आयुष
अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 में वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श के केंद्र में उभरा आयुष
केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा , “आयुष अब हाशिए पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श के केंद्र में है”
“भारत एक एकीकृत, मानव-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए नेतृत्व करने और सहयोग देने के लिए तैयार है”
28 देशों की भागीदारी; अनुसंधान, नियामकीय सामंजस्य और निवेश साझेदारियों को मजबूत करने पर विशेष जोर
सम्मेलन ने पारंपरिक चिकित्सा कूटनीति में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ किया
प्रविष्टि तिथि:
18 FEB 2026 7:15PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने दुबई में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (IACE 2026) का उद्घाटन किया और बाद में उसके समापन सत्र को संबोधित किया, जो पारंपरिक और समेकित स्वास्थ्य प्रणालियों की वैश्विक स्वीकृति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
मंत्री ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ प्रेषित कीं और एक एकीकृत, निवारक तथा सतत वैश्विक स्वास्थ्य पारितंत्र के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
विश्व भर से आए अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों, शोधकर्ताओं, उद्योग नेताओं और प्रैक्टिशनरों को संबोधित करते हुए श्री जाधव ने कहा कि आयुष प्रणालियाँ — आयुर्वेद, योग, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी — प्रकृति के साथ सामंजस्य में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण को संबोधित करने वाले समग्र दृष्टिकोण के रूप में बढ़ती हुई मान्यता प्राप्त कर रही हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वभर में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियाँ, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ निवारक और समग्र समाधानों की मांग करती हैं, और आयुष शरीर, मन और पर्यावरण को एकीकृत करने वाले प्रमाण-समर्थित हस्तक्षेप प्रदान करता है।
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान लगभग 28 देशों के प्रतिभागियों ने परामर्श, वैज्ञानिक चर्चाओं और साझेदारियों में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक चिकित्सा अब वैश्विक स्वास्थ्य संवाद के केंद्र में है।
सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम मन-शरीर स्वास्थ्य के लिए आयुष हस्तक्षेपों पर एक प्रारूप अंतरराष्ट्रीय श्वेतपत्र (व्हाइट पेपर) पर विस्तृत विचार-विमर्श रहा। इस दस्तावेज़ का उद्देश्य वैश्विक समझ को अनुभव-आधारित प्रथाओं से प्रमाण-आधारित सत्यापन की ओर, अलग-थलग पद्धतियों से संरचित उपचार प्रोटोकॉल की ओर, और समानांतर प्रणालियों से एकीकृत स्वास्थ्य ढाँचों की ओर ले जाना है। अंतिम रूप दिए जाने के बाद, इसके सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और समेकित चिकित्सा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए एक संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में कार्य करने की अपेक्षा है।
मंत्री ने याद दिलाया कि पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित WHO वैश्विक शिखर सम्मेलन, जो नई दिल्ली में आयोजित हुआ था, तथा दिल्ली घोषणा ने पारंपरिक चिकित्सा के प्रमाण सृजन, सुरक्षा मानकों और जिम्मेदार एकीकरण की दिशा में वैश्विक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की थी। उन्होंने रेखांकित किया कि इस सम्मेलन ने संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, शैक्षणिक आदान-प्रदान, नियामकीय सहयोग, निवेश साझेदारियों तथा मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और आयुष सेवाओं के विस्तार को बढ़ावा देकर इस वैश्विक गति को आगे बढ़ाया। उन्होंने आयुष उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोपियल अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच वैज्ञानिक संवाद, स्वास्थ्य कूटनीति और देशों के बीच विश्वास को मजबूत करते हैं, और इस बात पर बल दिया कि आयुष संस्कृतियों और स्वास्थ्य प्रणालियों को जोड़ने वाले सेतु के रूप में कार्य कर सकता है, साथ ही वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और निवारक देखभाल का समर्थन कर सकता है।
भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि भारत एक एकीकृत, प्रमाण-आधारित और मानव-केंद्रित वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संरचना के निर्माण के लिए साझेदार देशों के साथ नेतृत्व करने और सहयोग देने के लिए तैयार है।
सम्मेलन को सफल घोषित करते हुए श्री जाधव ने कहा कि विचार-विमर्श को कार्यान्वित परिणामों और संस्थागत साझेदारियों में परिवर्तित होना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये चर्चाएँ वैज्ञानिक सहभागिता, साझेदारियों और वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक विश्वसनीय योगदानकर्ता के रूप में आयुष की स्थिति को और सुदृढ़ करेंगी।



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पीके/केसी/वीएस
(रिलीज़ आईडी: 2230144)
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