पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति
प्रविष्टि तिथि:
14 MAR 2026 9:43AM by PIB Delhi
जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति (एसबीएफएपी) के तहत, 456 जहाजों को समाहित करते हुए, 19,748 करोड़ रुपये मूल्य के कुल 288 अनुबंधों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हुई है।
आज तक स्वीकृत किए गए जहाजों के प्रकारों में टग, सामान्य मालवाहक पोत, बल्क कैरियर, तेल टैंकर, क्रेन पोंटून, भारी डेक मालवाहक पोत, आरओ-आरओ यात्री पोत, क्रू बोट, डेक लोडिंग क्राफ्ट, तटीय अनुसंधान पोत, मॉड्यूलर पोंटून, यात्री कैटामरान, यात्री सह मोटरसाइकिल फेरी, यात्री फेरी, लैंडिंग क्राफ्ट, जैक-अप बार्ज और सेल्फ-एलिवेटिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
अब तक, 204 जहाजों के निर्माण और सुपुर्दगी के लिए 23 शिपयार्डों को कुल 620.57 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने सितंबर 2025 में जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) को मंजूरी दी, जिसमें भारतीय शिपयार्डों के लिए क्रेडिट जोखिम कवरेज और उत्पादन क्षमता विस्तार के लिए ब्राउनफील्ड/मौजूदा भारतीय शिपयार्डों को पूंजीगत सहायता के रूप में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण का प्रावधान है। इसके लिए दिशानिर्देश हाल ही में जारी किए गए हैं।
2024 में एक तृतीय पक्ष द्वारा जहाज निर्माण क्षेत्र का आकलन किया गया। रिपोर्ट में जहाज निर्माण क्षेत्र के 6.4 के उच्च रोजगार गुणक और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, इसमें भारत में जहाज निर्माण के विकास में बाधा डालने वाली चुनौतियों, जैसे घरेलू मांग की कमी, वित्तपोषण की उच्च लागत, क्षमता और प्रौद्योगिकी संबंधी सीमाएं आदि को भी उजागर किया गया। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, भारत सरकार ने सितंबर 2025 में जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस), समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) और जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) सहित एक जहाज निर्माण पैकेज को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने लोकसभा में प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/जेके/एमबी
(रिलीज़ आईडी: 2240156)
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