इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने औद्योगिक और शिक्षाविदों की रणनीतिक बैठक में विनिर्माण इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (एमईटी) के लिए भारत की एआई प्राथमिकताएं बताईं


श्री अश्विनी वैष्णव ने ज़िम्मेदार और स्केलेबल एआई को आगे बढ़ाने के लिए “एआई फॉर मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (एआई-एमईटी)” पर श्वेत पत्र की संकल्पना जारी की

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 4:15PM by PIB Delhi

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज प्रमुख उद्योगपतियों, वैश्विक शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के एक रणनीतिक सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसमें विशेष रूप से विनिर्माण इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी (एमईटी) इकोसिस्टम के लिए भारत की एआई प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए इसे अपनाने, कौशल विकास और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में यह बैठक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (एमईआईटीवाई) के नेतृत्व में नैमटैक द्वारा क्यूरेट की गई थी। इसमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास (आईआईटी-एम), और अन्य जाने-माने विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदाय के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, डेल टेक्नोलॉजीज़, सिस्को इंडिया, हिताची इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, रॉकवेल ऑटोमेशन, पालो ऑल्टो नेटवर्क्स, पेपाल, और इंटेल जैसी इंडस्ट्रीज़ के सी-सूट अधिकारी भी शामिल हुए।
उद्योग-शैक्षणिक समुदाय-सरकार की चर्चा में, जिसमें प्रमुख उद्योग और शैक्षणिक समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे, एआई को भारत के औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन, प्रतिस्पर्धात्मकता और नवोन्मेष के एक बुनियादी प्रवर्तक के तौर पर उजागर किया गया, जो विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय कल्पना से जुड़ा है।

यह बैठक मई 2025 में भारत मंडपम में आयोजित उद्योग-शैक्षणिक समुदाय की अकादमिक चर्चा की सफलता के बाद बुलाई गई, जिसमें भारत के औद्योगिक सुधार को सक्षम करने के लिए सामूहिक कार्य की जरूरत पर ज़ोर दिया गया था। इसलिए नैमटेक द्वारा आयोजित और कैटेलाइज़्ड मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (एमईटी) प्लेटफ़ॉर्म पर विचार किया जा रहा है, ताकि उद्योग, शैक्षणिक समुदाय और सरकार को एक साझा शासन और निष्पादन मॉडल में एक साथ लाया जा सके, और विनिर्माण को भारत के तेज़ विकास और डीकार्बोनाइज़ेशन एजेंडा के मूल में रखा जा सके।

इस कार्यक्रम में श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा एआई फॉर मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (एआई-एमईटी)” पर श्वेतपत्र संकल्पना जारी की गई। श्वेत पत्र संकल्पना उत्पादकता, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए विनिर्माण और उससे जुड़ी मूल्य श्रृंखला में एआई को समाहित करने के लिए एक रणनीतिक फ्रेमवर्क पेश करता है। यह भारत के एमईटी इकोसिस्टम में एआई को शामिल करने के लिए उद्योग, शैक्षणिक समुदाय और नीति निर्माताओं के बीच तालमेल स्थापित करने की प्रक्रिया बताता है।

इस अवसर पर श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विकसित भारत की ओर भारत के सफ़र का एक बुनियादी स्तम्भ है। विनिर्माण इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में एआई को जोड़कर, हम उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत कर सकते हैं, और नवोन्मेष और उद्यमिता के लिए नए अवसर खोल सकते हैं। हमारा ध्यान मुख्य रुप से एक ऐसा एआई इकोसिस्टम बनाने पर है जो एंटरप्राइज और एमएसएमई को मज़बूत बनाए, साथ ही भारत के कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करे। एआई-एमईटी व्हाइट पेपर जैसी पहल उस तरह के कोलेबोरेटिव, मिशन-ड्रिवन अप्रोच को दिखाती है जिसकी ज़रूरत टेक्नोलॉजिकल क्षमता को ज़मीनी नतीजों में बदलने के लिए है। मुझे खुशी है कि नैमटैक ने इस साझा राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए उद्योग, शैक्षणिक समुदाय और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने में बढ़त ली है। नैमटैक से मेरा अनुरोध है कि वह इस मौके का इस्तेमाल अगले स्तर की प्रतिभा विकसित करने के लिए करे जिससे भारत सटीक उपकरणों का एक बड़ा निर्माता बन सके।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), बोस्टन, अमेरिका के एकेडमिक एडवांसमेंट के चांसलर, प्रोफेसर एरिक ग्रिमसन ने कहा, भारत की एआई यात्रा का अगला चरण इसकी क्षमता से एप्लिकेशन तक जाने की क्षमता से तय होगा। इंडस्ट्री, एंटरप्राइजेज और एमएसएमई में एआई को शामिल करना, बड़े पैमाने पर कौशल में निवेश करना, और यह सुनिश्चित करना कि नवोन्मेष सबको साथ लेकर चले। इसके लिए शैक्षणिक समुदाय और उद्योग तथा सरकार के बीच लगातार सहयोग की ज़रूरत है ताकि ऐसी व्यवस्था बनाई जा सके जो अनुसंधान और टेक्नोलॉजी को वास्तविक दुनिया के नतीजों में बदल सके।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के कार्यकारी निदेशक- विनिर्माण और समूह, श्री प्रवीण पंचाग्नुला ने कहा, भारत के औद्योगिक क्षेत्र में एआई का असर शॉप फ्लोर और कॉम्प्लेक्स इंजीनियरिंग सिस्टम में इसकी तैनाती से तय होगा। एमएसएमई के बीच इसे अपनाने में मदद करना, साथ ही कार्यबल के लक्षित कौशल और अपस्किलिंग, मज़बूत और ग्लोबली प्रतिस्पर्धात्मक विनिर्माण मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए ज़रूरी होगा।

सिस्को इंडिया के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के निदेशक श्री विनोद करुममपोयिल ने कहा, जैसे-जैसे एआई आधुनिक विनिर्माण का ज़रूरी हिस्सा बनता जा रहा है, कार्यबल में मज़बूत एप्लीकेशन-ओरिएंटेड कौशल जरूरी है। उद्योग और शैक्षणिक संस्थान के बीच करीबी सहयोग यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी होगा कि एआई को ज़िम्मेदारी से और बड़े पैमाने पर तैनात करने के लिए प्रतिभा तैयार हो, जिससे भारत के विननिर्माण इकोसिस्टम में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता मज़बूत हो।

पालो ऑल्टो नेटवर्क्स की एमडी और वाइस प्रेसिडेंट- इंडिया और सार्क, सुश्री स्वप्ना बापट ने कहा, साइबर सुरक्षा और आईटी के माहौल में, खराब तरीके से डिज़ाइन की गई ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) एक बड़ा खतरा पैदा करती है। एक सुरक्षित, एंटरप्राइज़-ग्रेड नेटवर्क डिज़ाइन करने के लिए तीन ज़रूरी चीज़ों की ज़रूरत होती है। जैसे-जैसे एआई मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग का आधार बनता जा रहा है, हमें कार्यबल में एप्लिकेशन-ओरिएंटेड स्किल्स बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमारा लक्ष्य शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को कम करना है, स्कूलों में मॉडर्न नेटवर्क सिक्योरिटी प्रिंसिपल्स लाना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र कार्यस्थल पर तुरंत तैनाती के लिए तैयार हों।

रॉकवेल ऑटोमेशन के इंडिया के प्रबंध निदेशक, श्री दिलीप साहनी ने कहा, भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए एआई का असली असर तब महसूस होगा जब इसे इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन सिस्टम में इसे जोड़ा जाएगा और उत्पादन माहौल में बड़े पैमाने पर असरदार तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल नवोन्मेष और शॉप-फ्लोर निष्पादन के बीच की खाई को भरने के लिए इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार के बीच मजबूत सहयोग की ज़रूरत है। इस तरह की पहल एडॉप्शन को तेज़ करने, वर्कफोर्स कैपेबिलिटी को मज़बूत करने और भारत की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए ज़रूरी इकोसिस्टम बनाते हैं।

डॉ. इब्राहिम हफीज़ुर रहमान, ऑपरेटिंग डायरेक्टर जनरल और सीईओ, नैमटैक ने कहा, वास्तविक दुनिया के इंडस्ट्रियल कॉन्टेक्स्ट में शिक्षा को स्थापित करके नैमटैक का मकसद यह दिखाना है कि कैसे एप्लीकेशन-ओरिएंटेड लर्निंग प्रोडक्शन एनवायरनमेंट में टैलेंट के डे-ज़ीरो डिप्लॉयमेंट को इनेबल कर सकती है। एमईटी प्लेटफॉर्म और उद्योग और शैक्षणिक समुदाय के साथ साझेदारी के ज़रिए, यह दृष्टिकोण भारत की विनिर्माण  इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में परिवर्तन के लिए कार्यबल तैयार करने के लिए स्केलेबल मॉडल बनाने में मदद कर सकता है।

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