रेल मंत्रालय
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भारतीय रेलवे की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है और यह संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों तथा नियंत्रण कक्ष को समय रहते अलर्ट जारी करने के उद्देश्य से डिजाइन की गई है


एनएफआर (403.42 वर्ग किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 वर्ग किलोमीटर), एसआर (55.85 वर्ग किलोमीटर), एनआर (52 वर्ग किलोमीटर), एसईआर (55 वर्ग किलोमीटर), एनईआर (99.18 वर्ग किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 वर्ग किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 वर्ग किलोमीटर) को कवर करने वाले क्षेत्रों में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) से संबंधित कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 4:56PM by PIB Delhi

रेल मंत्रालय ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय से रेल पटरियों पर हाथियों के टकराने से रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

(i) अपनाए गए नवोन्मेषी उपायों में एक प्रमुख पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) का विकास है, जो वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक के माध्यम से रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है। इस प्रणाली में ऑप्टिकल फाइबर, आवश्यक हार्डवेयर और हाथियों की गतिविधि से संबंधित पूर्व-परिभाषित संकेतों का समावेश किया गया है। यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि की सूचना समय रहते लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों एवं नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाने हेतु चेतावनी संदेश उत्पन्न करती है, जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए त्वरित व प्रभावी निवारक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

वर्तमान में, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में वन विभाग द्वारा चिन्हित महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील स्थलों पर 141 किलोमीटर से अधिक लंबाई में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) कार्यरत है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे के विभिन्न चिन्हित गलियारों में भी आईडीएस से संबंधित कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन गलियारों में एनएफआर (403.42 किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 किलोमीटर), एसआर (55.85 किलोमीटर), एनआर (52 किलोमीटर), एसईआर (55 किलोमीटर), एनईआर (99.18 किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 किलोमीटर) शामिल हैं।

(ii) हाथियों के साथ ट्रेन की टक्कर की किसी भी घटना की स्थिति में, संबंधित क्षेत्रीय रेलवे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की जांच करता है और उसके आधार पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। इन उपायों में चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर उपयुक्त गति सीमाओं का निर्धारण, ट्रेन कर्मचारियों एवं स्टेशन मास्टरों को सतर्क करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ट्रेन कर्मचारियों को अद्यतन जानकारी प्रदान करने और उनकी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संबंधित वन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान ऐसी घटनाओं की औसत संख्या लगभग 16 प्रति वर्ष रही है।

(iii) चिन्हित स्थानों पर हाथियों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण।

(iv) रेल लाइनों की ओर हाथियों को आने से रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों में पटरियों के किनारे उपयुक्त बाड़ लगाना।

(v) लोको पायलटों को पूर्व चेतावनी देने के लिए सभी चिन्हित हाथी गलियारों पर साइनेज बोर्ड उपलब्ध कराना।

(vi) रेलवे भूमि के भीतर पटरी के आसपास की वनस्पति और खाद्य पदार्थों की सफाई।

(vii) वन क्षेत्र में सौर प्रणाली के साथ एलईडी लाइटें उपलब्ध कराना।

(viii) स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों को सतर्क करने के लिए समय पर कार्रवाई हेतु वन विभाग द्वारा नियुक्त हाथी ट्रैकर्स की तैनाती की जाती है।

(ix) रेल पटरियों के पास जंगली जानवरों/हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए लेवल क्रॉसिंग पर मधुमक्खी की आवाज करने वाले नए उपकरण लगाए गए हैं। इस उपकरण से उत्पन्न ध्वनि हाथियों को रेल पटरी से दूर भगाने का काम करती है।

(x) रात/खराब दृश्यता के दौरान सीधी पटरी पर जंगली जानवरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए थर्मल विजन कैमरे का भी परीक्षण किया जा रहा है, जो लोको पायलटों को जंगली जानवरों की उपस्थिति के बारे में सचेत करता है।

यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एनके/डीए


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