वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'शून्य दोष, शून्य प्रभाव' के विजन को भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का मूल आधार बताया; उन्होंने कहा कि 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए गुणवत्ता ही कुंजी है
2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादक बनना होगा: श्री गोयल
38 विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते वैश्विक व्यापार के दो-तिहाई हिस्से को कवर करते हैं; श्री गोयल ने उद्योग जगत से उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ बाजार पहुंच का लाभ उठाने का आग्रह किया
श्री पीयूष गोयल ने विनिर्माण इको सिस्टम में गुणवत्ता को संस्थागत रूप देने के लिए पांच-स्तंभ रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की
गुणवत्ता सम्मेलन में क्षेत्र-विशिष्ट परामर्श और गुणवत्ता मंथन संवादों के माध्यम से 20 से अधिक शहरों, 14 समूहों और 50 से अधिक नियामकीय निकायों को शामिल किया गया
प्रविष्टि तिथि:
23 FEB 2026 5:03PM by PIB Delhi
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज इस बात पर बल दिया कि गुणवत्ता भारत के विनिर्माण और निर्यात तंत्र का मूलमंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का "शून्य दोष, शून्य प्रभाव" का विजन अमृत काल में भारत के विकास की आधारशिला बनेगा। श्री गोयल ने इस पहल को प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ते हुए कहा कि 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा तीन स्तंभों पर टिकी है - शून्य दोष (गुणवत्ता), शून्य प्रभाव (स्थिरता) और समान अवसर (समावेशिता)।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के सहयोग से आयोजित पहले राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, श्री गोयल, जो वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए, ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी देश केवल उपभोक्ता बनकर प्रगति नहीं कर सकता; उसे उच्च गुणवत्ता वाले सामान और सेवाओं के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त उत्पादक के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रांड इंडिया गुणवत्ता, विश्वसनीयता और भरोसे का प्रतीक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत पिछले चार वर्षों से विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है और अगले दो से ढाई वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी जीडीपी वाला देश बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देश का 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य - जिसमें अगले छह से सात वर्षों के भीतर 1 ट्रिलियन डॉलर का सामान और 1 ट्रिलियन डॉलर की सेवाएं शामिल हैं - केवल उच्च गुणवत्ता मानकों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।
श्री गोयल ने भारत की बढ़ती व्यापारिक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन से साढ़े तीन वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ हुए नौ मुक्त व्यापार समझौतों के तहत अब वैश्विक जीडीपी और व्यापार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा शामिल है। उन्होंने कहा कि ये समझौते वस्त्र, चमड़ा, जूते और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खोलते हैं, बशर्ते भारतीय उत्पाद लगातार उच्चतम वैश्विक मानकों को पूरा करते रहें। उन्होंने दोहराया कि प्रतिस्पर्धी और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भी वैश्विक व्यापार में भारत की वर्तमान हिस्सेदारी अभी भी कम है, और उन्होंने उद्योग जगत से इन समझौतों के माध्यम से सृजित नए बाजार पहुंच अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
श्री गोयल ने पूर्व की चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं को कभी "निर्यात गुणवत्ता" वाले उत्पादों की तलाश करनी पड़ती थी, जो दोहरी गुणवत्ता वाली व्यवस्था को दर्शाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी संस्कृति को पूरी तरह से बदलकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए एक समान और उच्च मानकों को लागू करना आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और समूहों में व्यापक परामर्श के माध्यम से गुणवत्ता का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की सराहना की।
श्री गोयल ने गुणवत्ता को संस्थागत रूप देने के लिए पांच स्तंभों वाली कार्ययोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक के चरण-विशेष रूप से वस्त्र जैसे क्षेत्रों में अपव्यय को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कार्यबल का कौशल विकास और पुनः कौशल विकास; प्रतिस्पर्धात्मकता तथा पर्यावरणीय परिणामों में सुधार के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ अंतर विश्लेषण और बेंचमार्किंग करना; देरी तथा लागत को कम करने के लिए परीक्षण और प्रमाणन प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करना; तथा विनिर्माण समूहों में आधुनिक, स्वचालित परीक्षण सुविधाओं के माध्यम से साझा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना- में स्पष्ट रूप से परिभाषित मानक संचालन प्रक्रियाओं के सख्त अनुपालन और निरंतर निरीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री गोयल ने आश्वासन दिया कि उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण बुनियादी ढांचे की स्थापना में धन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने उद्योग जगत को निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्वीकृतियों और अनुपालन आवश्यकताओं, जिनमें रीच विनियम, सीबीएएम सत्यापन, एसपीएस और टीबीटी उपाय, और अन्य गैर-टैरिफ बाधाएं शामिल हैं, के लिए सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विशेष रूप से लाभ होगा।
श्री गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को संदर्भित करते हुए दोहराया कि भारत को वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता की गारंटी के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता के प्रति जागरूकता प्रधानमंत्री के हालिया सार्वजनिक भाषणों का एक प्रमुख विषय रहा है। उन्होंने "चलता है" वाली मानसिकता को सभी स्तरों - प्रमोटरों और निदेशकों से लेकर कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों और प्रयोगशालाओं और बैक ऑफिस के कर्मचारियों तक - पर उत्कृष्टता की संस्कृति से बदलने का आह्वान किया।
उन्होंने प्रतीकात्मक “मंथन” प्रक्रिया पर भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से अमृत निकला, उसी प्रकार इस सम्मेलन के अंतर्गत किए गए परामर्श प्रयासों से भी दैनिक कार्यों में गुणवत्ता, विश्वास और उत्कृष्टता का अमृत प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने भारत के विनिर्माण तंत्र में गुणवत्ता को गहराई से स्थापित करने के उद्देश्य से उद्योग जगत की पहलों का समर्थन करने के लिए सरकार की तत्परता को दोहराया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अवसरों के विस्तार के साथ, भारत को गुणवत्ता-आधारित विनिर्माण की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन जैसे मंच भारत को एक विश्वसनीय विनिर्माण और निर्यात गंतव्य के रूप में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डीपीआईआईटी के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के औद्योगिक इको सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और संस्थानों के बीच गुणवत्ता-आधारित नीतिगत ढांचों पर आधारित समन्वित भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्ता सुधार को वैश्विक मांग को पूरा करने, अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाने और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के एक विश्वसनीय हिस्से के रूप में स्थापित करने के लिए एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बताया।
गुणवत्ता आयोग (क्यूसीआई) के अध्यक्ष श्री जैक्सय शाह ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता को केवल ऑडिट और प्रमाणन तक सीमित न रखकर, कारखाने के स्तर पर दैनिक अनुशासन के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लिए गुणवत्ता केवल एक मार्ग नहीं बल्कि लक्ष्य है।
राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है, जो उद्योग और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ व्यापक जमीनी परामर्श पर आधारित है। इसका उद्देश्य कारखाने और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी जानकारियों को सीधे तौर पर प्राप्त करना और उन्हें नीतिगत विचार-विमर्श और क्षेत्र-विशिष्ट गुणवत्ता रोडमैप के विकास में एकीकृत करना है। सम्मेलन के पहले चरण में वरिष्ठ नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, नियामकों और चार प्राथमिकता प्राप्त विनिर्माण क्षेत्रों - वस्त्र, चमड़ा, जूते और फार्मास्यूटिकल्स - के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया। इन क्षेत्रों को उनकी मजबूत निर्यात क्षमता, एमएसएमई की व्यापक भागीदारी और रोजगार सृजन में योगदान के लिए चुना गया है।
इस सम्मेलन ने व्यावहारिक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए बीस से अधिक शहरों में दो महीने तक चलने वाली, साक्ष्य-आधारित, क्षेत्र-विशिष्ट सहभागिता प्रक्रिया अपनाई। चमड़ा क्षेत्र में, 65 से अधिक उद्योग हितधारकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों की भागीदारी के साथ 25 से अधिक राष्ट्रव्यापी परामर्श और 15 से अधिक गुण मंथन संवाद आयोजित किए गए। वस्त्र क्षेत्र में, 10 से अधिक हितधारकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को शामिल करते हुए 30 से अधिक राष्ट्रव्यापी परामर्श और 10 से अधिक गुण मंथन संवाद आयोजित किए गए, जबकि फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में 55 से अधिक हितधारकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को शामिल करते हुए 7 से अधिक राष्ट्रव्यापी परामर्शों के माध्यम से केंद्रित चर्चाएँ हुईं। इस कार्यक्रम में 14 विनिर्माण समूहों को शामिल किया गया और निजी क्षेत्र के हितधारकों और सरकारी एजेंसियों दोनों को शामिल करते हुए दोहरी रणनीति के माध्यम से 50 से अधिक सरकारी और नियामक निकायों को शामिल किया गया।
राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन को क्षेत्र-केंद्रित कार्यकलापों की एक सतत श्रृंखला के हिस्से के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसमें डीपीआईआईटी और क्यूसीआई विनिर्माण क्षेत्रों में नियमित परामर्श करेंगे ताकि गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों का व्यवस्थित रूप से समाधान किया जा सके, उद्योग-सरकार समन्वय को मजबूत किया जा सके और गुणवत्ता-आधारित औद्योगिक विकास के लिए निरंतर गति प्रदान की जा सके। सम्मेलन के परिणाम विनिर्माण के लिए एक राष्ट्रीय गुणवत्ता रोडमैप के विकास में योगदान देंगे, जो आगामी अवधि में सरकार, नियामकों और उद्योग के बीच समन्वित कार्रवाई का मार्गदर्शन करेगा।
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(रिलीज़ आईडी: 2231847)
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