियोजन का महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आवश्यकताओं का निरंतर आकलन और नियमित कैडर समीक्षा उभरती जरूरतों को पूरा करने और प्रशासनिक क्षमता को और मजबूत करने में सहायक होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शासन ढांचे तैयार करते समय भारत की व्यापक भौगोलिक और विकासात्मक विविधता को पहचानने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकताएं अक्सर विभिन्न क्षेत्रों में, विशेष रूप से पहाड़ी, दूरस्थ और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में, काफी भिन्न होती हैं, इसलिए शासन समाधानों को लचीला और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी-आधारित डेटाबेस, सरकारों को विविध विकासात्मक आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुद्रित प्रकाशनों से डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर यह परिवर्तन डिजिटल इंडिया की परिकल्पना के अनुरूप है और यह सार्वजनिक प्रशासन के आधुनिकीकरण के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण से न केवल सुगमता और कार्यक्षमता में सुधार होता है, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित होता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रचना शाह, स्थापना अधिकारी और अपर सचिव श्री मनीष सक्सेना, अपर सचिव (सेवा एवं सतर्कता) श्री फैज अहमद किदवई, अपर सचिव (कार्मिक नीति) श्री मनोज कुमार द्विवेदी समेत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में ई-आईएएस सिविल सूची 2026 को लॉन्च किया गया।

ई-आईएएस सिविल लिस्ट 2026 सिविल लिस्ट का 71वां संस्करण है और पीडीएफ प्रारूप में ई-बुक के रूप में जारी किया गया छठा संस्करण है। उन्नत खोज सुविधाओं और हाइपरलिंकिंग सुविधाओं से लैस, यह एक क्लिक पर जानकारी तक त्वरित और सुविधाजनक पहुंच प्रदान करता है।

इस प्रकाशन में आईएएस अधिकारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है, जिसमें उनका बैच, कैडर, वर्तमान पदस्थापन, वेतन स्तर, शैक्षणिक योग्यता और सेवानिवृत्ति की तिथि शामिल है। इसमें कैडरवार संख्या, अगले पांच वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की संख्या और 1969 से सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से नियुक्त आईएएस अधिकारियों की संख्या के बारे में भी जानकारी दी गई है।

ई-पुस्तक के प्रकाशन से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भारी मात्रा में सिविल सूची की भौतिक प्रतियां छापने से मुक्ति मिली है। यह पहल सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन में योगदान देती है, साथ ही भौतिक प्रकाशन पर होने वाले खर्च को कम करती है और सार्वजनिक संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करती है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए कैडर नियंत्रण प्राधिकरण, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, राज्य कैडरों से प्राप्त सूचनाओं और केंद्र में उपलब्ध जानकारी का उपयोग करके सिविल सूची तैयार करता है। 1 जनवरी 2026 तक, 7,026 की स्वीकृत कैडर संख्या के मुकाबले, 25 कैडरों में कुल 5,755 आईएएस अधिकारी कार्यरत थे।

ई-आईएएस सिविल सूची 2026 कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट https://dopt.gov.in पर उपलब्ध है।

फोटो - केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में ई-आईएएस सिविल सूची 2026 जारी करने के बाद संबोधन करते हुए

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