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भारत में समावेशी वॉइस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा: नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स


टूलकिट का शुभारंभ

प्रविष्टि तिथि: 21 FEB 2026 1:05PM by PIB Delhi

वॉइस टेक्नोलॉजी भारत में डिजिटल समावेशन का मूलभूत आधार बन रही है, जो लाखों लोगों के सार्वजनिक सेवाओं, सूचनाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के तरीके को आकार दे रही है। इसी पृष्ठभूमि में, 20 फरवरी, 2026 को इंडिया एआई समिट एक्सपो 2026 में वॉइस टेक्नोलॉजी पर एक नई नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य खुली, समावेशी और जिम्मेदार वॉइस टेक्नोलॉजी को समर्थन देने के लिए एक नीति और व्यवहारिक ढांचा तैयार करना है।

नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट को आर्टपार्क @आईआईएससी, डिजिटल फ्यूचर्स लैब और ट्राइलीगल ने संयुक्त रूप से विकसित किया था, जिसमें भाषिनी और फेयर फॉरवर्ड - एआई फॉर ऑल पहल का सहयोग था। इसे जीआईजेड (जर्मन विकास सहयोग) ने कार्यान्वित किया था और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (बीएमजेड) ने फंड मुहैया कराया था , जो भारत में जिम्मेदार स्पीच टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और परितंत्र सहयोग को एक साथ लाता है।

भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में, वॉइस टेक्नोलॉजीज डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो वाक्-आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं। हालांकि, वॉइस टेक्नोलॉजीज के विकास और उपयोग से डेटा प्रबंधन, समावेशन, पारदर्शिता, गुणवत्ता और ज़िम्मेदार उपयोग से संबंधित जटिल प्रश्न भी उठते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत ढांचों, तकनीकी प्रक्रियाओं और परितंत्र स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है।

नीति रिपोर्ट में भारत में खुले और ज़िम्मेदार वाक् प्रणालियों के निर्माण में डेटा संग्रहण और मॉडल विकास से लेकर बुनियादी ढांचे और शासन प्रथाओं तक आने वाली प्रमुख बाधाओं का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट में वॉइस-टेक्नोलॉजी परितंत्र को मजबूत करने के लिए लक्षित नीतिगत सिफारिशें की गईं हैं। इनमें मूलभूत वाक् डेटासेट को डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में मानना, मॉडलों की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार करना, टिकाऊ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश करना और नवाचार को सक्षम बनाते हुए दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को शामिल करना शामिल है।

डेवलपर्स टूलकिट भारतीय भाषा के वॉइस डेटासेट पर काम करने वाले और वॉइस एप्लिकेशन बनाने वाले डेवलपर्स के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों को उजागर करके नीति विश्लेषण का पूरक है। यह भारत के स्पीच और लैंग्वेज टेक्नोलॉजी परितंत्र में संरचनात्मक कमियों की पहचान करता है, जिनमें असमान डेटा प्रतिनिधित्व, कमजोर गुणवत्ता आश्वासन तंत्र, सीमित मूल्यांकन पद्धतियां और खंडित शासन संरचनाएं शामिल हैं। यह मानते हुए कि विकास चक्र के दौरान अक्सर भेदभावपूर्ण परिणाम अंतर्निहित होते हैं, यह टूलकिट समावेशी और मजबूत स्पीच एआई सिस्टम बनाने के लिए एक स्तरित, जीवनचक्र-उन्मुख दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह उत्पाद की अवधारणा से लेकर तैनाती तक की चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत के वॉइस टेक्नोलॉजी परितंत्र में वर्तमान में अपनाए जा रहे व्यावहारिक दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करता है।

डिजिटल इंडिया, भाषिणी डिवीजन के सीईओ श्री अमिताभ नाग ने कहा, भारत जिस तरह से आवाज-प्रधान डिजिटल परितंत्र की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में यह जरूरी है कि हम इस बदलाव को मजबूत नीतिगत आधारों और व्यावहारिक कार्यान्वयन ढांचों पर आधारित करें। भाषाई विविधता से भरपूर देश में, वॉइस टेक्नोलॉजीज महज़ एक नवाचार नहीं हैं, बल्कि डिजिटल समावेशन का एक साधन हैं। आज जारी की गई नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट भारत में खुली, समावेशी और जिम्मेदार स्पीच टेक्नोलॉजीज के निर्माण के लिए एक संरचित रोडमैप प्रदान करते हैं। नीतिगत सिफारिशें परितंत्र में सामंजस्य बनाने का मार्गदर्शन करती हैं, वहीं डेवलपर्स टूलकिट इन सिद्धांतों को एआई डेटा संग्रह और मॉडल विकास से लेकर परिनियोजन और शासन तक जीवनचक्र के सभी चरणों में व्यावहारिक प्रथाओं में बदलता है। जैसे-जैसे स्पीच टेक्नोलॉजीज परिपक्व होंगी, मानक, मूल्यांकन ढांचे और तकनीकी टूलकिट विकसित होते रहेंगे। इस यात्रा के लिए मौजूदा डिजिटल और आईटी बुनियादी ढांचे का व्यवस्थित पुनर्गठन भी आवश्यक होगा ताकि आवाज को सक्षम, बहुभाषी और अंतरसंचालनीय बनाया जा सके। सहयोगात्मक परितंत्र प्रयासों के माध्यम से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आवाज भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की वह मूलभूत परत बन जाए, जो भाषा, साक्षरता और डिजिटल विभाजन को बड़े पैमाने पर पाट सके।

जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय में वैश्विक स्वास्थ्य, अवसर की समानता, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और खाद्य सुरक्षा विभाग की महानिदेशक डॉ. एरियन हिल्डेब्रांड्ट ने कहा, "यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और तकनीकी समुदाय दोनों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और सबकों से भरपूर है। बीएमजेड के लिए, यह डिजिटल समावेशन के लिए एक साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और डिजिटल विभाजन को पाटने के बारे में भी है। लाखों लोगों के लिए, आवाज डिजिटल दुनिया से जुड़ने का सबसे स्वाभाविक और शक्तिशाली माध्यम है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी साक्षरता सीमित है या डिजिटल बुनियादी ढांचे तक उनकी पहुंच कम है। जब वॉयस एआई स्थानीय भाषाओं और बोलियों में काम करता है, तो यह सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और आर्थिक भागीदारी का द्वार बन जाता है। "

भाषाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और एआई नीतिशास्त्रियों के साथ कई दौर की बातचीत के माध्यम से तैयार की गई यह नीति रिपोर्ट और डेवलपर टूलकिट भारत के लिए आवाज-प्रधान बहुभाषी समाधानों में भाषिणी के बढ़ते काम में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जिसका उद्देश्य संचार अंतराल को पाटना और भाषाई तथा डिजिटल बाधाओं को तोड़ना है।

साझेदारों के बारे में

भाषिणी एआई-संचालित भाषा अनुवाद मंच है, जो साक्षरता, भाषा और डिजिटल असमानताओं को दूर करता है। भाषिणी अभिनव वॉयस मल्टीलिंगुअल एआई समाधानों के माध्यम से संचार को नया रूप दे रहा है। इसका मिशन भाषा और प्रौद्योगिकी को सभी के लिए सुलभ बनाना है, जिसके लिए यह निर्बाध संचार हेतु आवाज-प्रधान बहुभाषाई समाधान प्रदान करता है, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा सह-निर्माण एआई मंच है, और समावेशिता के लिए भाषा, साक्षरता और डिजिटल बाधाओं को तोड़ता है।

जीआईजेड और फेयर फॉरवर्ड - सभी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

जर्मन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग संगठन (जीआईजेड) जीएमबीएच एक संघीय उद्यम है जिसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में 50 से अधिक वर्षों का अनुभव है। जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय (बीएमजेड) की ओर से, जीआईजेड "फेयर फॉरवर्ड - सभी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" परियोजना को कार्यान्वित करता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर एआई के प्रति अधिक खुले, समावेशी और टिकाऊ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

आर्टपार्क @ आईआईएससी

आर्टपार्क एक स्टार्टअप इनक्यूबेशन और एक्सेलेरेटर प्रोग्राम है जिसे स्टार्टअप के नवाचार से इनक्यूबेशन तक के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उद्यमियों और शोधकर्ताओं को अनुसंधान नवाचारों और दिन-प्रतिदिन की चुनौतियों को हल करने में उनके अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटकर, विशेष रूप से एआई और रोबोटिक्स परितंत्र में, विचारों को प्रयोगशालाओं से बाजार तक ले जाने में सक्षम बनाता है

डिजिटल फ्यूचर लैब्स

डिजिटल फ्यूचर्स लैब एक स्वतंत्र, अंतःविषयक अनुसंधान स्टूडियो है जो भारत और बहुसंख्यक विश्व में प्रौद्योगिकी और समाज के बीच जटिल अंतर्संबंधों का अध्ययन करता है। डीएफएल साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, व्यवस्थित दूरदर्शिता और सार्वजनिक सहभागिता के माध्यम से न्यायसंगत, सुरक्षित और टिकाऊ डिजिटल भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने के लिए काम करता है

ट्राइलीगल

ट्राइलीगल भारत की एक पूर्ण-सेवा विधि फर्म है जिसे 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यह फर्म फॉर्च्यून 500 कंपनियों, वैश्विक निवेश फंडों, प्रमुख भारतीय कंपनियों, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैंकों, प्रौद्योगिकी और मीडिया कंपनियों, पारिवारिक कार्यालयों और उच्च संपत्ति के मालिकों सहित विभिन्न प्रकार के ग्राहकों को सलाह देती है।

नैसकॉम एआई

नैसकॉम भारत के 280 अरब डॉलर से अधिक के प्रौद्योगिकी उद्योग का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका उद्देश्य देश को विश्व के अग्रणी प्रौद्योगिकी परितंत्र के रूप में स्थापित करना है। यह उद्योग के सभी क्षेत्रों में फैली 3,500 से अधिक सदस्य कंपनियों के एक विविध और प्रभावशाली समुदाय को एक साथ लाता है। नैसकॉम एआई, भारत के एआई परितंत्र की आवाज़, नैसकॉम की एक रणनीतिक पहल है जो भारत में एक जीवंत, नवोन्मेषी और टिकाऊ एआई परिदृश्य को पोषित करने के लिए समर्पित है। यह परितंत्र के हितधारकों के लिए एआई क्षमताओं का निर्माण करने, विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग को गति देने और कार्यक्रमों और पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से एआई के जिम्मेदार विकास और तैनाती को आगे बढ़ाने के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में कार्य करता है।

नीचे दिए गए लिंक देखें: -

समावेशी डिजिटल भारत के लिए भारतीय वॉइस टेक्नोलॉजी,

एक खुला और जिम्मेदार वॉइस टेक्नोलॉजी परितंत्र का निर्माण

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पीके/केसी/एके


(रिलीज़ आईडी: 2231187) आगंतुक पटल : 153
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