विधि एवं न्याय मंत्रालय
दिशा योजना के अंतर्गत टेली-लॉ कार्यक्रम पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन कुरुक्षेत्र हरियाणा में किया गया
केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने देश भर में समावेशी न्याय वितरण को आगे बढ़ाने के लिए न्याय तक पहुंच को मजबूत करने में टेली-लॉ और प्रो बोनो कानूनी सेवाओं के महत्व का उल्लेख किया
टेली-लॉ, न्याय बंधु और कानूनी साक्षरता पहल देश भर में समावेशी न्याय वितरण को बढ़ावा दे रही हैं
घर-घर न्याय पहुंचाना ही एक सशक्त लोकतंत्र की सच्ची पहचान है और टेली-लॉ और न्याय बंधु जैसी पहलें इस सपने को हर नागरिक के लिए साकार कर रही हैं
प्रविष्टि तिथि:
22 MAR 2026 8:10PM by PIB Delhi
केंद्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना (दिशा) योजना के अंतर्गत टेली-लॉ कार्यक्रम गतिविधियों पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला आज यानी 22.03.2026 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सभागार, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित की गई।
कार्यशाला प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और अंतिम छोर तक न्याय वितरण में शामिल संस्थानों के साथ हितधारकों के जुड़ाव को बढ़ाने के लिए विभाग के निरंतर प्रयासों का हिस्सा थी। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका के सदस्यों, सरकारी अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के प्रतिनिधियों, लॉ स्कूलों, छात्रों, फील्ड पदाधिकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने एक साथ लाया।
इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश, केन्द्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा सरकार के मंत्री श्री राव नरबीर सिंह के साथ-साथ न्याय विभाग और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और माननीय केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिशा जागरूकता वैन को रवाना किया। यह इस पहल के अंतर्गत जागरूकता और पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समारोह समुदायों को शामिल करने, महत्वपूर्ण जानकारी का प्रसार करने और सार्वजनिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए एक समर्पित प्रयास की शुरुआत का प्रतीक था।
कार्यक्रम का शुभारंभ औपचारिक दीपक प्रज्वलित करने के साथ हुआ, जो ज्ञान और न्याय की विजय का प्रतीक है।
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक प्रदर्शन किया। इन्होंने देशभक्ति के इस कालातीत प्रतीक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।
केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने सभा को संबोधित करते हुए न्याय को अधिक सुलभ, किफायती और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टेली-लॉ, न्याय बंधु और कानूनी साक्षरता कार्यक्रम जैसी पहलें न्याय वितरण तंत्र को मजबूत करने और नागरिकों को जागरूकता और समय पर कानूनी सलाह के माध्यम से सशक्त बनाने के सरकारी प्रयासों का अभिन्न अंग हैं। ये पहलें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जागरूकता का विस्तार करने के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इससे अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।। निशुल्क सेवा के महत्व पर उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष ऐतिहासिक अलीपुर द्वार मामले में चितरंजन दास और श्री अरविंद घोष की प्रेरक विरासत का उल्लेख किया, जहां सी.आर. दास निस्वार्थ भाव से श्री अरविंद घोष का बचाव करने के लिए पेश हुए और न्याय के लिए जोरदार तर्क दिया, जिससे उन्हें बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि न्याय बंधु पहल के माध्यम से सेवा की यह भावना जारी है और नि:शुल्क अधिवक्ताओं को न्याय के संरक्षक की भूमिका निभाने वाला बताया। उन्होंने न्याय तक पहुंच को और मजबूत करने के लिए हरियाणा में नि:शुल्क वकीलों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया। मंत्री महोदय ने ग्राम स्तर के उद्यमियों (वीएलई), छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के साथ भी बातचीत की, जमीनी स्तर पर कानूनी सेवाओं के विस्तार में उनके योगदान की सराहना की और सभी को न्याय बंधु में शामिल होने और यह सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया कि न्याय का उद्देश्य बना रहे।
न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए देश के संविधान के अनुच्छेद 39ए के अंतर्गत समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता के संवैधानिक दृष्टिकोण का उल्लेख किया और दिशा ढांचे की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। दिशा ढांचे में टेली-लॉ (वहाँ तक पहुँचना), न्याय बंधु (निःशुल्क कानूनी सेवाएं) और कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम जैसी पहलें शामिल हैं। इनका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में, कानूनी सहायता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जागरूकता सशक्तिकरण की दिशा में पहला कदम है और दिशा जैसी योजनाओं से न्याय वितरण को और मजबूत किया जा सकता है। सचिव (न्याय) ने टेली-लॉ जैसे प्रौद्योगिकी-आधारित प्लेटफार्मों का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया, ताकि किफायती और समय पर कानूनी सहायता सुनिश्चित की जा सके, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर नागरिकों के लिए। न्याय बंधु कार्यक्रम और कानूनी साक्षरता पहलों की भूमिका पर उन्होंने एक समावेशी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो, प्रत्येक नागरिक को जागरूकता, समर्थन और इस विश्वास के साथ सशक्त बनाया जाए कि कानूनी व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।
कार्यक्रम के दौरान हरियाणा में दिशा योजना की प्रगति पर एक प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), टेली-लॉ मोबाइल एप्लिकेशन और टोल-फ्री हेल्पलाइन 14454 के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से मुकदमेबाजी से पहले कानूनी सलाह की पहुंच के विस्तार को रेखांकित किया गया। यह राज्य के सभी 22 जिलों में सुलभ और नागरिक-केंद्रित सेवाएं देता है। यह नोट किया गया कि टेली-लॉ को शुरू में 317 सीएससी के साथ आकांक्षी जिले नूंह (मेवात) में पेश किया गया था और तब से इसका काफी विस्तार हुआ है। वित्त वर्ष 2024-2025 और वित्त वर्ष 2025-2026 के दौरान सभी जिलों में 6,197 सीएससी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसमें सात आकांक्षी ब्लॉकों तक पहुंच भी शामिल है। प्रस्तुति में इस बात पर बल दिया गया कि न्याय तक समान पहुंच एक लोकतांत्रिक समाज के लिए मौलिक है और टेली-लॉ नागरिकों और न्याय प्रणाली के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। इसमें हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाभार्थियों, पैनल वकीलों, ग्राम स्तर के उद्यमियों (वीएलई) और न्याय सहायकों के साथ बातचीत की। इसमें वीएलई ने बताया कि कैसे टेली-लॉ पहुंच से वंचित लोगों तक पहुंच रहा है और कानूनी सेवाओं के घर पर वितरण को सक्षम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने "हर घर न्याय, सबको न्याय" के दृष्टिकोण को दोहराया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा कीं।
इसके बाद न्याय बंधु (प्रो बोनो लीगल सर्विसेज) कार्यक्रम पर एक समर्पित खंड आयोजित किया गया। यह दिशा (न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने) योजना के अंतर्गत न्याय विभाग की एक पहल है। कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों और पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वीडियो दिखाया गया। इसके बाद न्याय बंधु के अंतर्गत पंजीकृत नि:शुल्क वकीलों के साथ-साथ विभिन्न लॉ स्कूलों के संकाय सदस्यों और छात्रों के साथ एक संवादात्मक चर्चा की गई। सत्र में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने में निशुल्क कानूनी सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। इस बात पर बल दिया गया कि कैसे इस तरह के प्रयास बिना आवाज़ वालो को आवाज देते हैं और कानूनी जागरूकता और कानूनी सशक्तिकरण के बीच की खाई को पाटते हैं। इसने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे प्रो बोनो क्लब छात्रों के लिए सैद्धांतिक कानूनी शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव में बदल रहे हैं।
इस कार्यक्रम में देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के जनजातीय समुदायों के प्रथागत कानूनों का दस्तावेजीकरण करने वाली दो ई-पुस्तकें जारी की गईं। ये प्रकाशन गुवाहाटी उच्च न्यायालय के विधि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी कानूनी परंपराओं को संरक्षित करना और देश के व्यापक कानूनी ढांचे के भीतर प्रथागत शासन प्रणालियों की गहरी समझ में योगदान देना है।
दिशा योजना पर दूरदर्शन वृत्तचित्र जारी किया। यह देश भर में न्याय तक पहुंच बढ़ाने में पहल के परिवर्तनकारी प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण था। वृत्तचित्र में सफलता की कहानियों, जमीनी स्तर तक पहुंच और टेली-लॉ, न्याय बंधु की भूमिका और नागरिकों को सशक्त बनाने में कानूनी साक्षरता प्रयासों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। इसने इस बात का उल्लेख किया कि कैसे प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म और सामुदायिक भागीदारी लोगों और न्याय वितरण प्रणाली के बीच की खाई को पाट रही है। इसको दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया और यह योजना की उपलब्धियों और सभी के लिए समावेशी और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता के प्रेरक प्रतिबिंब के रूप में कार्य किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मुख्य भाषण देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि हरियाणा को दिशा योजना के अंतर्गत पूरे देश में आयोजित होने वाली 5 क्षेत्रीय कार्यशालाओं में से कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि में क्षेत्रीय कार्यशाला की मेजबानी के लिए चुना गया है। कुरुक्षेत्र "गीता की भूमि" के रूप में पूजा जाता है और यहाँ भगवान कृष्ण ने न्याय और कर्तव्य का संदेश दिया था। उन्होंने दिशा पहल के अंतर्गत कार्यशाला को सार्थक और प्रेरक बताया और कहा कि न्याय अदालतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जागरूकता वैन, ई-पुस्तकों और आउटरीच पहल जैसे नागरिक-केंद्रित प्रयासों के माध्यम से आम नागरिकों के घरो तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा की सच्चा विकास तभी प्राप्त होता है जब इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। अनुच्छेद 14, 21 और 39ए के अंतर्गत संवैधानिक गारंटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टेली-लॉ सेवाओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर समय पर न्याय तक पहुंच को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिशा विशेष रूप से वित्तीय या भौगोलिक बाधाओं का सामना करने वालों के लिए प्रौद्योगिकी और हेल्पलाइन 14454 जैसी पहलों द्वारा समर्थित सुलभ, पारदर्शी और कुशल न्याय वितरण को बढ़ावा देती है। चित्तरंजन दास से प्रेरित प्रो बोनो कल्चर के महत्व और क्षेत्रीय भाषाओं में कानूनी जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक 109 लॉ कॉलेजों में प्रो बोनो क्लबों के साथ न्याय बंधु कार्यक्रम के अंतर्गत 10 हज़ार से अधिक अधिवक्ताओं ने पंजीकरण कराया था। उन्होंने केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल के सहयोग से हरियाणा में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन का उल्लेख कहा कि इन सुधारों ने न्याय की सुगमता को बढ़ाया है। यह डिजिटल इंडिया की परिकल्पना और सतत विकास लक्ष्य 16 के अनुरूप है। उन्होंने अंत में कहा कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का सुलभ अधिकार होना चाहिए।
कार्यशाला ने सरकारी अधिकारियों, कानूनी पेशेवरों, सीएससी प्रतिनिधियों, कानून के छात्रों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं सहित हितधारकों के बीच अनुभव-साझाकरण, परामर्श और नीतिगत संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। चर्चा समन्वय को मजबूत करने, कार्यान्वयन तंत्र में सुधार और प्रौद्योगिकी-सक्षम न्याय पहलों की पहुंच का विस्तार करने पर केंद्रित थी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा में क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन विधि और न्याय मंत्रालय, न्याय विभाग में संयुक्त सचिव श्री सुरेश कुमार के समापन भाषण के साथ हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और भागीदार संस्थानों को उनके बहुमूल्य योगदान और सक्रिय भागीदारी के लिए हार्दिक सराहना की गई। सत्र ने लोकतंत्र के मूलभूत स्तंभ के रूप में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और इस बात पर बल दिया कि कानून के समक्ष समानता प्रत्येक नागरिक तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री और अन्य प्रतिष्ठित नेताओं के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यशाला के सफल आयोजन में न्याय विभाग, हरियाणा सरकार, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड, एनएएलएसए, एसएलएसए और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की भूमिका को स्वीकार किया गया। न्याय सहायकों, ग्राम स्तर के उद्यमियों, पैरा लीगल वालंटियर्स और पैनल वकीलों सहित क्षेत्र-स्तर के पदाधिकारियों की विशेष सराहना की गई। इनके प्रयास नागरिकों और न्याय वितरण प्रणाली के बीच की खाई को पाटने के लिए जारी हैं। कार्यशाला का समापन विचार-विमर्श को कार्रवाई योग्य परिणामों में बदलने और दिशा ढांचे के तहत प्रौद्योगिकी-सक्षम, समावेशी और नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण को और मजबूत करने के नए संकल्प के साथ हुआ।
कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय को सुलभ, किफायती और समावेशी बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।




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पीके/ केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2243723)
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