कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) पर खरीद

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 5:56PM by PIB Delhi

सरकार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुरोध पर, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान(पीएम-आशा) के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना(पीएसएस) लागू करती है। इस योजना के तहत, निर्धारित अवधि में तथा जब भी इन वस्तुओं के बाजार मूल्य, अधिकतम कटाई अवधि(पीक हार्वेस्टिंग पीरियड) के दौरान घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) से नीचे चले जाते हैं, तब पूर्व-पंजीकृत किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करने के लिए अधिसूचित दलहन, तिलहन और कोपरा की निर्धारित उचित औसत गुणवत्ता(एफएक्यू) की खरीद केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से एमएसपी पर की जाती है।

घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से, वित्त वर्ष 2030-31 तक पहले से पंजीकृत किसानों से अरहर(तूअर), उड़द और मसूर की उतनी ही खरीद की जाएगी, जितनी वे बेचने के लिए पेश करेंगे।

इसके अलावा, मूल्य अंतर भुगतान योजना(पीडीपीएस) घटक के अंतर्गत, अधिसूचित बाजार यार्ड में निर्धारित अवधि के भीतर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित एफएक्यू मानकों वाले तिलहन बेचने वाले पूर्व-पंजीकृत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) और बिक्री/मॉडल मूल्य के बीच के अंतर का प्रत्यक्ष भुगतान किया जाता है। इस योजना में किसी प्रकार की भौतिक खरीद शामिल नहीं होता है।

सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) की घोषणा तथा केंद्रीय नोडल एजेंसियों(सीएनए) द्वारा एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे बाजार मूल्य में सुधार होता है और वह एमएसपी के बराबर या उससे अधिक भी हो सकता है। खरीद प्रक्रिया में भाग लेने वाले किसानों के साथ-साथ खुले बाजार में अपनी उपज बेचने वाले किसान भी एमएसपी की घोषणा से लाभान्वित होते हैं। किसान अपनी विक्रय योग्य अधिशेष के आधार पर एमएसपी पर बिक्री के लिए उपज की मात्रा तय करते हैं। इसके अलावा, यदि उन्हें एमएसपी से अधिक मूल्य प्राप्त होता है, तो वे अपनी उपज कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

पीएम-आशा पूरे देश में लागू किया गया है। पीएम-आशा के पीएसएस के तहत शामिल फसलें अधिसूचित तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, नाइजर सीड, रेपसीड/सरसों, कुसुम), दालें (अरहर, मूंग, उड़द, चना और मसूर) और कोपरा (बॉल और मिलिंग) हैं। 

उपरोक्त के अलावा, पीएम-आशा के अंतर्गत बाजार हस्तक्षेप योजना(एमआईएस) घटक उन कृषि एवं बागवानी उत्पादों को कवर करता है, जो एमएसपी खरीद के अंतर्गत शामिल नहीं हैं और जिनकी प्रकृति शीघ्र खराब होने वाली होती है।

मूल्य समर्थन योजना(पीएसएस) लागू करने के कारण, जब बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे चला जाता है, तब किसानों को अधिकतम आवक अवधि के दौरान अपनी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त होता है और उन्हें मजबूरी में कम दाम पर बिक्री करने से बचाया जाता है।

किसानों को शोषण से बचाने के लिए मूल्य समर्थन योजना(पीएसएस) के अंतर्गत पर्याप्त संख्या में खरीद केंद्र खोले जाते हैं। राज्य सरकार, केंद्रीय नोडल एजेंसियां तथा राज्य एजेंसियां एफएक्यू गुणवत्ता मानकों, खरीद तिथियों और खरीद केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है, ताकि किसान अपनी उपज बेचने के लिए इन खरीद केंद्रों पर ला सकें। एमएसपी का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाता है।

एमआईएस किसानों को कृषि और बागवानी की उन चीज़ों के लिए लाभकारी मूल्य प्रदान करता है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) व्यवस्था के अंतर्गत शामिल नहीं हैं। इस योजना का उद्देश्य अधिक उत्पादन की स्थिति में, विशेषकर अधिकतम आवक अवधि के दौरान, जब कीमतें उत्पादन लागत से नीचे चली जाती हैं, तब किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बिक्री से बचाना है। यह योजना संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार के अनुरोध पर लागू की जाती है, बशर्ते कि वह इसके क्रियान्वयन में होने वाले संभावित नुकसान का 50% (पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में 25%) वहन करने के लिए तैयार हो।

पीडीपीएस के नए घटकों के अंतर्गत, एपीएमसी मंडियों में व्यापार की जाने वाली फसलों के लिए किसानों को बाजार हस्तक्षेप मूल्य(एमआईपी) और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर का प्रत्यक्ष भुगतान करने का विकल्प जोड़ा गया है। इसके अलावा, TOP फसलों (टमाटर, प्याज और आलू) के परिवहन और भंडारण की लागत की भरपाई केंद्रीय नोडल एजेंसियों और राज्य द्वारा नामित एजेंसियों को करने की अनुमति दी गई है, ताकि वे इन फसलों को उत्पादक राज्यों से उपभोक्ता राज्यों तक पहुंचा सकें और उनका भंडारण कर सकें।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 सीजन से मूल्य समर्थन योजना(पीएसएस) के तहत खरीद केंद्रों पर किसानों से उनकी उपज खरीदने से पहले, असली किसानों की पहचान सुनिश्चित करने हेतु आधार-सक्षम पीओएस मशीन के माध्यम से किसान के बायोमेट्रिक का उपयोग करना या मोबाइल ऐप के माध्यम से चेहरे की पहचान करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, केंद्रीय नोडल एजेंसियों को यह भी अनुमति दी गई है कि वे दलहन(अरहर, मसूर, उड़द और चना) की खरीद सीधे पहले से पंजीकृत किसानों से अपने खरीद केंद्रों के माध्यम से कर सकें।

कृषि अवसंरचना कोष(एआईएफ) योजना के अंतर्गत कृषि अवसंरचना के विकास के लिए फार्म-गेट तथा समेकन स्तर पर मध्यम से दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण को प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सके, कटाई के बाद हानियों को कम किया जा सके और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सके। एआईएफ के तहत, ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% प्रतिवर्ष ब्याज अनुदान प्रदान किया जाता है। साथ ही, पात्र उधारकर्ताओं को ₹2 करोड़ तक के ऋण पर सीजीटीएमएसई के अंतर्गत क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध है, जिसमें गारंटी शुल्क का वहन सरकार द्वारा किया जाता है। दिनांक 13.03.2026 तक, इस योजना के अंतर्गत 1,71,267 परियोजनाओं के लिए कुल 84,681 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में अनुमानित 1,34,319 करोड़ का निवेश जुटाया गया है।

सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार(ई-एनएएम) की शुरुआत की है, जो एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है और देशभर की कृषि उपज मंडी समिति(एपीएमसी) मंडियों को एकीकृत करता है, ताकि कीमतों का निर्धारण पारदर्शी तरीके से हो सके और बाज़ार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो। अब तक, 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है और इसके माध्यम से ₹4.82 लाख करोड़ का व्यापार हुआ है।

सरकार किसानों की सामूहिक विपणन क्षमता को मजबूत करने और उनकी सौदेबाजी शक्ति बढ़ाने के लिए 10,000 एफपीओ के गठन एवं संवर्धन की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत किसान उत्पादक संगठन(एफपीओ) को बढ़ावा दे रही है। अब तक, 5,048 एफपीओ को ई-एनएएम पर पंजीकृत किया जा चुका है और 6,070 एफपीओ को ऑनलाइन विपणन के लिए ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) पर जोड़ा गया है।

कृषि विपणन अवसंरचना(एएमआई) के माध्यम से गोदामों/वेयरहाउसों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत, शुरुआत से लेकर जनवरी 2026 तक कुल 49,796 वेयरहाउस स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 982.94 लाख मीट्रिक टन है। इसके अतिरिक्त, भंडारण के अलावा 25,009 अन्य कृषि विपणन अवसंरचना परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं।

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/पीकेपी


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