कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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केन्‍द्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी ने भारत और मॉरीशस के बीच आपसी सम्‍बन्‍ध बढ़ाने के लिए गतिशीलता साझेदारी के तहत 14 भारतीय कामगारों को मॉरीशस रवाना किया


भारत-मॉरीशस जी2जी गतिशीलता साझेदारी को गति मिली

यह पहल भारत के वैश्विक कार्यबल के गतिशीलता एजेंडा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि, और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करती है

चुने गए उम्मीदवार उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से हैं

प्रविष्टि तिथि: 10 JUN 2026 5:53PM by PIB Delhi

कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री, श्री जयंत चौधरी ने भारत और मॉरीशस के बीच जी2जी लेबर मोबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत मॉरीशस  जा रहे 14 कुशल भारतीय कामगारों के दल को रवाना किया।

यह रवानगी भारतीय कामगारों के पहले बैच के सफल नियोजन के बाद हो रही है, जो पहले ही मॉरीशस जा चुके हैं और इस कार्यक्रम के तहत काम शुरू कर चुके हैं। 14 और कामगारों के जाने और 33 अतिरिक्त उम्मीदवारों के वर्क परमिट और डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रिया जारी रहने के साथ, यह पहल सरकार समर्थित पारदर्शी ढांचे के तहत भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में व्यवस्थित रोजगार के अवसर पैदा कर रही है। 

रवाना हो रहे उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए, कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री, श्री जयंत चौधरी ने कहा: "भारत के कुशल कार्यबल को दुनिया भर में उनकी प्रतिभा, दक्षता और अनुकूलशीलता के लिए तेजी से पहचाना जा रहा है। भारत-मॉरीशस  गतिशीलता साझेदारी की बढ़ती गति उस भरोसे को दर्शाती है जो वैश्विक नियोक्ता भारतीय प्रतिभा पर जताते हैं। ये कामगार अपने साथ न केवल पेशेवर कौशल ले जा रहे हैं, बल्कि एक युवा भारत की आकांक्षाएं भी ले जा रहे हैं जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए तैयार है। दोनों देशों की सरकारों के बीच भरोसेमंद साझेदारी के माध्यम से, हम अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और महत्वाकांक्षी रास्ते बना रहे हैं, साथ ही यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय कामगार तेजी से बदलती दुनिया में सफल होने और आगे बढ़ने के लिए तैयार हों।"

भारत-मॉरीशस लेबर मोबिलिटी पार्टनरशिप को मई 2023 में भारत और मॉरीशस के बीच कामगारों के रोज़गार पर हुए समझौता ज्ञापन के तहत लागू किया जा रहा है। इस फ्रेमवर्क का मकसद दोनों देशों के कानूनों और श्रम मानकों के मुताबिक सही तरीके से भर्ती, कामगार कल्‍याण, पारदर्शिता और व्यवस्थित गतिशीलता मार्ग बनाना है।

विदेश जाने वाले उम्‍मीदवार देश के सात अलग-अलग राज्यों से हैं, जो इस कार्यक्रम की पूरे भारत में पहुंच को दिखाते हैं। इस समूह में उत्तर प्रदेश से छह, बिहार और हिमाचल प्रदेश से दो-दो, और मणिपुर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से एक-एक उम्‍मीदवार शामिल है। इन उम्‍मीदवारों के पास रिटेल ऑपरेशन्स, लॉजिस्टिक्स, कस्टमर सर्विस, हॉस्पिटैलिटी और टेक्निकल ट्रेड का अनुभव है, जो भारत के कुशल कामगारों की विविधता और गुणवत्‍ता को दिखाता है।

इस कार्यक्रम को एनएसडीसी ने आगे बढ़ाया है, जिसे जुलाई 2025 में मॉरीशस के इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड (ईडीबी) को इस द्विपक्षीय लेबर मोबिलिटी पहल को शुरू करने में मदद करने के लिए चुना गया था। शुरू होने के बाद से ही, इस कार्यक्रम के तहत मॉरीशस की प्रमुख रिटेल चेन में से एक, 'सुपर यू मॉरीशस' ने कुशल भारतीय कामगारों की मांग की। ये मांग शेल्फ वर्कर्स, कैशियर्स, बावर्चियों और इलेक्ट्रीशियन्स जैसे कई तरह की भूमिकाओं के लिए है।

चुने गए उम्मीदवार सुपर यू मॉरीशस में कई तरह के काम करेंगे, जैसे रिटेल ऑपरेशन, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, कस्टमर सर्विस, खाना बनाना और इलेक्ट्रिकल रखरखाव। उन्हें तीन साल के रोजगार ठेके पर रखा जाएगा, जिसमें सालाना लगभग 4 लाख रुपये से 4.5 लाख रुपये का पैकेज मिलेगा। इसके साथ ही कंपनी की तरफ से रहने की सुविधा, स्‍थानीय परिवहन, ओवरटाइम, वर्क परमिट, मेडिकल कवरेज और दूसरे कानूनी फायदे भी मिलेंगे।

ये मौके इस बात को दिखाते हैं कि यह कार्यक्रम भारतीय कामगारों के लिए विदेश में सुरक्षित, पारदर्शी और फायदेमंद रोज़गार के रास्ते बनाने के लिए कितना प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम बाजार में उनके कल्याण, पेशेवर विकास और लंबे समय तक करियर में तरक्की को भी सुनिश्चित करता है।

यह पहल दुनिया भर में कुशल भारतीय प्रतिभाओं की बढ़ती मांग को उजागर करती है और अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम बाजार में मौकों के लिए युवाओं को तैयार करने में उद्योग के हिसाब से कौशल के महत्व पर ज़ोर देती है। ऐसी कोशिशें एक भरोसेमंद वैश्विक प्रतिभा साझेदारी के तौर पर भारत की स्थिति को मज़बूत करने में मदद करती हैं और साथ ही कौशल, रोज़गार की क्षमता और कामगारों की तैयारी के ज़रिए 'विकसित भारत' की कल्‍पना को आगे बढ़ाती हैं।

इस कार्यक्रम में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अपर सचिव श्री निरंजन कुमार सुधांशु और इस प्रोग्राम से जुड़े अधिकारी भी शामिल हुए।

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पीके/केसी/केपी


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