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भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता प्रभावी

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2025 9:55PM by PIB Delhi

भारत और ईएफटीए सदस्य देशों (आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड) के बीच ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हो गया, जो दोनों पक्षों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ईएफटीए सदस्य देश सामूहिक रूप से वस्तु और सेवा व्यापार, दोनों में वैश्विक रूप से अग्रणी देशों में शामिल हैं। भारत और ईएफटीए सदस्य देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद लगभग 5.4 ट्रिलियन डॉलर है, जो गहन एकीकरण के लिए आधार प्रदान करता है।

इस अवसर पर नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम, समृद्धि शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी मेजबानी भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने की। ईएफटीए का प्रतिनिधित्व हेलेन बुडलिगर आर्टिडा, आर्थिक मामलों के लिए स्विस राज्य  सचिवालय में  विदेश सचिव; राग्नार क्रिस्टजंसन, आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में विदेश व्यापार और आर्थिक मामलों के महानिदेशक; क्रिस्टीन लिंग्ग, लिकटेंस्टीन के विदेश कार्यालय की उप  निदेशक; मे-एलिन स्टेनर भारत में नॉर्वे की राजदूत; और मार्कस श्लागेनहोफ, ईएफटीए के उप  महासचिव ने किया। इस कार्यक्रम में सभी पक्षों के कई व्यापारिक प्रतिनिधि भी एक साथ आए, जिससे नए संबंध स्थापित करने और विद्यमान साझेदारियों को सुदृढ़ करने का अवसर मिला। यह व्यावसायिक जुड़ाव उत्‍कृष्‍ट विनिर्माण और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में सह-उत्पादन के साथ-साथ पूर्वानुमानित गतिशीलता और योग्यताओं की मान्यता के माध्यम से सेवाओं का विस्तार करने में भी सहायता करेगा।

गणमान्य व्यक्तियों ने पंद्रह वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश जुटाने तथा दस लाख प्रत्यक्ष रोज़गारों के सृजन में सहायता करने तथा वितरण की निगरानी के लिए निवेश सुविधा तंत्र बनाने के साझा उद्देश्यों का स्वागत किया।

टीईपीए का प्रभावी होना ईएफटीए देशों और भारत के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने, सेतु का निर्माण करने और व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। दोनों पक्ष मानक सहयोग और विनियामकीय संवाद के माध्यम से, कुल व्यापार का विस्तार करके और वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में मूल्य-श्रृंखला एकीकरण को सुदृढ़ करके संतुलित और टिकाऊ परिणामों की प्राप्ति के लिए प्रयास करेंगे।

इस समझौते से व्यापक और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे, जिनमें अधिक लचीली और बेहतर एकीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं, व्यापार और निवेश प्रवाह में वृद्धि, रोज़गार के नए अवसर और सतत  आर्थिक विकास शामिल हैं। यह बेहतर बाज़ार पहुंच प्रदान करता है और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करता है, जिससे भारतीय और ईएफटीए व्यवसायों के लिए बढ़ते बाज़ारों में अपने प्रचालनों का विस्तार करना सुगम हो जाता है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच निवेश के अवसरों को सुगम बनाना और बढ़ावा देना भी है, जिससे भारतीय और ईएफटीए व्यवसायों के लिए नवोन्‍मेषण, विस्तार और समृद्धि का वातावरण तैयार हो सके। दोनों पक्षों ने दर्ज किया कि वस्तुओं के व्यापार में समय के साथ लगातार वृद्धि हुई है और पिछले दशक में सेवाओं का व्यापार लगभग दोगुना हो गया है। दोनों पक्ष कुल द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करने का प्रयास करेंगे।

भारत-ईएफटीए टीईपीए पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। यह साझेदारी लचीली और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और भरोसेमंद साझेदारों के रूप में उनके बीच संबंधों का विस्तार करने की दिशा में दोनों पक्षों के प्रयासों के अनुरूप है।

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पीके/केसी/एसकेजे/आर


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