ग्रामीण विकास मंत्रालय
लैंड स्टैक पहल से पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित भूमि प्रबंधन की शुरूआत होगी, बाधा-रहित सेवाएं सुनिश्चित होंगी और लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी: श्री शिवराज सिंह चौहान
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के अंतर्गत वॉटरशेड विकास घटक के तहत एकीकृत एमआईएस और जीआईएस आधारित निगरानी प्रणाली का प्रस्ताव किया गया: केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान
उप-पंजीयक कार्यालयों का आधुनिकीकरण किया जाएगा: श्री शिवराज सिंह
प्रविष्टि तिथि:
08 MAY 2026 3:56PM by PIB Delhi
केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर भूमि संसाधन विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने श्री चौहान को विभाग की विभिन्न पहलों के तहत हासिल की गई प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिसमें डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) 3.0, सर्वेक्षण/पुनः सर्वेक्षण गतिविधियां और वॉटरशेड विकास कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही, आगामी कार्यों के रोडमैप की भी रूपरेखा प्रस्तुत की।

डीआईएलआरएमपी 3.0 की स्थिति की समीक्षा करते हुए श्री चौहान को बताया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश भर में भूमि अभिलेख बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण करना है। इसके मुख्य घटकों में - भूमि अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण, तहसील स्तर के रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण, जियोरेफरेंसिंग और विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) का आवंटन, आधार सीडिंग, मोबाइल नंबर और पते को भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस के साथ जोड़ना, राजस्व न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण और उन्हे भूमि रिकॉर्ड प्रणाली के साथ एकीकृत करना, कोर जीआईएस (सीओआरई जीआईएस) और लैंड स्टैक (एलएएनडी एसटीएसीके) सॉफ्टवेयर का विकास और शहरी भूमि रिकॉर्ड मानचित्रण के लिए पायलट परियोजनाओं का कार्यान्वयन - शामिल हैं।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकीकरण के प्रयासों से नागरिकों के साथ-साथ तहसीलदारों और पटवारी सहित राजस्व अधिकारियों को भी सुविधा होनी चाहिए। अन्य सेवाओं को पारदर्शी, कुशल और परेशानी मुक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रस्तावित लैंड स्टैक पहल से भूमि पार्सल का तत्काल और सटीक मूल्यांकन संभव हो सकेगा, जिससे बैंकों को ऋण स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि नागरिक-अनुकूल सेवाएं प्रदान करने के लिए उप-पंजीयक कार्यालयों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई जा रही है।
श्री चौहान ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) 2.0 के तहत वॉटरशेड विकास घटक की प्रगति की भी समीक्षा की।
डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 के तहत प्रस्तावित पहलों की समीक्षा करते हुए श्री चौहान ने एमआईएस और जीआईएस-आधारित प्रणालियों के संयुक्त उपयोग के माध्यम से एकीकृत डिजिटल निगरानी के महत्व पर बल दिया।
श्री चौहान ने कहा कि वो योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए इस संबंध में सभी राज्यों के मंत्रियों के साथ बैठकें करेंगे और परियोजनाओं के समय पर निष्पादन और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ भी चर्चा करेंगे।
इस समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारियों में अपर सचिव आर. आनंद, संयुक्त सचिव (वॉटरशेड) नितिन खाडे, संयुक्त सचिव (भूमि संसाधन) पी. नरहरि, आर्थिक सलाहकार अब्दुल करीम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
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पीके/केसी/आईएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2259154)
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