स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया; नैतिक, करूणामयी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल आह्वान किया


उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह के दौरान भारत की मजबूत  कोविड-19 प्रतिक्रिया, दूनिया के सबसे बड़े मुफ्त टीकाकरण अभियान और ‘वैक्सीन मैत्री’ के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डाला

स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक विश्वास है; सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और स्वस्थ भारत के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करें: उपराष्ट्रपति

एकीकृत चिकित्सा और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण समग्र स्वास्थ्य देखभाल को गति दे रहे हैं; कठिन क्षेत्रों में नवाचारों के लिए एम्स ऋषिकेश की सराहना की: केंद्रीय राज्य मंत्री

चिकित्सा पेशा सेवा का सर्वोच्च रूप है; बेहतर रोगी देखभाल के लिए नैतिकता,  आजीवन सीखने और संचार को बनाए रखें: श्रीमती अनुप्रिया पटेल

उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश की वार्षिक पत्रिका 'रुद्राक्ष' को जारी किया, जो संस्थान की उपलब्धियों और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है

प्रविष्टि तिथि: 23 APR 2026 5:46PM by PIB Delhi

अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह आज उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह समारोह संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने संस्थान की वार्षिक पत्रिका रुद्राक्ष को जारी किया, जिसमें पिछले वर्ष के दौरान एम्स ऋषिकेश की प्रमुख उपलब्धियों, नवाचारों और शैक्षणिक प्रगति का संकलन है। यह प्रकाशन चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आज एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने ग्रेजुएटिंग चिकित्सा पेशेवरों के लिए इस अवसर के महत्व को संक्रमण, चिंतन और जिम्मेदारी के क्षण के रूप में रेखांकित किया।

ग्रेजुएटिंग छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर वर्षों के अनुशासन, परिश्रम और त्याग का परिणाम है, साथ ही यह समाज और राष्ट्र के प्रति गहन पेशेवर प्रतिबद्धता की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से अपने करियर में उच्चतम नैतिक मानकों, करुणा और सेवा भावना को बनाए रखने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान प्रति भारत की प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की दृढ़ता और निर्णायक नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जिसके तहत 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित किया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवा में समानता और समावेश के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को बल मिला।

उपराष्ट्रपति ने महामारी के दौरान भारत की वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें वैक्सीन आउटरीच पहल 'वैक्सीन मैत्री' का जिक्र किया गया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों ने ‘वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दर्शाया और करुणा, एकजुटता एवं साझा वैश्विक प्रगति पर आधारित नेतृत्व का प्रदर्शन किया।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में एम्स संस्थानों के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण तृतीयक चिकित्सा देखभाल तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ये संस्थान नैदानिक ​​देखभाल, अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को एकीकृत करते हुए उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

उत्तराखंड की अनूठी भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में उभरने के लिए एम्स ऋषिकेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने टेलीमेडिसिन जैसे नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाकर पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा वितरण से आगे बढ़कर काम किया है, जिससे दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में सुधार हुआ है।

उन्होंने संस्थान की आपातकालीन हेलीकॉप्टर सेवाओं की भी सराहना की, जिसने दुर्गम इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को काफी मजबूत किया है। चार धाम यात्रा के दौरान आवश्यक दवाओं की आपूर्ति के लिए ड्रोन के उपयोग को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नवाचार के एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप उजागर किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हुई। उपराष्ट्रपति ने एनआईआरएफ रैंकिंग में देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में एम्स ऋषिकेश के लगातार स्थान बनाए रखने पर भी संतोष व्यक्त किया।

स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक विश्वास है और चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका न केवल नैदानिक ​​देखभाल में, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक सशक्त भारत के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनसे अपने पेशेवर जीवन में सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा भावना से प्रेरित रहने का आग्रह किया।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्नातक छात्रों को उनके समर्पण और चिकित्सा पेशे के प्रति प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी।

उन्होंने युवा डॉक्टरों के लिए चार प्रमुख सिद्धांतों पर जोर दिया। प्रथम उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशा मानवता की सेवा के उच्चतम रूपों में से एक है और इसके लिए अटूट समर्पण, नैतिक आचरण और रोगियों  के विश्वास को बनाए रखने के लिए ईमानदारी की आवश्यकता होती है। दूसरा, चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति को देखते हुए आजीवन सीखना और कौशल उन्यनन अत्यंत आवश्यक है। तीसरा, प्रभावी संचार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का आधार है और रोगी परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चौथा, उन्होंने समाज के प्रति जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता, शिक्षक और राष्ट्र के योगदान को ध्यान में रखते हुए सेवा के माध्यम से समाज को वापस देना चाहिए।

स्नातकों पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हाल ही में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और चिकित्सा शिक्षा में रिकॉर्ड विस्तार हुआ है, जिसका उद्देश्य 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को किफायती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अब 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिससे लोगों के जेब से होने वाला खर्च 62.5 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत तक हो गया है।

उन्होंने समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा पर सरकार के विशेष जोर को रेखांकित किया। एम्स ऋषिकेश के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान ने एक एकीकृत चिकित्सा मॉडल स्थापित किया है, जो व्यापक रोगी देखभाल के लिए पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को जोड़ता है। उन्होंने 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण पर भी बल दिया, जो समन्वित अंतर-क्षेत्रीय कार्रवाई के माध्यम से मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को जोड़ता है।

वैश्विक स्तर पर भारत के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने तपेदिक, मलेरिया और एचआईवी/एड्स जैसी प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने भारत के सफल कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर भी प्रकाश डाला, जिसके दौरान स्वदेशी रूप से विकसित टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें, जिनमें बूस्टर खुराकें भी शामिल हैं, दी गईं।

श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में एम्स ऋषिकेश की प्रभावशाली पहलों की सराहना की। उन्होंने टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवाएं, ड्रोन द्वारा चिकित्सा सहायता और उधम सिंह नगर में एक सैटेलाइट सेंटर के विकास जैसी प्रमुख सेवाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि इन प्रयासों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में इस अवसर को स्नातक छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन एक नए चरण की शुरुआत है, जहां वे अपने चुने हुए चिकित्सा पेशे के माध्यम से मानवता की सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करें, विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में, जहां स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान उन्नत चिकित्सा देखभाल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है और इस पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है।

समारोह के दौरान विभिन्न विषयों के ग्रेजुएटिंग छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और समर्पण को मान्यता देते हुए डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही, उपराष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को 11 पुरस्कार और स्वर्ण पदक प्रदान किए।

***

पीके/केसी/आईएम/केएस


(रिलीज़ आईडी: 2254988) आगंतुक पटल : 64
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu