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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 4:23PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) को पहली बार 2016 में तैयार और जारी किया गया। इस योजना को सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद 2019 में संशोधित किया गया। संशोधित योजना में केंद्र और राज्य स्तर के सभी क्षेत्रों, मंत्रालयों और विभागों तथा जिला स्तरीय अधिकारियों को एक मंच पर लाकर आपदा जोखिम घटाने में उनकी भूमिकाओं और दायित्वों को परिभाषित किया गया है।

एनडीएमपी की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैंः

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम 2025 और आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीडीएम) 2009 जैसे राष्ट्रीय विधिक अधिदेशों के अनुरूप।
  • आपदा जोखिम घटाने (डीआरआर) के लिए सेंदाई फ्रेमवर्क, संवहनीय विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जलवायु परिवर्तन से संबंधित पेरिस समझौता (कोप 21) जैसे उन समझौतों के वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी जिन पर भारत ने हस्ताक्षर किए हैं।
  • डीआरआर के लिए प्रधानमंत्री का 10 सूत्री एजेंडा जिसमें मौजूदा समय की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया गया है।
  • सर्वव्यापी और समग्र सिद्धांत के रूप में सामाजिक समावेशन।

आपदा जोखिम घटाने को मुख्यधारा में लाना एनडीएमपी की आधारभूत विशेषता है।

माननीय प्रधानमंत्री ने नवंबर 2016 में नई दिल्ली में आयोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एशियाई मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान डीआरआर के लिए 10 सूत्री एजेंडा रखा था। इस सर्व-समावेशी एजेंडे में आपदा जोखिम घटाने पर तथा सामुदायिक तैयारी से लेकर प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तक सभी मुद्दों पर समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। डीआरआर पर प्रधानमंत्री का 10 सूत्री एजेंडा इस प्रकार हैः

1. विकास के सभी क्षेत्रों को आपदा जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों को अंगीकार करना चाहिए।

2. जोखिम कवरेज में गरीब परिवारों से लेकर छोटे और मझोले उद्यमों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा राष्ट्रीयताओं तक सभी को शामिल किया जाना चाहिए।

3. महिलाओं के नेतृत्व और वृहत भागीदारी की आपदा जोखिम प्रबंधन में केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए।

4. प्रकृति और आपदा जोखिमों की वैश्विक समझ बढ़ाने के लिए विश्व भर में जोखिम का पता लगाने में निवेश।

5. आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग।

6. आपदा से संबंधित विषयों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों के नेटवर्क की स्थापना।

7. सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकियों से मिले अवसरों का आपदा जोखिम घटाने में उपयोग।

8. आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करने के लिए स्थानीय क्षमता और पहलकदमियों का निर्माण।

9. आपदाओं से सीख लेने के हर अवसर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके लिए हर आपदा से मिले सबक पर अध्ययन किए जाएं।

10. आपदाओं पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में सामंजस्य बढ़ाया जाए।

यह जानकारी गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एसके/एसएस


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