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संसदीय संवाद को सुदृढ़ बनाने के लिए 28वां राष्ट्रमंडल अध्यक्ष सम्मेलन

प्रविष्टि तिथि: 19 JAN 2026 4:58PM by PIB Delhi

 

प्रमुख बिन्दु

 

  • भारत ने 14 से 16 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय निकायों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का आयोजन किया।
  • 1969 में स्थापित सीएसपीओसी की नई दिल्ली में आयोजित 28वीं बैठक में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय निकायों के 61 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों का एक साथ भाग लेना ऐतिहासिक है।
  • इस सम्मेलन ने लोकतांत्रिक शासन और संवैधानिक संस्थानों को सुदृढ़ करने में विधायिकाओं की विकसित होती भूमिका पर विचार-विमर्श के लिए उच्च स्तरीय मंच प्रदान किया।
  • भारत ने ग्वेर्नसे में आयोजित सीएसपीओसी स्थायी समिति की बैठक (जनवरी 2025) की अध्यक्षता की जिसने 2026 सम्मेलन के लिए एजेंडा और संस्थागत दिशा निर्धारित की।
  • 2026 के सीएसपीओसी के विषय एआई, सोशल मीडिया, सुरक्षा और सार्वजनिक सहभागिता पर केंद्रित थे जो संसदीय कामकाज और लोकतांत्रिक सामर्थ्य के लिए उभरती चुनौतियों को दर्शाते हैं।

 

परिचय

राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (सीएसपीओसी) राष्ट्रमंडल देशों का उच्च स्तरीय संसदीय मंच है जो राष्ट्रमंडल के संप्रभु राष्ट्रों की 53 राष्ट्रीय संसदों और साथ ही 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों को एक साथ लाता है । यह विविध संवैधानिक, कानूनी और संसदीय परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले पीठासीन अधिकारियों के बीच संवाद का सुव्यवस्थित मंच प्रदान करता है।

यह सम्मेलन स्वतंत्र संसदीय निकाय के रूप में कार्य करता है और इसका राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) या राष्ट्रमंडल सचिवालय के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं है हालांकि इसकी सदस्यता राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय संस्थानों के समान है और इसकी कार्यवाही व्यापक स्तर पर संसदीय व्यवस्था के अनुकूल परिवेश के अनुरूप है।

सीएसपीओसी का आयोजन द्विवार्षिक रूप से किया जाता है और इसके मध्यवर्ती वर्ष में स्थायी समिति की बैठक आयोजित की जाती है जिसमें संस्थागत मामलों की समीक्षा की जाती है, एजेंडा को अंतिम रूप दिया जाता है और आगामी सम्मेलन के लिए संगठनात्मक निर्णय लिए जाते हैं जिससे सदस्य संसदों के बीच निरंतरता और सतत सहभागिता सुनिश्चित होती है। भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार रहा है और इसने चार बार सम्मेलन का आयोजन किया है - 1970-71, 1986, 2010 और 2026 में - जो राष्ट्रमंडल संसदीय ढांचे के भीतर इसकी सतत सहभागिता और नेतृत्व को दर्शाता है। यह 29वां सम्मेलन 2028 में लंदन में आयोजित किया जाएगा।

इतिहास और कानूनी ढांचा

राष्ट्रमंडलीय देशों के संसदीय निकायों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (सीएसपीओसी) 1969 में कनाडा के तत्कालीन हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष लुसिएन लैमोरक्स की पहल पर शुरु किया गया था। यह पहल राष्ट्रमंडलीय देशों के पीठासीन अधिकारियों के बीच संसदीय नेतृत्व, प्रक्रिया और संस्थागत एकता के लिए समर्पित सुव्यवस्थित, गैर-राजनीतिक मंच की आवश्यकता से शुरु हुई थी जिसे सभी ने महसूस किया था। इस प्रकार सीएसपीओसी की परिकल्पना इस विशिष्ट संस्थागत कमी को दूर करने, संसदीय लोकतंत्र के विभिन्न रूपों की सामूहिक समझ को बढ़ावा देने और तटस्थता और प्रक्रिया के संबंध में एकता बनाए रखने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका का समर्थन करने के लिए की गई थी।

स्थायी नियमों का ढांचा

सीएसपीओसी उन स्थायी नियमों के अंतर्गत काम करता है, जिन्हें संगठन ने स्वीकार किया है और समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाती है। ये नियम इसकी संरचना, कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले इसके आंतरिक कानूनी ढांचे का निर्माण करते हैं ।

मुख्य प्रावधान

  • इसकी सदस्यता स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्रमंडल देशों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों तक सीमित है ।
  • किसी संसद के भंग होने की स्थिति में अंतिम सेवारत पीठासीन अधिकारी उत्तराधिकारी के निर्वाचित होने तक प्रतिनिधित्व जारी रखता है।
  • उपाध्यक्ष या समकक्ष व्यक्ति पूर्ण अधिकारों के साथ स्थानापन्न के रूप में भाग ले सकते हैं, सिवाय स्थायी समिति की सदस्यता के लिए पात्रता के
  • नियमों में कार्यसूची तय करने, कार्यवाही संचालित करने, कोरम, मतदान और पदाधिकारियों के कार्यकाल के लिए प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं

स्थायी नियमों की समीक्षा इसकी स्थायी समिति की ओर से सम्मेलनों के बीच की जाती है और पूर्ण सम्मेलन की ओर से उनमें संशोधन किया जाता है जिससे उभरती संसदीय चुनौतियों से निपटने के साथ संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित होती है ।

सीएसपीओसी के उद्देश्य और कार्य

सीएसपीओसी केंद्रित जनादेश के साथ काम करता है जो संसदीय लोकतंत्र में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पीठासीन अधिकारियों के संवैधानिक दायित्व को दर्शाता है ।

मुख्य उद्देश्य: यह सम्मेलन अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की ओर से निष्पक्षता और न्यायसंगत व्यवस्था को बनाए रखता है, बढ़ावा देता है और प्रोत्साहित करता है, राष्ट्रमंडल के देशों में संसदीय लोकतंत्र के विभिन्न रूपों के बारे में ज्ञान और समझ को बढ़ावा देता है  तथा अनुभवों और कामकाज के सर्वोत्तम तौर-तरीकों के संबंध में जानकारी के सुव्यवस्थित आदान-प्रदान के माध्यम से विधायी संस्थानों को मजबूत करता है।

कामकाज के संचालन संबंधी भूमिका: यह संसदीय प्रक्रिया, नैतिकता, संस्थागत सुरक्षा उपायों और प्रशासन पर संवाद के लिए मंच प्रदान करता है। यद्यपि इसमें चर्चा के परिणामों को स्वीकार करने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता, फिर भी वे राष्ट्रमंडल देशों के संसदों पर महत्वपूर्ण मानक प्रभाव डालते हैं।

समकालीन प्रासंगिकता: सीएसपीओसी उभरती प्राथमिकताओं के अनुरूप ढलना जारी रखता है, जिसमें डिजिटल परिवर्तन (जैसे एआई का अनुप्रयोग), सार्वजनिक सहभागिता, सदस्यों की भलाई और संस्थागत स्वायत्तता और विश्वसनीयता का संरक्षण शामिल है।

 

संस्थागत संरचना और शासन

सीएसपीओसी का संस्थागत ढांचा द्विवार्षिक सम्मेलनों के बीच निरंतरता, क्षेत्रीय संतुलन और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसका संचालन मुख्य रूप से एक स्थायी समिति के माध्यम से स्थायी सचिवालय से किया जाता है।

स्थायी समिति: स्थायी समिति सम्मेलनों के बीच प्रमुख शासी निकाय के रूप में कार्य करती है। यह भविष्य के सम्मेलनों के स्थान और समय का निर्धारण करती है, एजेंडे के विषयों का प्रस्ताव रखती है, स्थायी नियमों की समीक्षा करती है और संगठनात्मक, प्रशासनिक और संचालन तंत्र संबंधी व्यवस्थाओं की देखरेख करती है जिससे सत्रों के बीच की अवधियों के दौरान निरंतरता और रणनीतिक दिशा सुनिश्चित होती है।

संरचना एवं प्रतिनिधित्व: समिति की अध्यक्षता अगली मेजबान संसद के निचले सदन के अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी करते हैं और इसमें राष्ट्रमंडल की भौगोलिक विविधता को दर्शाने वाले क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होते हैं। साथ ही पूर्व, वर्तमान और भविष्य के मेजबान देशों से चुने गए पदेन सदस्य भी इसमें शामिल होते हैं। स्थायी समिति में 15 सदस्य होते हैं। किसी विषय पर निर्णय लेने के लिए पांच सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।

सचिवालय सहायता: संगठन की स्थापना के बाद से कनाडा ने इसके लिए सचिवालय सेवाएं प्रदान की हैं जिससे संस्थागत स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित हुई है।

 

सीएसपीओसी में भारत की भूमिका

भारत ने सीएसपीओसी के साथ निरंतर ठोस जुड़ाव बनाए रखा है जो दीर्घकालिक संसदीय परंपराओं और राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय मंचों पर इसकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

भारत में 28वें सीएसपीओसी (2026) का आयोजन

भारत ने 14 से 16 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय निकायों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। दिल्ली पहुंचने पर अध्यक्षों, पीठासीन अधिकारियों और उनके साथ आए प्रतिनिधियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया जो भारत की 'अतिथि देवो भव' की भावना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान सदन में इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह इस आयोजन के राष्ट्रीय महत्व और इसके संसदीय स्वरूप पर बल देता है।

28 वें सीएसपीओसी सम्मेलन में 42 राष्ट्रमंडल देशों और चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 संसदीय नेता एक साथ आए। इस प्रकार यह इस सम्मेलन के अब तक के सबसे बड़े संस्करणों में से एक बन गया तथा विश्वसनीय और प्रासंगिक संसदीय मंच के रूप में सीएसपीओसी में निरंतर बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।

28वें सीएसपीओसी के एजेंडे की प्राथमिकताएं

14-16 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का एजेंडा विधायिकाओं और आधुनिक लोकतांत्रिक तौर-तरीकों के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों के इर्द-गिर्द तैयार किया गया था। सम्मेलन के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर विचार किया गया उनमें शामिल थे:

  • संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल उपकरणों की भूमिका ।
  • संसदीय चर्चा और संस्थागत अधिकार पर सोशल मीडिया का प्रभाव ।
  • संसद के बारे में जनता की समझ को बढ़ाना और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करना
  • संसद सदस्यों और संसदीय कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण ।

स्थायी समिति में भारत की भूमिका

तैयारी के चरण में, माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने जनवरी 2025 में ग्वेर्नसे में आयोजित सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सम्मेलन के एजेंडे और संस्थागत दिशा को आकार देने में भारत के नेतृत्व की भूमिका की पुष्टि की गई।

28वें सीएसपीओसी (भारत) का मुख्य विषय

भारत ने बैठक में बताया कि एआई और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यक्षमता को बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ ही गलत सूचना, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी चुनौतियां भी पैदा हुई हैं।

इसमें एआई के नैतिकतापूर्ण और पारदर्शी उपयोग,  उत्तरदायित्वपूर्ण सोशल मीडिया ढांचों के माध्यम से इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए विधायिकाओं की सामूहिक जिम्मेदारी के साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग करने पर भी बल दिया गया।

सीएसपीओसी की 28वीं बैठक में कुशलता, पारदर्शिता, समावेशन और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत ने बैठक में बताया कि संसद और सरकार के सामूहिक प्रयासों से बेकार कानूनों को निरस्त कर दिया गया है, कल्याणकारी कानून बनाए गए हैं और लोक-केंद्रित नीतियां तैयार की गई हैं जिससे विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की प्रगति में तेजी आई है।

भारत ने बजट और कानून की सावधानीपूर्वक जांच में संसदीय स्थायी समितियों या "मिनी-संसद" की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और पीठासीन अधिकारियों से संसदीय कामकाज में वृद्धि के लिए इन समितियों को सुदृढ़ करने का आग्रह किया।

भारत ने यह जानकारी देते हुए कि भारत की राष्ट्रपति और दिल्ली की मुख्यमंत्री महिलाएं हैं और लगभग 15 लाख महिला प्रतिनिधि ग्रामीण और स्थानीय निकायों में निर्वाचित नेताओं का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हैं, इस बात का भी उल्लेख किया कि व्यवस्था में न केवल महिलाओं की भागीदारी हो रही है बल्कि वे विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रही हैं जो विश्व स्तर पर एक बेजोड़ उपलब्धि है।

 

भारत की समकालीन स्थिति और सीएसपीओसी तथा पिछड़े और विकासशील देशों के लिए इसकी प्रासंगिकता

 

भारत ने वैश्विक नेताओं को बताया कि उसने अपनी लोकतांत्रिक शक्ति और संस्थागत क्षमता का उपयोग अपने देश और वैश्विक समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए किया है। यह टीकों का सबसे बड़ा उत्पादक है जो 150 से अधिक देशों को भी दवाएं और टीके की आपूर्ति करता है। इस्पात और चावल के उत्पादन में यह दूसरे स्थान पर है और देश के पास तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क और तीसरी सबसे बड़ी मेट्रो रेल प्रणाली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए इस बात पर बल दिया कि भारत ने विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत बना लिया है और लोकतांत्रिक संस्थाएं "स्थिरता, गति और व्यापकता" प्रदान करती हैं जहां "लोकतंत्र का अर्थ अंतिम छोर तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच" है और यह बहस और संवाद की गहरी जड़ों पर टिका है। भारत यह सुनिश्चित करते हुए जन कल्याण की भावना से काम करता है कि बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति तक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसी कल्याणकारी भावना के कारण हाल के वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा, "भारत में लोकतंत्र परिणाम देता है।"

सीएसपीओसी के ढांचे के भीतर ये विशेषताएं भारत को विश्वसनीय, मानक स्थापित करने वाले संसदीय लोकतंत्र के रूप में स्थापित करती हैं जो परंपरा और संस्थागत परिवर्तन के बीच सेतु बनाने में सक्षम है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा, भारत "हर वैश्विक मंच पर पिछड़े और विकासशील देशों की चिंताओं को मजबूती से उठाता है," और राष्ट्रमंडल तथा व्यापक रूप से पिछड़े और विकासशील देशों में विधायिकाओं को मजबूत करने में भागीदार के रूप में सीएसपीओसी में अपनी भूमिका को सुदृढ़ करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जी20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने पिछड़े और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा था।

निष्कर्ष

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 16 जनवरी को सम्मेलन के समापन सत्र में औपचारिक रूप से 29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता ब्रिटेन के हाउस ऑफ कामंस के अध्यक्ष माननीय सर लिंडसे होयल को सौंप दी और लंदन में होने वाले अगले सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। सीएसपीओसी अपने प्रतिभागी देशों में संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण गैर-राजनीतिक मंच के रूप में कार्य करता है। सीएसपीओसी पीठासीन अधिकारियों को निष्पक्षता, न्यायसंगत रूप से कामकाज और संस्थागत अखंडता बनाए रखने में सक्षम बनाकर सामूहिक संसदीय नेतृत्व को बढ़ावा देता है। अपने द्विवार्षिक सम्मेलनों और अंतर-सत्रीय स्थायी समिति के कार्यों के माध्यम से यह निरंतर संवाद, संस्थागत शिक्षा और उभरती विधायी चुनौतियों के मिलजुलकर समाधानों का समर्थन करता है। 2026 में भारत में 28वें सीएसपीओसी का आयोजन इसकी संसदीय विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करता है जिसमें प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक भागीदारी और संस्थागत सामर्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है।

संदर्भ:
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी)

राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (सीएसपीओसी)

लोकसभा संसद

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ

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