सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने वार्षिक प्रकाशन “ऊर्जा सांख्यिकी भारत 2026” जारी किया
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 1:46PM by PIB Delhi
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने वार्षिक प्रकाशन “ऊर्जा सांख्यिकी भारत 2026” जारी कर दिया है। यह प्रकाशन मंत्रालय की वेबसाइट www.mospi.gov.in पर उपलब्ध है।
2. इस प्रकाशन में भारत की सभी ऊर्जा वस्तुओं (जैसे कोयला, लिग्नाइट, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नवीकरणीय ऊर्जा आदि) से संबंधित भंडार, क्षमता, उत्पादन, खपत और आयात/निर्यात से जुड़ी विविध प्रमुख जानकारियों का एकीकृत डेटासेट सम्मिलित है। इसमें विभिन्न तालिकाएं (जैसे ऊर्जा संतुलन), आरेख (जैसे सैंकी आरेख) और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सतत ऊर्जा संकेतक भी शामिल हैं।
प्रकाशन में सुधार :
3. इस प्रकाशन के 33 वें संस्करण में घरेलू ऊर्जा क्षेत्रों को ऋण प्रवाह, विश्व ऊर्जा सांख्यिकी आदि पहलुओं को शामिल करते हुए कवरेज का विस्तार किया गया। साथ ही प्रमुख डेटा कमियों को प्रभावी रूप से संबोधित किया गया है, जैसे - ई-नीलामी के माध्यम से घरेलू कोयले की खपत , आयातित गैर-कोकिंग कोयले, उद्योग के अंतर्गत उप-क्षेत्रवार विद्युत खपत पैटर्न -जिन्हें वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) डेटाबेस से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पहली बार ऊर्जा की घरेलू आपूर्ति/खपत में खुदरा/पुनर्विक्रेता के माध्यम से हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) का उद्योग-वार वितरण तथा अंतर्राष्ट्रीय विमानन एवं समुद्री बंकर डेटा को भी शामिल किया गया है।
4. इस प्रकाशन में सभी ऊर्जा वस्तुओं के क्षेत्रवार अंतिम-उपयोग खपत सांख्यिकी के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए अंतिम-उपयोग क्षेत्रों का मानकीकरण किया गया है।
मुख्य विशेषताएं
5. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टीपीईएस) में 2.95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में अच्छे विस्तार को दर्शाती है। ये 9,32,816 किलो टन तेल समतुल्य (केटीओई) पर पहुंच गयी।

- भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की अपार क्षमता है, जो 31 मार्च 2025 तक 47,04,043 मेगावाट थी। कुल क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक (लगभग 71 प्रतिशत) है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 748,990 मेगावाट से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 33,43,378 मेगावाट हो गई है। इसके बाद पवन ऊर्जा (11,63,856 मेगावाट) और जलविद्युत परियोजनाएं (1,33,410 मेगावाट) आती हैं। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की कुल क्षमता का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा छह राज्यों - राजस्थान (23.70 प्रतिशत), महाराष्ट्र (14.26 प्रतिशत), गुजरात (9.10 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (9.1 प्रतिशत), कर्नाटक (8.59 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश (8.09 प्रतिशत ) - में केंद्रित है।
- नवीकरणीय संसाधनों से विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता दोनों सहित) में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह 31 मार्च 2016 को 90,134 मेगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2025 को 2,29,346 मेगावाट हो गई है, जो इन वर्षों में 10.93 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाती है।
- नवीकरणीय संसाधनों से सकल विद्युत उत्पादन (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता दोनों मिलाकर) भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2015-16 में उत्पादित 1,89,314 गीगावॉट-घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 4,16,823 गीगावॉट घंटे हो गया है, जो 9.17 प्रतिशत की सीएजीआर को दर्शाता है।

- प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग वित्त वर्ष 2015-16 में 15,296 मेगा जूल प्रित व्यक्ति से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 18,096 मेगा जूल प्रति व्यक्ति हो गया है, जो 1.89 प्रतिशत की सीएजीआर दर्शाता है।

- पारेषण और वितरण हानियों में कमी के कारण विद्युत के उपयोग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पारेषण और वितरण हानि जो वित्त वर्ष 2015-16 लगभग 22 प्रतिशत थी, वह वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर लगभग 17 प्रतिशत रह गई है।
- सभी प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति स्रोतों में कोयला अब भी प्रमुख स्रोत बना हुआ है और कुल ऊर्जा आपूर्ति में इसका सर्वाधिक योगदान है। कोयले (लिग्नाइट सहित) से ऊर्जा आपूर्ति वित्त वर्ष 2015-16 में 3,87,761 केटीओई से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 5,52,315 केटीओई हो गई है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस आदि अन्य स्रोतों में भी इस अवधि के दौरान निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
- विभिन्न अंतिम-उपयोग क्षेत्रों में कुल अंतिम ऊर्जा खपत (टीएफसी) में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। ये वित्त वर्ष 2015-16 में 4,69,212 केटीओई से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 608,578 केटीओई हो गई, जो 30.41 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है।
- देश में ऊर्जा क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण प्रवाह में भी निरंतर वृद्धि देखी गई है। ये वर्ष 2021 में 1,688 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025 में 10,325 करोड़ रुपये हो गया है, जो इस अवधि में छह गुने से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
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पीके/केसी/आईएम/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2246906)
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