विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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मेघालय के मंत्री अलेक्जेंडर लालू हेक ने डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की; चर्चा का मुख्य विषय पूर्वोत्तर में जनजातीय समुदायों के लिए एसटीआई हब का विस्तार रहा


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बैठक में विज्ञान और नवाचार के माध्यम से पूर्वोत्तर के जनजातीय विकास पर चर्चा की गई

प्रविष्टि तिथि: 25 MAY 2026 7:10PM by PIB Delhi

मेघालय के कैबिनेट मंत्री और राज्य परियोजनाओं के प्रभारी अध्यक्ष (चेयरमैन) अलेक्जेंडर लालू हेक ने आज केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में जनजातीय समुदायों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) पहलों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की।

चर्चा का मुख्य केंद्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) हब के दायरे का विस्तार करना था। इन हब को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विज्ञान-आधारित पहलों और प्रौद्योगिकी-सक्षम आजीविका सहायता के माध्यम से अनुसूचित जनजाति समुदायों का समग्र विकास करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने लगातार यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लाभ देश के दूरदराज, आदिवासी और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नवाचार-आधारित पहलें आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों, कौशल विकास, जमीनी स्तर पर उद्यमिता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती हैं।

इस बातचीत के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि एसटीआई हब पहल को वैज्ञानिक संस्थानों, स्थानीय हितधारकों और सामुदायिक नेटवर्कों की सहयोगात्मक भागीदारी के माध्यम से, आदिवासी क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों की डिलीवरी और उन्हें अपनाने में आने वाली अहम चुनौतियों को हल करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह पहल जमीनी स्तर पर नवाचार, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय रूप से प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग को भी बढ़ावा देती है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 एसटीआई हब स्थापित किए हैं, जिनमें कई आदिवासी और पूर्वोत्तर क्षेत्र भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार को सीधे सामुदायिक विकास और स्थायी आजीविका सृजन से जोड़ना है।

एलेक्जेंडर लालू हेक ने डॉ. जितेंद्र सिंह को मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र की उस अपार क्षमता से अवगत कराया, जिसका उपयोग नवाचार-आधारित सामुदायिक विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए किया जा सकता है। चर्चाओं के दौरान इस क्षेत्र में एसटीआई-आधारित कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने के लिए, केंद्रीय वैज्ञानिक निकायों और स्थानीय हितधारकों के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एसटीआई हब पहल में पूर्वोत्तर राज्यों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया और सुझाव दिया कि भविष्य के सहयोग और विस्तार के लिए, इस योजना के तहत विस्तृत प्रस्तावों और कार्यक्रम के घटकों की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संबंधित अधिकारियों के समन्वय से आगे और जांच की जा सकती है।

मेघालय के मंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह को आगामी जन कल्याण और विकास पहलों के संबंध में राज्य का दौरा करने के लिए भी आमंत्रित किया।

 

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पीके / केसी/ एमपी   


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