ग्रामीण विकास मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

जी-राम-जी अनुमानों या आशंकाओं पर नहीं बल्कि साक्ष्य एवं अनुभव पर आधारित है; सरकार ग्रामीण मिशनों में पारदर्शी संवाद के लिए प्रतिबद्ध है: डॉ. जितेंद्र सिंह


डिजिटल रूप से संचालित जी-राम-जी से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, फर्जी नौकरी कार्डों की समाप्ति होगी एवं ग्रामीण श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिलेगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जी-राम-जी के अंतर्गत अभिसारी योजना एवं राज्यवार मानक आवंटन से राजकोषीय अनुशासन एवं सतत ग्रामीण संपत्तियां बनेंगी

प्रविष्टि तिथि: 13 JAN 2026 7:18PM by PIB Delhi

एक उत्तरदायी सरकार का यह कर्तव्य है कि वह तथ्यों को बिना किसी प्रकार का राजनीतिक रंग दिए हुए स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे, विशेषकर तब जब नीतियां सीधे गांवों, आजीविका एवं दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिणामों को प्रभावित करती हों। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत ऊर्जा रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे लोकप्रिय एवं संक्षिपित रूप में जी-राम-जी के नाम से भी जाना जाता है, पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल अनुमानों या आशंकाओं के बजाय साक्ष्य, अनुभव एवं जमीनी हकीकतों पर आधारित है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जी-राम-जी को पूर्व के रोजगार कार्यक्रमों से सीख लेकर एक डिजिटल रूप से संचालित, विस्तारित एवं परिणाम-उन्मुख संरचना के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संपत्ति सृजन में सुधार लाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन सार्थक, मापनीय एवं ग्रामीण समुदायों के लिए प्रत्यक्ष रूप से लाभकारी हो। यह मिशन आधुनिक तकनीक जैसे जीपीएस-आधारित मॉनिटरिंग एवं एआई-संचालित मॉडल को एकीकृत करता है ताकि कार्यों और धन के उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी की एक मुख्य शक्तियों में से एक इसका सम्मिलित दृष्टिकोण है जो उन विभिन्न सार्वजनिक कार्यों को एक साथ लाता है जो पहले अलग-अलग लागू होते थे। योजना, क्रियान्वयन एवं परिणामों को एकरूप करके, यह मिशन कार्यों के दोहराव, धन के दुरुपयोग और अल्पकालिक परिसंपत्तियों को रोकने का लक्ष्य निर्धारित करता है जबकि जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना एवं कृषि श्रमिकों की उपलब्धता जैसी दीर्घकालिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ी है ताकि सार्वजनिक व्यय से सतत सामुदायिक परिसंपत्तियां प्राप्त हो।

श्री सिंह ने प्रमुख संरचनात्मक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना में गारंटीकृत वेतन रोजगार दिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है जो आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। फर्जी लाभार्थियों एवं फर्जी नौकरी कार्डों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समाप्त करने के लिए संपूर्ण प्रणाली का डिजिटलीकरण मजबूत नियंत्रण एवं संतुलन के साथ किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार की समाप्ति हो।

वित्तीय सुधार पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी मांग-आधारित एवं असीमित आवंटन से अलग वस्तुनिष्ठ मापदंडों पर आधारित राज्य-वार आवंटन मॉडल की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि धन का आवंटन केंद्र और राज्य में 60:40 अनुपात में होगा, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवश्यकतानुसार विशेष प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि यह संरचना न केवल वित्तीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है बल्कि कार्यान्वयन में राज्य की भागीदारी एवं जवाबदेही को भी बढ़ावा देती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रोजगार कार्यों को स्थानीय कृषि कैलेंडर के अनुरूप बनाने के महत्व पर भी बल दिया, ताकि ग्रामीण श्रमिक बिना किसी बाधा के कृषि कार्यों एवं मजदूरी रोजगार के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। इस प्रणाली में मौसमी लचीलापन एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसी आपात स्थितियों में 60 दिनों तक काम रोकने का प्रावधान शामिल किया गया है जिससे संवेदनशीलता और मजबूती दोनों सुनिश्चित होती हैं। मिशन के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान अब साप्ताहिक आधार पर होगा जिससे श्रमिकों की आय स्थिरता में बहुत हद तक सुधार होगा।

मिशन के मूल सिद्धांत को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईमानदार, पारदर्शी एवं उत्पादक रोजगार के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाना महात्मा गांधी के ग्रामीण सशक्तिकरण के दृष्टिकोण की भावना के साथ पूर्ण रूप से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि यह मिशन प्रतीकात्मक उपायों के बजाय वास्तविक विकास एवं उत्तरदायी शासन के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

केंद्रीय मंत्री डॉ सिंह ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा कि सरकार राष्ट्रीय हित में जी-राम-जी से संबंधित तथ्यों को निष्पक्ष रूप से संचारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह मिशन राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना, गांवों, श्रमिकों एवं देश के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए प्रतिक्रियाओं एवं सुधारों के माध्यम से निरंतर विकसित होता रहेगा।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/1(3)WYWH.JPG

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2(2)DB61.JPG

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/3(2)3F7Q.JPG

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/4(1)PAUV.JPG

***

पीके/केसी/एके


(रिलीज़ आईडी: 2214473) आगंतुक पटल : 30
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Kannada , Malayalam