कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
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भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थाशन (आईआईसीए) ने जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण एवं पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) के सामाजिक आयाम पर पांचवीं अंतर-मंत्रालयी परामर्श बैठक आयोजित की

प्रविष्टि तिथि: 15 MAR 2026 1:07PM by PIB Delhi

भारत सरकार के कारपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) ने हाल ही में नई दिल्ली में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण (आरबीसी) और पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) के सामाजिक आयाम पर पांचवीं अंतर-मंत्रालयी परामर्श बैठक का आयोजन किया।

आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (एसओबीई) ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के सहयोग से भारत में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण और सतत विकास शासन पर नीतिगत सामंजस्य और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के लिए इस परामर्श का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का शुभारंभ भारतीय कारपोरेट कार्य संस्‍थान (आईआईसीए) के महानिदेशक और सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास और स्थिरता संबंधी अपेक्षाओं के संदर्भ में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण के बढ़ते महत्व के बारे में बताया। श्री सिंह ने कहा कि आज जिम्मेदार व्यावसायिक व्‍यवस्‍थाओं कारपोरेट रिपोर्टिंग ढांचे से परे जाकर आर्थिक प्रतिस्पर्धा, सतत विकास और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एकीकरण से भी जुड़ती जा रही हैं।

कारपोरेट कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार श्री शांतनु मित्रा ने अपने संबोधन में भारत के कारपोरेट शासन तंत्र में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण के नीतिगत महत्व और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में कार्यरत व्यवसायों के लिए इसकी बढ़ती प्रासंगिकता का उल्‍लेख किया। श्री मित्रा ने कहा कि जिम्मेदार व्यवसाय का दायित्व कंपनी अधिनियम 2013 के विभिन्न प्रावधानों में अंतर्निहित है और कारपोरेट कार्य मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वैधानिक ढांचा नए युग के व्यवसायों के लिए अनुकूल बना रहे और वैधानिक एवं नियामक अनुपालन के लिए एक वैश्विक मानदंड के रूप में कार्य करे।

इस परामर्श सत्र में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की दक्षिण एशिया और भारत स्थित कंट्री ऑफिस की डिसेंट वर्क टेक्‍नि‍कल सपोर्ट टीम की निदेशक सुश्री मिचिको मियामोतो ने भी विशेष भाषण दिया। उन्होंने वैश्विक दृष्टिकोण साझा करते हुए जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण में भारत की अग्रणी प्रगति पर जोर दिया। सुश्री मियामोतो ने अपने संबोधन में कारपोरेट स्थिरता के बदलते ढांचे के भीतर सभ्य कार्य, श्रम मानकों और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के महत्व को और स्पष्ट किया।

आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रोफेसर गरिमा दाधीच ने अपने प्रस्तुतीकरण में भारत में उत्तरदायित्वपूर्ण व्यापार आचरण (आरबीसी) के बारे में बताया, जिसमें उन्‍होंने देश के उत्तरदायित्वपूर्ण व्यापार ढांचे को आकार देने वाले प्रमुख नीतिगत पड़ावों और नियामक विकासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय पहलों और नीतिगत उपायों को उत्तरदायित्वपूर्ण व्यापार आचरण पर राष्ट्रीय दिशानिर्देशों (एनजीआरबीसी) के नौ सिद्धांतों से जोड़ने वाले आईआईसीए के चल रहे शोध से प्राप्त जानकारियों को भी साझा किया।

विचार-विमर्श के दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने अपने-अपने मंत्रालयों और सरकारी निकायों की प्रमुख पहलों के बारे में बताया:

एफएसएसएआई के सीईओ श्री रंजीत पुन्हानी ने खाद्य क्षेत्र द्वारा जिम्मेदार उत्पाद मानकों और अनुपालन की समस्‍या विशेष रूप से फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण लेबलिंग नियमों के संबंध में संतुलन बनाने में आने वाली समानांतर चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।

सेबी के मुख्य महाप्रबंधक श्री राजेश डांगेती ने कहा कि बीआरएसआर कोर ने सबसे आवश्यक सामाजिक, पर्यावरणीय और शासन संकेतकों के लिए खुलासे को युक्तिसंगत बनाया है, और इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे भारत 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रखता है, स्थिरता संबंधी खुलासे को अनुपालन को बाधा के रूप में नहीं बल्कि बाजार में भिन्नता लाने और पूंजी तक पहुंच प्राप्त करने के एक माध्‍यम के रूप में देखा जा सकता है।

इसके अलावा, आईबीबीआई के मुख्य महाप्रबंधक श्री शिव अनंत शंकर ने आईबीसी की उस अनूठी विशेषता के बारे में बताया, जो परिसमापन में कर्मचारियों के वेतन बकाया को प्राथमिकता देती है, और जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण को प्रोत्साहित करने के लिए समाधान ढांचे में ईएसजी विचारों को कैसे शामिल किया जा सकता है, इस पर विचार करने का प्रस्ताव रखा।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त निदेशक श्री प्रशांत बैजल ने चार श्रम संहिताओं के माध्यम से किए जा रहे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों - विशेष रूप से न्यूनतम मजदूरी, नियुक्ति पत्रों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता ईएसआईसी के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अधिसूचना प्रणाली को समाप्त करती है, इसका दायरा अखिल भारतीय स्तर पर बढ़ाती है और कार्यबल की संख्‍या की परवाह किए बिना खतरनाक उद्योगों पर ईएसआईसी को लागू करती है।

भारी उद्योग मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार डॉ. रेणुका मिश्रा ने बताया कि ऑटो घटकों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतर समीक्षा पहले से ही प्रक्रियाधीन है, और पीएलआई योजना के तहत क्षेत्र-विशिष्ट दिशानिर्देश ऑटो और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में उत्तरदायित्वपूर्ण व्यावसायिक मानकों को धीरे-धीरे स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

क्षमता विकास आयोग के सचिव श्री जयदीप गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं, अपने विशाल आकार और दृश्यता को देखते हुए, जिम्मेदार व्यावसायिक व्‍यवस्‍थाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रारंभिक अपनाने वाले और प्रदर्शन मामलों के रूप में काम कर सकती हैं, जिससे निजी क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए प्रदर्शन प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

श्री अरविंद कुमार, सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार; श्री जीवन कुमार जेठानी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में वैज्ञानिक; श्री अरिंदम, विदेश मंत्रालय में निदेशक; श्री चिन्नाराजा नायडू, विधि और न्याय मंत्रालय में अपर विधायी सलाहकार; श्री विनोद कुमार, गृह मंत्रालय में उप सचिव और श्री समीर कुमार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में संयुक्त सचिव ने सामूहिक रूप से जिम्मेदार व्यवसाय और सतत विकास शासन की अंतर-क्षेत्रीय प्रकृति पर विचार-विमर्श किया और आगे की कार्रवाई के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की।

जैसे कि, पीएलआई और क्षेत्रीय नीति डिजाइन के भीतर सामाजिक सुरक्षा उपायों को शामिल करना, पीएलएफएस, ईएसआईसी और ईपीएफओ से श्रम डेटा को सेबी के बीआरएसआर प्रकटीकरण ढांचे के साथ एकीकृत करना, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए स्तरीय और स्वैच्छिक आरबीसी अनुपालन तंत्र विकसित करना, अनौपचारिक और प्रवासी श्रमिकों के लिए उपचार तंत्र तक पहुंच को मजबूत करना और आईबीसी के तहत दिवालियापन और पुनर्गठन कार्यवाही में ईएसजी विचारों को शामिल करना।

यह देखा गया कि भारत ने जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश (एनजीआरबीसी), सेबी के व्यावसायिक उत्तरदायित्व और स्थिरता रिपोर्टिंग (बीआरएसआर) ढांचे, श्रम संहिता और विकसित हो रहे सतत वित्त और उचित परिश्रम तंत्र जैसी पहलों के माध्यम से जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण के लिए एक मजबूत ढांचा बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

इस परामर्श से प्राप्त विचार, भारत के जिम्मेदार व्यापार तंत्र को मजबूत करने और सतत विकास शासन ढांचे के निरंतर विकास का समर्थन करने के उद्देश्य से, जिम्मेदार व्यापार आचरण और सभ्य कार्य पर आईआईसीए द्वारा किए जा रहे अनुसंधान और नीतिगत कार्यों में योगदान देंगे।

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पीके/केसी/पीपी/वीके


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