नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
एनजीएचएम के तहत ग्रीन अमोनिया समझौते भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी
ग्रीन अमोनिया इकोसिस्टम का संचालन किसानों को लाभ पहुंचाएगा और 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूत करेगा: केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा
भारत ने उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया की ओर बदलाव की गति तेज की; घरेलू क्षमताओं और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को मिला बढ़ावा
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन ने बड़े पैमाने पर ग्रीन अमोनिया आवंटन के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 8:09PM by PIB Delhi
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज कहा कि ग्रीन अमोनिया खरीद समझौतों और ग्रीन अमोनिया आपूर्ति समझौतों का आदान-प्रदान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है यह विशेष रूप से ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाता है जब पूरी दुनिया अनिश्चितता का सामना कर रही है। वे अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' के तहत उर्वरक क्षेत्र के लिए ग्रीन अमोनिया समझौतों के आदान-प्रदान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा भी उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक विकास और जलवायु कार्रवाई एक साथ बड़े पैमाने पर और तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक है और 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने की राह पर है।

मंत्री ने कहा कि उद्योग, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) और उर्वरक कंपनियों के बीच 10 वर्ष की अवधि के लिए हुए समझौते इन परियोजनाओं को चालू करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ये दीर्घकालिक समझौते मांग की निश्चितता प्रदान करते हैं, वित्तीय समापन को संभव बनाते हैं, और हरित अमोनिया उत्पादन में बड़े पैमाने पर निवेश का समर्थन करते हैं।
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयातित 'ग्रे अमोनिया' को 'हरित अमोनिया' से बदलने से घरेलू क्षमता मज़बूत होगी और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं बनेंगी। इस पहल से उम्मीद है कि गैर-यूरिया आधारित उर्वरक इकाइयों में आयातित ग्रे अमोनिया को बदलने के माध्यम से, 10 वर्ष की अवधि में लगभग 2.5 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण उन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा जिनमें उत्सर्जन कम करना कठिन होता है—जैसे उर्वरक, रिफाइनरी, इस्पात और परिवहन। इन क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न (डेरिवेटिव्स) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हरित अमोनिया न केवल स्वच्छ फीडस्टॉक के रूप में काम करेगा, बल्कि नया औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, रोज़गार सर्जन और निवेश आकर्षित करने में भी सहायता करेगा।
उर्वरक क्षेत्र को बड़े पैमाने पर आवंटन
केंद्रीय मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने इस पहल को देश में मज़बूत हरित अमोनिया पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये समझौते भारत में हरित अमोनिया के परिचालन की शुरुआत का प्रतीक हैं, और उर्वरक क्षेत्र में टिकाऊ तथा किफायती समाधानों को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

श्री जे. पी. नड्डा ने भारत के विकास मॉडल पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश ने यह साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास और स्थिरता साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस पहल से आयात पर निर्भरता कम होगी, चीज़ें ज़्यादा किफ़ायती होंगी, और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मज़बूत होगी, जिससे किसानों को किसी बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रति वर्ष लगभग 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया के आवंटन के साथ, देश 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में मज़बूती से आगे बढ़ रहा है, और साथ ही इस क्षेत्र में विकास और निवेश के नए अवसर भी उपलब्ध करा रहा है।
केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक, उर्वरक विभाग के सचिव श्री रजत कुमार मिश्रा, और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी भी उर्वरक विभाग, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और एसईसीआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
पृष्ठभूमि
भारत सरकार 'राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' को ₹19,744 करोड़ के बजट के साथ लागू कर रही है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, इस्तेमाल और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र के तौर पर स्थापित करना है। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। इसके साथ ही, इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कार्बन-मुक्त बनाना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और निवेश को आकर्षित करना भी है।
इस मिशन के तहत, 'ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांज़िशन के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप' (एसआईजीएचटी) कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देना और पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली के ज़रिए लागत के मामले में इसे प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसी संदर्भ में, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने देश भर में उर्वरक इकाइयों को ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आयोजित की है।
बोली प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ग्रीन अमोनिया की प्रतिस्पर्धी कीमतें सामने आई हैं। इसमें सबसे कम कीमत लगभग ₹49.75 प्रति किलोग्राम रही, जबकि कुल कीमतों की सीमा लगभग ₹49.75 से ₹64.74 प्रति किलोग्राम के बीच रही। इसकी तुलना में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें लगभग 1000 यूरो प्रति टन (लगभग ₹110 प्रति किलोग्राम) बताई गई हैं। इससे यह पता चलता है कि भारत में तय की गई कीमतें वैश्विक मानकों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी हैं।
इस प्रक्रिया के माध्यम से, भारतीय सौर ऊर्जा निगम ने चुने हुए डेवलपर्स को लगभग 7,24,000 टन प्रति वर्ष (टीपीए) की कुल क्षमता आवंटित की है। इसकी आपूर्ति पूरे देश में फैली 13 उर्वरक इकाइयों से जुड़ी हुई है। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया ने पारदर्शिता, कुशल मूल्य निर्धारण और दीर्घकालिक मांग की गारंटी सुनिश्चित की है, जिससे ग्रीन अमोनिया उत्पादन में विस्तार और निवेश संभव हो पाया है।
निम्नलिखित कंपनियों ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए:
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क्र.सं.
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उर्वरक कंपनी का नाम
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विनिर्माण इकाई
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ग्रीन अमोनिया की मात्रा (MT प्रति वर्ष)
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डेवलपर / विजेता
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निर्धारित मूल्य (Rs/kg)
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1.
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इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको)
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कांडला (गुजरात)
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1,00,000
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एसीएमई क्लीनटेक
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54.73
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पारादीप (ओडिशा)
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1,00,000
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एसीएमई क्लीनटेक
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49.75
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2.
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कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (सीआईएल)
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काकीनाडा (आंध्र प्रदेश)
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85,000
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जैकसन ग्रीन एंड ओसीआईओआर
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50.75
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विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
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50,000
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एसीएमई क्लीनटेक
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51.89
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3.
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पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड (पीपीएल)
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पारादीप (ओडिशा)
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75,000
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एसीएमई क्लीनटेक
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55.75
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ज़ुरीनगर (गोवा)
|
25,000
|
एसीएमई क्लीनटेक
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62.84
|
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पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड (पीपीएल)
|
मैंगलोर
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15,000
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एससीसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि.
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57.65
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4.
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ओस्तवाल
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कृष्णा फॉसकेम लिमिटेड, मेघनगर (मध्य प्रदेश)
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70,000
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एनटीपीसी नवीकरणीय ऊर्जा
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51.80
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मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड-II, सागर (मध्य प्रदेश)
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60,000
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ओरियाना पावर लिमिटेड
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52.25
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मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड-III, धुले (महाराष्ट्र)
|
70,000
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एससीसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
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53.05
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5.
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इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (आईआईपीएल)
|
हल्दिया (पश्चिम बंगाल)
|
20,000
|
एसीएमई क्लीनटेक
|
64.74
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पीके/केसी/पीके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2247113)
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