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वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट: पूंजीगत वस्तु क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 2:45PM by PIB Delhi

प्रमुख बातें

  • सरकारी पूंजीगत परिव्यय वित्त वर्ष 2018 में 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (बीई) में 11.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 4.2 गुना की बढ़ोतरी दर्शाता है।
  • केंद्रीय बजट वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपये घोषित किया गया।
  • दिसंबर 2025 में आईआईपी के अंतर्गत पूंजीगत वस्तुओं में वार्षिक आधार पर 8.1% की बढ़ोतरी हुई।
  • ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण योजना और नई सीआईई एवं हाई-टेक टूल रूम पहलों की घोषणा की गई।
  • टोल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए पांच साल की कर छूट के साथ-साथ कई क्षेत्रों में पूंजीगत वस्तुओं पर सीमा शुल्क छूट की घोषणा की गई।

 

प्रस्तावना

भारत का पूंजीगत वस्तु क्षेत्र, सरकारी अवसंरचना निवेश और विनिर्माण क्षेत्र को दिए जा रहे मजबूत प्रोत्साहन के बल पर, भारत की औद्योगिक नीति का एक रणनीतिक आधारशिला है। यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था में अवसंरचना विस्तार, औद्योगिक क्षमता निर्माण और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण चालक है।

उच्च परिशुद्धता वाले विनिर्माण क्षमता के निर्माण, तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण के उद्देश्य से, पूंजीगत वस्तु क्षेत्र सरकारी नीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। देश के आर्थिक विकास के लिए इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए, लक्षित प्रोत्साहनों और सुदृढ़ नियामक ढांचों के माध्यम से इस क्षेत्र के विस्तार को निरंतर सहयोग दिया गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 इस दिशा को और सुदृढ़ करता है, जिसमें बढ़ते व्यापार और बढ़ती पूंजी जरूरतों से भरी और तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था को सहयोग देने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

तीन कर्तव्य सिद्धांतों के आधार पर तैयार किए गए केंद्रीय बजट में विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में हस्तक्षेप प्रस्तावित करते हुए आर्थिक विकास को गति देने और उसे बनाए रखने को प्रथम प्राथमिकता दी गई है। पूंजीगत वस्तुओं का विकास इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक बना हुआ है, जिसमें घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और बुनियादी ढांचे के निर्माण के उद्देश्य से क्षेत्र-विशिष्ट योजनाओं और निरंतर पूंजीगत खर्च पर जोर दिया गया है।

प्रस्तावित कार्यवाहियों का उद्देश्य पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देना, घरेलू क्षमता को बेहतर करना और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को सहयोग देना है।

पूंजीगत वस्तुएं

“पूंजीगत वस्तुएं” का अर्थ किसी भी प्रकार के संयंत्र, मशीनरी, उपकरण या सहायक उपकरण से है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन के लिए या सेवाओं के प्रावधान के लिए जरूरी हैं, जिनमें प्रतिस्थापन, आधुनिकीकरण, तकनीकी अपग्रेडेशन या विस्तार के लिए आवश्यक वस्तुएं भी शामिल हैं।

पूंजीगत वस्तुओं का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, खनन, कृषि, मत्स्यपालन, पशुपालन, पुष्पकृषि, बागवानी, मत्स्यपालन, मुर्गी पालन, रेशम उत्पादन और अंगूर उत्पादन के साथ-साथ सेवा क्षेत्र में भी किया जा सकता है।

 

पूंजीगत वस्तु क्षेत्र भारत के विकास के इंजन को मजबूती प्रदान कर रहा है

पूंजीगत वस्तु क्षेत्र बड़े पैमाने पर विनिर्माण और अवसंरचना परियोजनाओं को सहयोग देकर भारत की आर्थिक रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तेज शहरीकरण, लगातार अवसंरचना निवेश और मजबूत नीतिगत सहयोग से प्रेरित यह क्षेत्र दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए तैयार है।

घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने के लिए पूंजीगत वस्तुओं को मूलभूत माना जाता है। यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था पर एक मजबूत गुणक प्रभाव भी डालता है, जो समूचे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के साथ-साथ अन्य संबंधित क्षेत्रों को मशीनरी और उपकरण जैसे जरूरी इनपुट की आपूर्ति कर इस्तेमाल के लायक उद्योगों में प्रगति और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।

औद्योगिक विकास में पूंजीगत वस्तुओं की भूमिका

वित्त वर्ष 2026 में भारत की औद्योगिक विकास गति अधिक व्यापक हो गई है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र एक प्रमुख चालक के रूप में उभरा है और वर्ष के दौरान इसमें और भी तेजी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र जीवीए वित्त वर्ष 2026 में तेज हुई, जो पहली तिमाही में 7.72% और दूसरी तिमाही में 9.13% तक पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र में चल रहे संरचनात्मक बदलाव थे।

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इसके साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में व्यापक विस्तार (8.1%) और खनन क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी (6.8%) के कारण दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 7.8% की तेजी दर्ज की गई। इस प्रदर्शन में उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अंतर्गत पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसमें इसी अवधि के दौरान वार्षिक आधार पर 8.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2022 से पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र का निर्यात प्रदर्शन घरेलू उत्पादन क्षमता के विस्तार और अर्थव्यवस्था में निवेश गतिविधि के सुदृढ़ीकरण से नजदीकी से जुड़ा हुआ है। निर्यात में स्थिर तेजी दर्ज की गई, जो कि वित्त वर्ष 2024 के ₹31,621 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹33,356 करोड़ हो गया। इसी तरह, उत्पादन में शानदार उछाल देखा गया, जो बीते वित्त वर्ष के ₹1,85,858 करोड़ के मुकाबले वित्त वर्ष 2025 में ₹2,05,194 करोड़ तक पहुंच गया। आयात के मोर्चे पर, जरूरी मध्यमवर्ती वस्तुओं और पूंजीगत उपकरणों की मजबूत मांग के कारण वित्त वर्ष 2025 में मर्चेंडाइज आयात में वार्षिक आधार पर 6.3% की बढ़ोतरी हुई और यह 721.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो घरेलू मांग की मजबूती को दर्शाता है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में पूंजीगत वस्तुओं के आयात में 6.6% की बढ़ोतरी हुई और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 9.2% हो गया। ये दोनों रुझान घरेलू निवेश गतिविधि की निरंतरता और विदेशों से मंगाई गई तकनीकी रूप से उन्नत मशीनरी पर निर्भरता को उजागर करते हैं।

इसके साथ ही, तेजी से होने वाले संकेतक पूंजीगत वस्तुओं में स्वस्थ निवेश गतिविधि का संकेत देते हैं। इस क्षेत्र में कुल प्रगति, औद्योगिक गतिविधि में तेजी को दर्शाती है, जो बेहतर प्रदर्शन और आर्थिक गति में विस्तार को प्रतिबिंबित करती है।

निवेश की गति में मजबूती दर्शाने वाले उच्च-आवृत्ति संकेतक (वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि, %)

संकेतक

पहली तिमाही वित्त वर्ष 2026

दूसरी तिमाही वित्त वर्ष 2026

तीसरी तिमाही वित्त वर्ष 2026

मासिक औसत वार्षिक वृद्धि (वित्त वर्ष 2016-वित्त वर्ष 2020)

पूंजीगत वस्तु आयात

6.6

9.2

13.4

7.1

क्षमता का इस्तेमाल (% में)

74.1

74.8

--

72.9

स्रोत: आर्थिक समीक्षा 2025-26

पूंजीगत वस्तुओं का आयात क्या है?

पूंजीगत वस्तुओं के आयात को विद्युत मशीनरी और उपकरणों; लोहे और इस्पात को छोड़कर आधार धातुओं; औद्योगिक मशीनरी, जिसमें दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े इस्तेमाल के लिए मशीनरी शामिल है; मशीन टूल्स; अन्य निर्माण मशीनरी; परियोजना सामग्री; और परिवहन उपकरणों के कुल आयात के रूप में परिभाषित किया जाता है।

वित्त वर्ष 2022 से सरकारी पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी जारी है

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वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2022 के बीच सरकार के पूंजीगत खर्च में लगभग 92% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹3.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.92 लाख करोड़ हो गया। यह बढ़ोतरी बाद के वित्त वर्षों में भी जारी रही, जिससे देश भर में उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे के विस्तार के व्यापक उद्देश्य को बल मिला।

इसके साथ ही, सरकार का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2018 में ₹2.63 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (बीई) में ₹11.21 लाख करोड़ हो गया है, जो लगभग 4.2 गुना अधिक है, जबकि वित्त वर्ष 2026 (बीई) के लिए प्रभावी सार्वजनिक पूंजीगत खर्च ₹15.48 लाख करोड़ है।

पूंजीगत वस्तुओं के विस्तार का क्षेत्रीय असर

भारत का बढ़ता पूंजीगत वस्तु क्षेत्र कई औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत प्रगति को बढ़ावा दे रहा है। औद्योगिक गतिविधियों और समग्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में मशीनरी और निर्माण जैसे अन्य उद्योग भी शामिल हैं, जो देश के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक हैं। उदाहरण के लिए, घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मजबूत मांग के कारण विद्युत उपकरण क्षेत्र में बिजली उपकरणों के उत्पादन में लगातार दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ये सभी रुझान मिलकर इस बात को उजागर करते हैं कि भारत का पूंजीगत वस्तु क्षेत्र इसकी निवेश-आधारित विकास रणनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बनकर उभर रहा है, जो औद्योगिक क्षमता को मजबूत कर रहा है, बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी ला रहा है और देश की दीर्घकालिक आर्थिक गति को बनाए रख रहा है।

पूंजीगत वस्तुओं पर बजट का विशेष ध्यान: अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना

केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को भारत की प्रगति और औद्योगिक परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें पूंजीगत वस्तुओं के लिए लक्षित हस्तक्षेपों के सहयोग से सात रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है। बजट मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा परिवर्तन में इस क्षेत्र की भूमिका को मजबूत करता है, जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता मानकों में सुधार हो सके। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू क्षमता को मजबूत करना और साथ ही वैश्विक बाजारों के साथ भारत के गहन एकीकरण को सहयोग करना है।

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सार्वजनिक पूंजीगत खर्च: अवसंरचना-आधारित विकास

आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में सार्वजनिक निवेश की भूमिका को सुदृढ़ करते हुए, बजट अवसंरचना विकास को सशक्त प्रोत्साहन प्रदान करता है। वित्त वर्ष 2025-26 (बजट अनुमान) से वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में ~9% की बढ़ोतरी प्रस्तावित है, जो बढ़कर ₹12.2 लाख करोड़ हो जाएगा। वित्त वर्ष 2014-15 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च ₹2 लाख करोड़ था, जो अब कई गुना बढ़ गया है। यह अवसंरचना-आधारित विकास, निजी निवेश को आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था में उत्पादक क्षमता बढ़ाने पर लगातार जोर को रेखांकित करता है।

पूंजीगत वस्तुओं के विकास के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना

यह मानते हुए कि मजबूत पूंजीगत वस्तु क्षमता सभी उद्योगों में उत्पादकता और गुणवत्ता का आधार है, घरेलू क्षमता निर्माण के लिए कई लक्षित हस्तक्षेप प्रस्तावित किए गए हैं।

  • उच्च स्पष्टता वाले मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए, केंद्रीय लोक सेवा उद्यम (सीपीएसई) द्वारा दो स्थानों पर हाई-टेक टूल रूम स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये सुविधाएं डिजिटल रूप से सक्षम, स्वचालित सेवा केंद्रों के तौर पर कार्य करेंगी, जो कम लागत पर उच्च परिशुद्धता वाले घटकों के स्थानीयकृत डिजाइन, परीक्षण और मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा प्रदान करेंगी।
  • इसके साथ ही, उच्च मूल्य और तकनीकी रूप से उन्नत निर्माण एवं अवसंरचना उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बेहतर करने के लिए निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण संवर्धन योजना (सीआईई) प्रस्तावित की गई है। इसमें बहुमंजिला इमारतों में इस्तेमाल होने वाली लिफ्टों, अग्निशमन उपकरणों से लेकर मेट्रो परियोजनाओं और अधिक ऊंचाई वाली सड़कों के लिए सुरंग खोदने वाली मशीनरी तक, उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।
  • रसद एवं व्यापार अवसंरचना को सहयोग देने के लिए, बजट में कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना का भी प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इस योजना के लिए पांच वर्षों की अवधि में 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजटीय आवंटन किया गया है।

टोल मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को सहयोग

भारत में टोल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए, बजट में किसी भी अनिवासी इकाई को पांच साल की अवधि के लिए आयकर छूट का प्रस्ताव है, जो बॉन्डेड क्षेत्र में कार्यरत टोल निर्माता को पूंजीगत सामान, उपकरण या औजार उपलब्ध कराती है।

इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्माण में लगे टोल निर्माताओं को विशेष मदद प्रदान की गई है। प्रस्ताव के अंतर्गत, बॉन्डेड क्षेत्र में स्थित और इलेक्ट्रॉनिक सामान मैन्युफैक्चरिंग में लगे टोल निर्माता को पूंजीगत सामान, उपकरण या औजारों की आपूर्ति करने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को कर से छूट प्रदान की गई है। यह छूट 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले पांच कर वर्ष के लिए प्रस्तावित है।

इस उपाय का उद्देश्य भारतीय अनुबंध निर्माताओं पर पूंजी निवेश का बोझ कम करना है, जिससे उत्पादन लागत कम हो और भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्माण को बढ़ावा मिले। प्रस्तावित संशोधन कर वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगा।

ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिज: पूंजीगत वस्तुओं की सुगमता

ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा के समर्थन में, बजट में बैटरी के लिए लिथियम-आयन सेल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए लिथियम-आयन सेल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है।

इसके साथ ही, भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर लगने वाले मूल सीमा शुल्क को मुक्त करने का प्रस्ताव है, ताकि महत्वपूर्ण खनिजों के लिए घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा सके।

पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत सहयोग

सरकार की ओर से पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के लिए नीतिगत सहयोग में विशेष विस्तार किया गया है, जिसमें घरेलू क्षमता को बढ़ाने और भारत के निवेश-आधारित विकास चरण के अनुरूप ढलने के उद्देश्य से कई योजनाएं शामिल हैं। हालिया नीतिगत सहयोग में निम्नलिखित शामिल हैं:

उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन योजनाएं (पीएलआई)

पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सहायता करना, परिचालन दक्षता बढ़ाना और आकार एवं पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं में सफलता प्राप्त करना है, जिससे भारतीय निर्माताओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो सके। आर्थिक समीक्षा 2025-26 में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रीय लाभों पर प्रकाश डाला गया है:

  • पीएलआई-ऑटो योजना उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी वाले वाहनों और पुर्जों के निर्माण को बढ़ावा देती है। इसने सितंबर 2025 तक ₹35,657 करोड़ का निवेश आकर्षित किया और 48,974 रोजगार निर्मित किए।
  • पीएलआई-एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) योजना का उद्देश्य बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को स्थानीय बनाना है, जिसके तहत 40 गीगावॉट घंटा क्षमता आवंटित की गई है, जिससे भारत के ईवी इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में पीएलआई योजनाओं का बढ़ता प्रभाव

आर्थिक समीक्षा 2025-2026 के अनुसार, सितंबर 2025 तक 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश साकार हो चुका है, जिसके परिणामस्वरूप 18.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/ बिक्री और 12.60 लाख से अधिक (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार निर्माण हुआ है।

इसके अतिरिक्त, 12 क्षेत्रों में कुल मिलाकर ₹23,946 करोड़ के प्रोत्साहन वितरित किए गए हैं, और सभी 14 क्षेत्रों में 806 आवेदन मंजूर किए गए हैं। पीएलआई योजनाओं के अंतर्गत प्रमुख क्षेत्रों के योगदान से निर्यात ₹8.20 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।

भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना

सरकार 2022 में शुरू की गई भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के दूसरे चरण के माध्यम से पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए लक्षित उपाय कर रही है। इस योजना में छह प्रमुख घटक शामिल हैं, जिनमें नवाचार पोर्टलों के माध्यम से प्रौद्योगिकी की पहचान, उन्नत उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) की स्थापना, सामान्य इंजीनियरिंग सुविधा केंद्रों (सीईएफसी) की स्थापना, परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना का उन्नयन और व्यापक कौशल विकास पहलों का कार्यान्वयन शामिल है।

नवंबर 2025 तक, दूसरे चरण के तहत 29 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल परियोजना लागत ₹891.37 करोड़ है, जिसमें सरकार का योगदान ₹714.64 करोड़ है। इस योजना के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियों ने फ्रांस, बेल्जियम और कतर जैसे देशों के बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।

भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना एक मांग-आधारित योजना है, जिसके अंतर्गत उद्योग, प्रतिष्ठित शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी में, महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास के लिए दीर्घकालिक उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी वित्त पोषण हेतु परियोजनाओं का प्रस्ताव करता है।

निष्कर्ष

अपने कर्तव्य और सरकार के व्यापक आर्थिक विकास को गति देने के संकल्प के बल पर, पूंजीगत वस्तु क्षेत्र इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मौजूदा नीतिगत सहयोग और केंद्रीय बजट 2026-27 में पेश किए गए नए उपायों के साथ, यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत के आर्थिक विकास में मजबूत योगदान देने के लिए अच्छी स्थिति में है।

संदर्भ

वित्त मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221458&reg=3&lang=1

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219907&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221451&reg=3&lang=2

https://www.indiabudget.gov.in/doc/budget_speech.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2221425&reg=3&lang=1

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2117968&reg=3&lang=2

https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/58357641-6838-401a-b880-7cdec59285c6/FTP2023_Chapter11.pdf

भारी उद्योग मंत्रालय

https://heavyindustries.gov.in/sites/default/files/2025-02/heavy_annual_report_2024-25_final_27.02.2025_compressed.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2149750&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2042179&reg=3&lang=2

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219602&reg=3&lang=2

https://mospi.gov.in/uploads/latestreleasesfiles/1767782498513-GDP%20Press%20Note%20on%20FAE%202025-26.pdf

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

https://incometaxindia.gov.in/Documents/Budget2026/FAQs-Budget-2026.pdf

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