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पीएमएमएल शोधकर्ताओं के लिए दुर्लभ अभिलेखीय संग्रह तक दूरस्थ पहुंच को संभव बनाता है

प्रविष्टि तिथि: 29 NOV 2025 1:35PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल), जो स्वतंत्रता के बाद से भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने के लिए समर्पित एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है, इसने अपने विशाल अभिलेखीय संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पीएमएमएल में दुर्लभ अभिलेखीय सामग्रियों का दुनिया का सबसे बड़ा संग्रह है, जिसमें 1,300 से ज़्यादा व्यक्तियों और संगठनों से संबंधित 2.5 करोड़ से ज़्यादा दस्तावेज़ शामिल हैं। आधुनिक और समकालीन भारतीय इतिहास का अध्ययन करने वाले प्रामाणिक शोधकर्ता और विद्वान नियमित रूप से इन अभिलेखों का अवलोकन करते हैं।

एक ऐतिहासिक पहल के तहत, पीएमएमएल अपने दुर्लभ अभिलेखीय संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत पत्र-पत्रिकाएँ, पत्राचार, भाषण, डायरियां और समाचार पत्र लेख शामिल हैं, का एक व्यापक डिजिटलीकरण परियोजना शुरू कर रहा है। यह परिवर्तनकारी प्रयास, वास्तविक शोधार्थियों के लिए सीमित दूरस्थ पहुंच को सक्षम करते हुए, नाजुक दस्तावेज़ों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। अक्सर उपयोग की जाने वाली सामग्री का एक बड़ा हिस्सा पहले ही डिजिटलीकृत, अपलोड और नव-विकसित प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराया जा चुका है।

इन डिजिटल अभिलेखागारों तक दूरस्थ पहुँच की सुविधा के लिए एक समर्पित सूचना प्रौद्योगिकी मंच बनाया गया है। पंजीकृत विद्वान अब विशिष्ट अभिलेखीय दस्तावेज़ों को देखने के लिए पीएमएमएल परिसर में आए बिना ऑनलाइन अनुरोध प्रस्तुत कर सकते हैं। स्वीकृत होने के बाद, अनुरोधित सामग्री केवल देखने के लिए विद्वान के कंप्‍यूटर पर सुरक्षित रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।

पीएमएमएल के डिजिटल अभिलेखागार का शुभारंभ, अमूल्य ऐतिहासिक संसाधनों की सुरक्षा करने तथा विश्व भर के शोधकर्ताओं, विद्वानों और ज्ञान चाहने वालों के लिए पहुंच बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

पीएमएमएल के निदेशक श्री अश्विनी लोहानी ने कहा कि यह पहल उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने और अभिलेखीय सामग्रियों तक आसान पहुंच बढ़ाकर आधुनिक और समकालीन भारत के अध्ययन को मजबूत करने के लिए संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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पीके/केसी/एमके/एसएस


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