वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप डिजाइन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा


भारत में डिजाइन, दुनिया के लिए डिजाइन" की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए डिजाइन अधिनियम में सुधार

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 12:31PM by PIB Delhi

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने डिजाइन अधिनियम, 2000 में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए एक अवधारणा पत्र जारी किया है। इसका उद्देश्य भारत के डिजाइन संरक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण करना और इसे अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना है। अवधारणा पत्र में भारत को रियाद डिजाइन कानून संधि (डीएलटी) और औद्योगिक डिजाइनों के अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण से संबंधित हेग समझौते में शामिल करने का भी प्रस्ताव है।

प्रधानमंत्री के "भारत में डिजाइन, दुनिया के लिए डिजाइन" के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत का डिजाइन कानून डिजिटल नवाचार, आभासी उत्पादों और गहन उपभोक्ता अनुभवों से विकसित होते परिदृश्य में प्रासंगिक बना रहे।

अवधारणा नोट में उल्लिखित प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं:

  • 'आर्टिकल' और 'डिजाइन' की परिभाषा में भौतिक परिवर्तन करके वर्चुअल डिजाइनों को सुरक्षा प्रदान करना।
  • 12 महीने की छूट अवधि की शुरुआत
  • डिजाइन के प्रकाशन को 30 महीने तक स्थगित करने का विकल्प
  • डिजाइन कानून संधि के अनुरूप समयसीमा में राहत प्रावधान की शुरुआत।
  • वैधानिक क्षतिपूर्ति।
  • संरक्षण की अवधि में संशोधन।
  • एक ही आवेदन में कई डिजाइन फाइल करने की शुरुआत।
  • आवेदनों के वर्गीकरण का विकल्प
  • डीएलटी और हेग समझौते के अनुरूप अन्य विविध परिवर्तन

अवधारणा पत्र में प्रस्तावित संशोधनों का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया गया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने इसमें निहित प्रस्तावों पर हितधारकों से टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए हैं ताकि आगे की चर्चा और संशोधनों में सहायता मिल सके।

अवधारणा पत्र सार्वजनिक परामर्श के लिए डीपीआईआईटी की आधिकारिक वेबसाइट और लिंक पर उपलब्ध है।

https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2026/01/791a71ebde47d93b67560f7394be2fec.pdf

***

पीके/केसी/जेके/एम


(रिलीज़ आईडी: 2220013) आगंतुक पटल : 204
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: Urdu , English , Tamil