रेल मंत्रालय
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत पिछले 3 वर्षों में 300 रेलवे परियोजनाएं स्वीकृत, जिससे 13,808 किलोमीटर का क्षेत्र कवर (51 नई लाइनें, 17 गेज कन्वर्जन, 232 दोहरीकरण)
सीमावर्ती क्षेत्रों, छोटे कस्बों और बंदरगाहों तक विस्तृत ये परियोजनाएं क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी, साथ ही कनेक्टिविटी, रोजगार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेंगी
अधिक वित्तपोषण, निर्णय लेने की स्वायत्तता और राज्य सरकारों के साथ निरंतर समन्वय के चलते परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अभूतपूर्व तेजी आई है
प्रविष्टि तिथि:
27 MAR 2026 6:55PM by PIB Delhi
परिवहन क्षेत्र से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की योजना और उन्हें लागू करने में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के उद्देश्य से अक्टूबर, 2021 में प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) का शुभारंभ किया गया था। संपूर्ण देश में विस्तृत इस मास्टर प्लान ने संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और विभागों के बीच सहयोग के माध्यम से रेलवे, शिपिंग, सड़क मार्ग, दूरसंचार और पाइपलाइन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के बीच एक सकारात्मक तालमेल स्थापित किया है। इससे न केवल परियोजनाओं की योजना बनाने की गति तेज हुई है, बल्कि परियोजना पूर्ण करने के लिए आवश्यक मंजूरियों/स्वीकृतियों की प्रक्रिया में भी अभूतपूर्व तेजी आई है।
भारतीय रेलवे ने अपनी प्रोजेक्ट प्लानिंग प्रक्रिया में गति शक्ति के सिद्धांतों को तत्काल आत्मसात किया है, जिससे परियोजनाओं के मूल्यांकन, स्वीकृति और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। BISAG-N द्वारा विकसित पीएम गति शक्ति संस्थागत तंत्र के माध्यम से जमीनी सर्वेक्षण, रूट अलाइनमेंट और वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का निर्धारण किया जा रहा है। इसके साथ ही बंदरगाहों, खदानों और कोयला क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का कार्य भी इसी तंत्र के माध्यम से संपन्न हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और परियोजना लागत में कमी आई है।
अब सभी नई लाइनों, गेज कन्वर्जन और दोहरीकरण परियोजनाओं का सर्वेक्षण BISAG-N द्वारा विकसित पीएम गति शक्ति संस्थागत तंत्र के अंतर्गत किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे का विकास करना है। इस पहल के माध्यम से एकीकृत योजना, बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता और फर्स्ट एवं लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, इसका लक्ष्य क्षमता में वृद्धि करना और लोगों एवं वस्तुओं जैसे—कृषि उत्पादों, उर्वरकों, कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट और चूना पत्थर आदि के निर्बाध आवागमन के बीच आने वाली बाधाओं को दूर करना है।
पिछले तीन वर्षों, यानी वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत भारतीय रेलवे में कुल 13,808 किलोमीटर लंबाई की 300 परियोजनाओं (51 नई लाइनें, 17 गेज कन्वर्जन और 232 दोहरीकरण) को मंजूरी प्रदान की गई है।
प्रमुख स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण निम्नानुसार है:
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क्र.सं.
|
परियोजना का नाम
|
लागत (₹ करोड़ में)
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1
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चोपन - चुनार दोहरीकरण (102 किमी)
|
1,553
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2
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गुंटूर - बीबीनगर दोहरीकरण (239 किमी)
|
3,238
|
|
3
|
मुदखेड़ - मेडचल और महबूबनगर - डोन दोहरीकरण (418 किमी)
|
5,655
|
|
4
|
समाखियाली - गांधीधाम फोर-लाइनिंग (53 किमी)
|
1,571
|
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5
|
मेड़ता सिटी - रास और मेड़ता रोड पर बाईपास नई लाइन (56 किमी)
|
1,038
|
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6
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लुमडिंग - फुरकेटिंग दोहरीकरण (140 किमी)
|
2,334
|
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7
|
अजमेर - चंदेरिया दोहरीकरण (178 किमी)
|
1,813
|
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8
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मोटुमरि - विष्णुपूरम (RoR के साथ) दोहरीकरण (100 किमी)
|
1,746
|
|
9
|
विक्रमशिला - कटारिया नई लाइन (गंगा नदी पर नए पुल के साथ) (26 किमी)
|
2,549
|
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10
|
गुनुपुर - थेरुबली नई लाइन (74 किमी)
|
1,326
|
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11
|
मलकनगिरी - पांडुरंगापुरम नई लाइन (174 किमी)
|
4,109
|
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12
|
बादामपहाड़ - केंदुझारगढ़ नई लाइन (82 किमी)
|
2,106
|
|
13
|
जूनागढ़ - नबरंगपुर नई लाइन (116 किमी)
|
3,274
|
|
14
|
बुरामारा - चाकुलिया नई लाइन (60 किमी)
|
1,639
|
|
15
|
जालना - जलगाँव नई लाइन (174 किमी)
|
7,105
|
|
16
|
बंग्रिपोसी - गोरुमहिसानी नई लाइन (86 किमी)
|
2,549
|
|
17
|
चांडिल - अनारा - दामोदर तीसरी लाइन (121 किमी)
|
2,170
|
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18
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बरगढ़ रोड - नवापाड़ा रोड नई लाइन (138 किमी)
|
2,926
|
|
19
|
सरडेगा - भालुमुड़ा नई डबल लाइन (37 किमी)
|
1,360
|
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20
|
वाराणसी - पं. दीनदयाल उपाध्याय मल्टीट्रैकिंग (गंगा नदी पर रेल-सह-सड़क पुल के साथ) (15 किमी)
|
2,642
|
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21
|
जलगाँव - मनमाड चौथी लाइन (160 किमी)
|
2,773
|
|
22
|
भुसावल - खंडवा तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी)
|
3,514
|
|
23
|
संबलपुर - जरापदा तीसरी और चौथी लाइन (127 किमी)
|
3,916
|
|
24
|
झारसुगुड़ा - सासन तीसरी और चौथी लाइन (35 किमी)
|
1,181
|
|
25
|
गोंदिया - बल्लारशाह दोहरीकरण (240 किमी)
|
4,819
|
|
26
|
खरसिया - नया रायपुर - परमलकसा 5वीं और 6वीं लाइन (278 किमी)
|
8,741
|
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27
|
वर्धा - बल्लारशाह फोर-लाइनिंग (135 किमी)
|
2,381
|
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28
|
बल्लारी - चिकजाजुर दोहरीकरण (185 किमी)
|
3,342
|
|
29
|
कोडरमा - बरकाकाना दोहरीकरण (133 किमी)
|
3,063
|
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30
|
इटारसी - नागपुर चौथी लाइन (297 किमी)
|
5,451
|
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31
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डांगोआपोसी - जरोली तीसरी और चौथी लाइन (43 किमी)
|
1,752
|
|
32
|
सिकंदराबाद - वाडी तीसरी और चौथी लाइन (173 किमी)
|
5,012
|
|
33
|
फुरकेटिंग - न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण (194 किमी)
|
3,634
|
|
34
|
बख्तियारपुर - राजगीर - तिलैया दोहरीकरण (104 किमी)
|
2,192
|
|
35
|
गोंदिया - डोंगरगढ़ चौथी लाइन (84 किमी)
|
2,223
|
|
36
|
वर्धा - भुसावल तीसरी और चौथी लाइन (314 किमी)
|
9,197
|
|
37
|
होसापेट - बल्लारी फोर-लाइनिंग (65 किमी)
|
2,372
|
|
38
|
कसारा - मनमाड तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी)
|
10,154
|
|
39
|
पुनरख - किऊल तीसरी और चौथी लाइन (50 किमी)
|
2,668
|
|
40
|
गम्हरिया - चांडिल तीसरी और चौथी लाइन (55 किमी)
|
1,168
|
|
41
|
सैंथिया - पाकुर चौथी लाइन (81 किमी)
|
1,569
|
|
42
|
संतरागाछी - खड़गपुर चौथी लाइन (111 किमी)
|
2,905
|
|
43
|
नर्गुंडी - बारंग और खुर्दा रोड - विशाखापत्तनम तीसरी लाइन (385 किमी)
|
5,618
|
|
44
|
सोन नगर - अंडाल तीसरी और चौथी लाइन (375 किमी)
|
13,606
|
|
45
|
गोरखपुर कैंट - वाल्मीकि नगर दोहरीकरण (96 किमी)
|
1,270
|
|
46
|
जयपुर - सवाई माधोपुर दोहरीकरण (131 किमी)
|
1,269
|
|
47
|
लूनी - समदड़ी - भीलड़ी दोहरीकरण (272 किमी)
|
3,531
|
|
48
|
नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा और सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर दोहरीकरण (256 किमी)
|
4,553
|
|
49
|
प्रयागराज (इरादतगंज) - मानिकपुर तीसरी लाइन (84 किमी)
|
1,640
|
|
50
|
तिरुपति - पाकला - काटपाडी दोहरीकरण (104 किमी)
|
1,332
|
|
51
|
रतलाम - नागदा तीसरी और चौथी लाइन (41 किमी)
|
1,018
|
|
52
|
अलुआबारी रोड - न्यू जलपाईगुड़ी तीसरी और चौथी लाइन (57 किमी)
|
1,786
|
|
53
|
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) - परभणी (177 किमी)
|
2,179
|
|
54
|
भागलपुर - दुमका - रामपुरहाट दोहरीकरण (177 किमी)
|
3,169
|
|
55
|
इटारसी - बीना चौथी लाइन (237 किमी)
|
4,329
|
|
56
|
वडोदरा - रतलाम तीसरी और चौथी लाइन (259 किमी)
|
8,885
|
|
57
|
देवभूमि द्वारका (ओखा) - कनालूस दोहरीकरण (141 किमी)
|
1,457
|
|
58
|
बदलापुर - कर्जत तीसरी और चौथी लाइन (32 किमी)
|
1,324
|
|
59
|
दिल्ली - अंबाला कैंट तीसरी और चौथी लाइन (194 किमी)
|
5,983
|
|
60
|
गोंदिया - जबलपुर दोहरीकरण (231 किमी)
|
5,236
|
|
61
|
मनमाड - इंदौर नई लाइन (360 किमी)
|
18,529
|
|
62
|
एरुपेलेम - अमरावती - नम्बूर नई लाइन (57 किमी)
|
2,245
|
|
63
|
वधावन पोर्ट और नए पालघर स्टेशन के बीच नई दोहरी लाइन (22 किमी)
|
1,507
|
|
64
|
देशलपर - हाजीपीर - लूना और वायोर - लखपत नई लाइन (145 किमी)
|
2,526
|
हाल ही में पूरी हुई कुछ प्रमुख परियोजनाएँ इस प्रकार हैं:
|
क्र. सं.
|
परियोजना का नाम
|
लंबाई (किमी में)
|
|
1
|
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला नई लाइन
|
272
|
|
2
|
भैराबी - सैरांग नई लाइन
|
51
|
|
3
|
देवबंद - रुड़की नई लाइन
|
27
|
|
4
|
चुरू - रतनगढ़ दोहरीकरण
|
43
|
|
5
|
टोरी-शिवपुर तीसरी लाइन
|
44
|
|
6
|
अररिया - गलगलिया नई लाइन
|
110
|
|
7
|
हिम्मतनगर - खेड़ब्रह्मा गेज परिवर्तन
|
55
|
|
8
|
बहराइच-नानपारा-नेपालगंज गेज परिवर्तन
|
56
|
|
9
|
डोमिनगढ़-गोरखपुर-कुसुमी तीसरी लाइन और गोरखपुर-नकहा दोहरीकरण
|
21
|
|
10
|
विजापुर - अंबलियासन गेज परिवर्तन
|
43
|
|
11
|
पुणे-मिरज-लोंडा दोहरीकरण
|
467
|
|
12
|
मनमाड - जलगाँव तीसरी लाइन
|
160
|
|
13
|
फेफना-इंडारा-मऊ-शाहगंज दोहरीकरण
|
150
|
|
14
|
अदराज-मोती-विजापुर गेज परिवर्तन
|
40
|
|
15
|
कटनी - बीना तीसरी लाइन
|
279
|
|
16
|
गांधीधाम - आदिपुर - चार लाइनों वाली परियोजना
|
21
|
|
17
|
खातुवास - नारनौल दोहरीकरण
|
24
|
|
18
|
पेनुकोंडा - धर्मावरम दोहरीकरण
|
42
|
पिछले तीन वर्षों, यानी वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत भारतीय रेलवे में कुल 67,010 किलोमीटर लंबाई के 982 सर्वेक्षणों (295 नई लाइन, 13 गेज कन्वर्जन और 674 दोहरीकरण) को मंजूरी प्रदान की गई है।
किसी भी रेलवे परियोजना की स्वीकृति कई मानकों/कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- प्रस्तावित मार्ग का अनुमानित यातायात और लाभप्रदता
- परियोजना द्वारा प्रदान की जाने वाली फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी
- मिसिंग लिंक्स को जोड़ना और अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराना
- भीड़भाड़ वाली या पूरी क्षमता वाली लाइनों की क्षमता में वृद्धि करना
- राज्य सरकारों/केंद्रीय मंत्रालयों/जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगें
- रेलवे की अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताएं
- सामाजिक-आर्थिक विचार
- निधियों की समग्र उपलब्धता
रेल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं किसी भी क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं, जैसे:
- देश के अन्य हिस्सों के साथ क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी
- वस्तुओं और सेवाओं की तीव्र आवाजाही
- लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और परिवहन लागत में कमी
- लाइन क्षमता में वृद्धि
- क्षेत्र के लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों में वृद्धि
- परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी
- पर्यटन उद्योग का विकास और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि
रेलवे परियोजनाओं का पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण
- वन विभाग से मंजूरी
- मार्ग में आने वाली बाधाएं की शिफ्टिंग
- विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरियाँ
- क्षेत्र की भूगर्भीय और भौगोलिक स्थितियाँ
- परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति।
- किसी विशेष परियोजना स्थल के लिए एक वर्ष में कार्य करने योग्य महीनों की संख्या
ये सभी कारक परियोजनाओं के पूरा होने के समय और उसकी लागत को प्रभावित करते हैं।
रेल परियोजनाओं के प्रभावी और त्वरित कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बजट और फंड के आवंटन में भारी वृद्धि।
- फील्ड लेवल पर अधिकारियों को शक्तियों का हस्तांतरण/प्रत्यायोजन।
- विभिन्न स्तरों पर परियोजना की प्रगति की गहन निगरानी।
- भूमि अधिग्रहण, वन और वन्यजीव क्लीयरेंस में तेजी लाने और अन्य बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय।
यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रीय मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई।
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पीके/केसी/डीवी/ डीए
(रिलीज़ आईडी: 2246313)
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