नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
कृषि-नवीकरणीय ऊर्जा किसानों को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने, उत्पादकता बढ़ाने और सिंचाई लागत कम करने में सहायक: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी
खेतों, छतों और ग्रामीण उद्यमों में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा से भारत के 500-गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा: केंद्रीय मंत्री जोशी
एग्रीवोल्टिक्स भारत में कृषि और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बदल सकता है: श्री श्रीपद येसो नाइक
सरकार समर्पित कृषि-पीवी घटक के साथ पीएम-कुसुम 2.0 की तैयारी कर रही है
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर पंप लगाए गए तथा 13 लाख ग्रिड-संलग्न पंपों का सौरकरण किया गया
प्रविष्टि तिथि:
10 MAR 2026 8:41PM by PIB Delhi
केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, श्री प्रल्हाद जोशी ने आज नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उपस्थिति लोगों को संबोधित करते हुए श्री जोशी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अब तेजी से भारत के खेतों और घरों तक पहुंच रही है, जिससे किसानों को विश्वसनीय बिजली मिल रही है, सिंचाई की लागत कम हो रही है और कृषि उत्पादकता में सुधार हो रहा है। मंत्री श्री जोशी ने कहा, “आज कोई किसान अपने खेत की सिंचाई सौर ऊर्जा से कर रहा हो सकता है, और जो परिवार पहले बिजली के बिलों को लेकर चिंतित रहता था, वह अब रूफटॉप सोलर के माध्यम से अपनी खुद की बिजली पैदा कर रहा है। यह सिर्फ ऊर्जा परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रूपांतरण भी है।”
सौर पंप सिंचाई लागत को कम कर रहे हैं
श्री जोशी ने जोर देते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की तकनीकें, विशेष रूप से सौर सिंचाई पंप, कृषि क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, ये पंप किसानों की डीज़ल पर निर्भरता कम करने और दिन के समय विश्वसनीय सिंचाई प्राप्त करने में मदद करते हैं। डीजल से सिंचाई करने पर गेहूं के लिए प्रति एकड़ लगभग ₹6,790 और कपास जैसी फसलों के लिए प्रति एकड़ ₹8,000 से अधिक खर्च आ सकता है। सौर पंपों के उपयोग से किसान प्रति एकड़ प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000 से ₹6,500 तक की बचत कर सकते हैं, साथ ही इससे उत्सर्जन में भी कमी आती है।
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत, देशभर में 10-लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप स्थापित किए गए हैं और 13-लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण किया गया है। मंत्री श्री जोशी ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से किसान “अन्नदाता” होने के साथ-साथ “ऊर्जादाता” भी बन रहे हैं।
पीएम-कुसुम 2.0 से कृषि-पीवी के विस्तार को बढ़ावा
मंत्री श्री जोशी ने जानकारी दी कि सरकार पीएम-कुसुम 2.0 की तैयारी कर रही है, जिसमें 10 गीगावॉट का समर्पित एग्री-पीवी घटक शामिल होगा। इसका उद्देश्य फसलों के साथ सौर पैनलों की सह-स्थापना को बढ़ावा देना है। इस पहल से किसान उसी जमीन पर कृषि गतिविधियां जारी रखते हुए बिजली भी उत्पन्न कर सकेंगे, जिससे ग्रामीण भारत में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का एक नया मॉडल विकसित होगा।
एग्रीवोल्टिक्स से आय के नए अवसर खुल रहे हैं
एग्रीवोल्टाइक प्रणालियों की उभरती संभावनाओं को रेखांकित करते हुए श्री जोशी ने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन को कृषि खेती के साथ जोड़ने से भूमि की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है। अनुमानों के अनुसार, भारत में एग्रीवोल्टिक्स की संभावित क्षमता लगभग 3,000 गीगावॉट से लेकर लगभग 14,000 गीगावॉट तक हो सकती है, जो कृषि के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में मौजूद विशाल अवसरों को दर्शाती है।
अध्ययनों से साफ संकेत मिलता है कि एग्रीवोल्टाइक प्रणालियां किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं। कुछ मामलों में, फसल उत्पादन के साथ बिजली उत्पादन से होने वाली आय को जोड़ने पर किसानों की वार्षिक आय लगभग ₹60,000 प्रति एकड़ से बढ़कर ₹1 लाख प्रति एकड़ से भी अधिक हो सकती है।
रूफटॉप सोलर से ऊर्जा की पहुंच का विस्तार
श्री जोशी ने पीएम सूर्य घर योजना की प्रगति पर भी प्रकाश डाला: उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 31 लाख से अधिक परिवार पहले ही रूफटॉप सोलर स्थापना से लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे ये परिवार अपनी स्वयं की बिजली उत्पन्न कर रहे हैं और बिजली के बिलों में कमी ला रहे हैं।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा प्रगति को रेखांकित करते हुए मंत्री श्री जोशी ने बताया कि देश की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता वर्ष 2014 में लगभग 81 गीगावॉट थी जो आज बढ़कर करीब 275 गीगावॉट हो गई है। अब भारत की स्थापित विद्युत क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रहा है। सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2014 में लगभग 2.8 गीगावॉट से बढ़कर करीब 143 गीगावॉट हो गई है। वहीं पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 21 गीगावॉट से बढ़कर करीब 55 गीगावॉट हो गई है, और जैव ऊर्जा क्षमता 8.1 गीगावॉट से बढ़कर लगभग 12 गीगावॉट तक पहुंच गई है। यह देश में नवीकरणीय ऊर्जा के तीव्र विस्तार को दर्शाता है।
मंत्री श्री जोशी ने जोर देकर कहा कि भारत का 500-गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य खेतों, छतों और ग्रामीण उद्यमों में स्थापित होने वाले लाखों विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के माध्यम से हासिल किया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, श्री श्रीपद येसa नाइक ने एग्रीवोल्टिक्स की उभरती संभावनाओं को भारत के ऊर्जा परिवर्तन के लिए एक परिवर्तनकारी समाधान बताया। उन्होंने कहा कि एग्रीवोल्टाइक प्रणालियां एक ही भूमि पर स्वच्छ बिजली उत्पादन और फसलों की खेती को एक साथ संभव बनाती हैं, जिससे भूमि उपयोग की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए भूमि की प्रतिस्पर्धी मांग की चुनौती का समाधान करने में भी मदद मिलती है।
श्री नाइक ने सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरकार, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और वित्तीय संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है, ताकि एग्रीवोल्टाइक प्रणालियों के विस्तार को तेज किया जा सके और नवोन्मेषी तथा किफायती समाधान विकसित किया जा सके, जिससे ऐसी तकनीकें देशभर के किसानों के लिए सुलभ हो सके।
नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन के बारे में
यह शिखर सम्मेलन नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया(एनएसईएपआई) द्वारा इंडिया एग्रीवोल्टिक्स एलायंस के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रणेताओं, किसान प्रतिनिधियों और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों ने भाग लिया और कृषि के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण पर चर्चा की।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2237980)
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