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प्रधानमंत्री का इज़राइली संसद - नेसेट में संबोधन

प्रविष्टि तिथि: 25 FEB 2026 10:06PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री बेंजामिन नेतन्याहू,

नेसेट के अध्यक्ष श्री अमीर ओहाना,

नेता प्रतिपक्ष श्री याइर लापिद,

नेसेट के माननीय सदस्यगण,

मेरी प्रिय बहनों और भाइयों,

शालोम!

नमस्ते!

माननीय सदस्यों,

इस प्रतिष्ठित सदन के सामने उपस्थिति मेरे लिए परम सौभाग्‍य और सम्मान की बात है। मैं यहाँ भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उपस्थित होने के साथ ही साथ एक प्राचीन सभ्यता का प्रतिनिधि होने के नाते दूसरी प्राचीन सभ्यता को भी संबोधित कर रहा हूँ। मैं अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की शुभकामनाएँ तथा मैत्री, सम्मान और साझेदारी का संदेश लाया हूँ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके स्नेहपूर्ण निमंत्रण के लिए मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ। साथ ही नेसेट को भारतीय रंगों से आलोकित करने के आपके इस अद्भुत और सौहार्दपूर्ण भाव के लिए भी मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ। तीन वर्ष पूर्व आपके द्वारा किया गया भारत दौरा नेसेट के किसी अध्यक्ष द्वारा किया गया पहला दौरा था और आप की ही बदौलत आज मैं इस गरिमामय सभा को संबोधित करने वाला भारत का पहला प्रधानमंत्री बना हूँ।

नौ वर्ष पहले मुझे इज़राइल की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। आज यहाँ फिर से उपस्थित होकर—उसी धरती पर लौटकर, मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, जिसके प्रति मैं सदैव विशेष आकर्षण महसूस करता रहा हूँ। आखिरकार, मेरा जन्म उसी दिन—17 सितंबर, 1950 को हुआ था, जिस दिन भारत ने इज़राइल को औपचारिक मान्यता दी थी!

माननीय सदस्यों,

मैं अपने साथ भारत की जनता की ओर से उन लोगों के लिए गहरी संवेदनाएँ लाया हूँ, जिन्‍होंने हमास के "7 अक्टूबर” के बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाई और उस प्रत्येक परिवार के लिए भी जिसकी दुनिया उजड़ गई। हम आपके दर्द को महसूस करते हैं। हम आपके दुख में शामिल हैं। भारत इस समय और आगे भी, इज़राइल के साथ दृढ़ता और पूर्ण विश्वास के साथ खड़ा है।

कोई भी उद्देश्य निर्दोष नागरिकों की हत्या को उचित नहीं ठहरा सकता। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

भारत ने भी लंबे अर्से तक आतंकवाद की पीड़ा झेली है। हमें 26/11 के मुंबई हमले भी याद हैं, जिनमें बेगुनाह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन हमलों में मारे गए लोगों में इज़राइली नागरिक भी शामिल थे। आपकी ही तरह, आतंकवाद के प्रति हमारी नीति भी बिना किसी दोहरे मानदंड के, निरंतर और आतंकवाद को कतई बर्दाश्‍त न करने की रही है।

आतंकवाद का उद्देश्य समाजों को अस्थिर करना, विकास को बाधित करना और विश्वास को कमजोर करना है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि आतंक चाहे कहीं भी हो, उससे हर जगह शांति को खतरा रहता है। यही कारण है कि भारत स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को सुदृढ़ करने में योगदान देने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

कुछ वर्ष पहले, जब आपने अब्राहम समझौता किया, तब हमने आपके साहस और दूरदर्शिता की सराहना की थी। लंबे समय से मुश्किलों से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए यह नई आशा का क्षण था। तब से परिस्थितियाँ काफी बदल गई हैं। मार्ग अब और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिर भी, उस आशा को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित गाजा शांति पहल, एक रास्‍ता दिखाती है। इस पहल के प्रति भारत ने दृढ़ समर्थन व्यक्त किया है। हमें विश्वास है कि यह पहल फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान सहित क्षेत्र के सभी लोगों के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का आश्वासन देती है।

हमारे समस्‍त प्रयासों का मार्गदर्शन बुद्धिमत्ता, साहस और मानवता द्वारा हो। शांति की राह हमेशा आसान नहीं होती। भारत इस क्षेत्र में संवाद, शांति और स्थिरता के लिए आपके और विश्व के साथ है।

माननीय सदस्यों,

इज़राइल के संकल्प, साहस और उपलब्धियों के लिए भारत में गहरा सम्‍मान है। आधुनिक राष्ट्रों के रूप में हमारे संबंध स्थापित होने से बहुत पहले ही, हमारे बीच दो हज़ार से अधिक वर्षों पुराने संबंध मौजूद थे। बुक ऑफ एस्टर में भारत का उल्लेख ‘होदू’ के रूप में मिलता है। प्राचीन समय में तालमुड में भारत के साथ व्यापार का विवरण दर्ज है।

यहूदी व्यापारी भूमध्यसागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले समुद्री मार्गों से यात्रा किया करते थे। वे अवसर और सम्मान की तलाश में आए थे। और भारत में, वे हम में से एक बन गए।

यहूदी समुदाय भारत में उत्पीड़न या भेदभाव के भय के बिना रहते आए हैं। उन्होंने अपने धर्म को सहेज कर रखा है और समाज में पूरी तरह भागीदारी की है। यह रिकॉर्ड हमारे लिए गर्व की बात है।

माननीय सदस्यों,

महाराष्ट्र के बेने इज़राइल, केरल के कोचिनी यहूदी, कोलकाता और मुंबई के बग़दादी यहूदी और पूर्वोत्तर के बेनी मेनाशे ने भारत को समृद्ध किया है। मेरे गृह राज्य गुजरात में एक स्कूल है, जिसे एक बेने इज़राइली परिवार—मिस्टर और मिसेस बेस्ट—ने स्थापित किया है। यह एक उत्कृष्ट स्कूल है, और जाहिर है, इसे बेस्ट स्कूल कहा जाता है!

एडविन मायर्स ने भारतीय फिल्‍म प्रभाग को आकार दिया और भारतीय सिनेमा के इतिहास के एक महान व्यक्तित्व बने। डॉक्टर रूबेन डेविड ने अहमदाबाद में कांकड़िया चिड़ियाघर की स्थापना की। अभिनेता डेविड अब्राहम चुलकर या अंकल डेविड देश भर में प्रसिद्ध हुए। वाल्टर काउफ़मैन ने ऑल इंडिया रेडियो के सिग्नेचर ट्यून की रचना की। डेविड सासून ने कई संस्थाएँ बनाई, जो आज भी भारतीय समाज की सेवा कर रही हैं।

और, पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जे.एफ.आर. जैकब के वीरतापूर्ण योगदान से निश्चित रूप से सभी अवगत हैं। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद मुझे उनके साथ निकटता से काम करने का सम्मान प्राप्त हुआ। अनेक बार चाय पर चर्चा के दौरान हमने भारत-इज़राइल संबंधों सहित अनेक विषयों पर विचार विमर्श किया। इनके अलावा अनगिनत ऐसे लोग हैं जिनके योगदान भारत की समृद्ध जीवन शैली में गहराई से बुने हुए हैं।

माननीय सदस्यों,

बीसवीं शताब्दी के मध्य में जब अनेक भारतीय यहूदी इज़राइल में प्रवासित हुए, तब भारत से इज़राइल की ओर भी लोगों का आवागमन हुआ। आज भारतीय मूल का एक जीवंत यहूदी समुदाय यहाँ बसा हुआ है। उन्होंने आधुनिक इज़राइल के निर्माण में—प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में, कक्षाओं में, और तो और युद्धभूमि में भी योगदान दिया है। उनका दृढ़ मत है कि इज़राइल उनकी पितृभूमि और भारत उनकी मातृभूमि है । हमें उन पर गर्व है।

माननीय सदस्यों,

इस भूमि से भारत का संबंध रक्त और बलिदान से भी लिखा गया है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान चार हजार से अधिक भारतीय सैनिकों ने इस क्षेत्र में अपने प्राणों की आहुति दी। सितंबर 1918 में हाइफ़ा में घुड़सवार सेना का हमला सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

मेजर ठाकुर दलपत सिंह को हाइफ़ा के नायक के रूप में याद किया जाता है, जो इस साझा इतिहास का प्रतीक हैं। अपनी पिछली यात्रा के दौरान, भारतीय सैनिकों के हाइफ़ा स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर मैं बेहद भावुक हो गया था।

माननीय सदस्यों,

पिछले महीने, दुनिया ने अंतर्राष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस मनाया। होलोकॉस्ट मानव इतिहास के सबसे स्‍याह अध्यायों में से एक है। फिर भी, उन ऊथल-पुथल भरे वर्षों में इंसानियत के कुछ कार्य भी हुए। गुजरात के नवानगर के महाराजा, जिन्हें जाम साहेब के नाम से भी जाना जाताहै, ने पोलैंड के बच्चों सहित यहूदी बच्चों को आश्रय दिया,जिनके पास कहीं और जाने की कोई जगह नहीं बची थी। मुझे बताया गया है कि हाल ही में मोषाव नेवातिम में जाम साहेब की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया।

धन्यवाद। इस सम्मान और स्मरण के लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ।

माननीय सदस्यों,

भारत की स्वतंत्रता के बाद, कई भारतीय नेताओं ने इज़राइल के लोगों के साथ आत्मीय संबंध महसूस किए। 1950 के दशक के भारत की संसद में हुई चर्चा इस बात की साक्षी हैं, जिसमें उन्होंने रेगिस्तान में इज़राइल के कृषि विकास के प्रयासों की प्रशंसा की थी। इज़राइल के किबुत्ज़ आंदोलन ने आचार्य विनोबा भावे और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे हमारे नेताओं को प्रेरित किया। पहले मेरे गृह राज्य गुजरात में, और अब पूरे भारत में, मैंने देखा है कि "प्रति बूंद, अधिक फ़सल" के दृष्टिकोण ने कृषि में अद्भुत परिणाम दिए हैं।

मेरी खुद की पहली इज़राइल यात्रा 2006 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर हुई थी। बाद में, 2017 में, प्रधानमंत्री के रूप में इज़राइल की मेरी यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक भागीदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया । उसके बाद से, हमारे सहयोग के दायरे और आकार दोनों में विस्तार हुआ है। और हम इस संबंध को कई क्षेत्रों में और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

माननीय सदस्यों,

पिछले कुछ वर्षों से, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है। शीघ्र ही, हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। साथ ही, इज़राइल नवाचार और तकनीकी नेतृत्व का शक्तिशाली केंद्र है। यह दूरदर्शितापूर्ण साझेदारी के लिए सहज आधार तैयार करता है।

हम व्यापार का विस्तार करने, निवेश प्रवाह को मजबूत बनाने और संयुक्त ढांचागत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले वर्ष हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि हमारे व्यवसायों को विश्वास और पूर्वानुमान योग्य वातावरण प्रदान करेगी।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने अन्य देशों के साथ कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौते किए हैं। इनमें आपके पश्चिम में, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ त‍था आपके पूर्व में, यूएई और ओमान के साथ किए गए समझौते शामिल हैं।

हाल के वर्षों में हमारे द्विपक्षीय वस्तु व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है। लेकिन यह अवसरों की पूरी संभावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करता। यही कारण है कि हमारी टीमें एक महत्वाकांक्षी मुक्‍त व्‍यापार समझौते की दिशा में कड़ी मेहनत कर रही हैं। यह हमारे व्यापारिक संबंधों में मौजूद विशाल अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करेगा।

हम भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा तथा भारत, इज़राइल, यूएई और अमेरिका के बीच I2U2 फ्रेमवर्क सहित विभिन्न ढाँचों में भी निकटता से काम करेंगे। हमारी साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ रक्षा और सुरक्षा हैं। पिछले वर्ष नवंबर में, हमने रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अनिश्चितताओं से घिरी आज की दुनिया में भारत और इज़राइल जैसे भरोसेमंद साझेदारों के बीच मजबूत रक्षा साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

माननीय सदस्यों,

इज़राइल को अक्सर “स्टार्ट-अप नेशन” कहा जाता है। हाल के वर्षों में, हम भी अपनी युवाओं के नवाचार और रचनात्मकता को उजागर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुझे याद है कि 2018 में, प्रधानमंत्री श्री नेतन्याहू और मैंने भारत में आईक्रिएट टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर का उद्घाटन किया था। तब से, इसने लगभग 900 ऐसे स्टार्ट-अप्स को सहायता दी है।

पिछले सप्ताह, हमने दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लोकतांत्रिक एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हमारी आकांक्षात्मक भावना स्वाभाविक रूप से इज़राइल के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के साथ मेल खाती है। मैं क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में व्‍यापक तालमेल देख रहा हूँ। हम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का इस्‍तेमाल करते हुए इज़राइल के साथ सीमा-पार वित्तीय लिंक बनाने पर भी काम कर रहे हैं

माननीय सदस्यों,

मैंने बताया कि हमें रेगिस्तान में इज़राइल का कृषि संबंधी चमत्कार कितना प्रेरणादायक लगा। सटीक सिंचाई और जल प्रबंधन में इज़राइल की विशेषज्ञता ने पहले ही भारत की कृषि प्रथाओं को बदल दिया है।

हमने मिलकर भारत भर में 43 उत्‍कृष्‍टता केंद्र स्थापित किए हैं, जिन्होंने 5 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। अब हमें इसे 100 केंद्रों तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए, ताकि लाखों किसानों और मछुआरों को लाभ मिल सके।

माननीय सदस्यों,

भारत-इज़राइल साझेदारी के मूल में हमारे लोगों के पारस्‍परिक संबंध हैं। जब मैं पहली बार 2006 में इज़राइल आया था, तो इज़राइल में केवल मुट्ठी भर योग केंद्र ही थे। आज, ऐसा लगता है कि लगभग हर मोहल्ले में योग का अभ्‍यास किया जाता है!

मुझे बताया गया है कि इज़राइल में आयुर्वेद में भी रुचि बढ़ रही है। मैं अधिक से अधिक इज़राइली युवाओं को भारत आने का आमंत्रण देता हूँ। यहाँ वे हमारे समाज की जीवंतता देखेंगे, और अनुभव करेंगे कि समग्र स्वास्थ्य शरीर और मन के लिए क्या कर सकता है।

मुझे इस गरिमामय सदन को यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारतीय संसद ने इज़राइल के लिए एक संसदीय मित्रता समूह का गठन किया है। मैं आप सभी को भारत आने का आमंत्रण देता हूँ और मुझे दोनों देशों के सांसदों के बीच और अधिक आदान-प्रदान होने की प्रतीक्षा है।

मैं इस बात से बखूबी अवगत हूँ कि इज़राइल में भारतीय देखभालकर्मी और कुशल श्रमिक परिवारों और समुदायों में अपार योगदान देते हैं। उन्होंने 7 अक्टूबर सहित संकटकाल में अद्भुत साहस और समर्पण का प्रदर्शन किया है। हमें उन पर गर्व है।

जैसा कि यहूदी शिक्षाएँ हमें याद दिलाती हैं, “जो कोई एक जीवन बचाता है, वह पूरी दुनिया को बचाता है।” उनकी सेवा हमारे सहयोग के पीछे मानव संबंधों की शक्ति को दर्शाती है। हम दोनों देशों के लिए लाभकारी क्षेत्रों में श्रमिकों और पेशेवरों के आवागमन को सुविधा प्रदान करना जारी रखेंगे।

माननीय सदस्यों,

हम दोनों प्राचीन सभ्यताएँ हैं। और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि हमारी सभ्यतागत परंपराएँ दार्शनिक समानताओं को भी प्रकट करती हैं। इज़राइल में टिकुन ओलम का सिद्धांत दुनिया को बेहतर बनाने की बात करता है। भारत में वसुधैव कुटुम्बकम् यह उद्घोष करता है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। ये दोनों विचार सीमाओं से परे जिम्मेदारी का विस्‍तार करते हैं तथा समाजों से करुणा और नैतिक साहस के साथ कार्य करने का आह्वान करते हैं।

यहूदी धर्म हलाखा पर जोर देता है, जो कानून और प्रथा के माध्यम से दैनिक आचरण का मार्गदर्शन करता है। हिंदू दर्शन में धर्म की बात की गई है, वह नैतिक व्यवस्था जो कर्तव्य और सही आचरण को आकार देती है। दोनों परंपराओं में, नैतिक जीवन कर्म के माध्यम से जिया जाता है, और विश्वास आचरण के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

हमारे त्योहारों में भी एक प्यारी समानता है। आप हनुक्का को मोमबत्तियों की मधुर आभा के साथ मनाते हैं। लगभग इसी समय, हम दीपों की झिलमिलाती रोशनी के साथ प्रकाश का त्योहार दीवाली मनाते हैं। जल्द ही, भारत में खुशियों और रंगों से भरा होली का त्योहार मनाया जाएगा। और लगभग इसी समय, इज़राइल भी उत्साह और आनंद के साथ पुरिम मनाएगा।

माननीय सदस्यों,

हमारे साझा आदर्श वे गहरी बुनियाद हैं, जो हमारी आधुनिक साझेदारी को शक्ति प्रदान करते हैं। हम ऐसे लोकतंत्र हैं, जिन्हें इतिहास ने आकार दिया है और जिनका ध्‍यान भविष्य पर केंद्रित हैं। हमारी साझेदारी साझा अनुभव और साझा आकांक्षाओं पर आधारित है। हमारी मजबूत साझेदारी केवल राष्ट्रीय हितों की ही पूर्ति नहीं करती, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि में भी योगदान देती है।

आइए हम सुनिश्चित करें कि अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया में भारत और इज़राइल की मित्रता शक्ति का स्रोत बनी रहे।

अम यिस्राएल चाई

जय हिंद

धन्‍यवाद

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पीके/केसी/आरके


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