वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत और अफ्रीका 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए काम करेंगे: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 20वें सीआईआई भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य भाषण दिया
भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन व्यापार और भागीदारी के लिए एक निर्णायक मंच के रूप में विकसित हुआ है: श्री पीयूष गोयल
अफ्रीका की किफायती गतिशीलता समाधानों की बढ़ती मांग को पूर्ण करने में भारतीय निर्माता अहम भूमिका निभा सकते हैं: श्री गोयल
भारत और अफ्रीका कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अहम खनिजों, नवीकरणीय ऊर्जा और सेवाओं में एक-दूसरे के पूरक हैं: श्री गोयल
Posted On:
29 AUG 2025 4:06PM by PIB Delhi
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में सीआईआई इंडिया-अफ्रीका बिज़नेस कॉन्क्लेव के 20वें संस्करण के समापन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए कहा कि भारत और अफ्रीका को वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए कार्य करना चाहिए, जिसमें मूल्य संवर्धन, तकनीक-संचालित कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम मिलकर कच्चे माल के निर्यात से आगे बढ़कर वैश्विक बाज़ारों के लिए मूल्यवर्धित उत्पादन की ओर बढ़ सकते हैं।" उन्होंने कहा कि 20 साल पहले शुरू हुए इस कॉन्क्लेव के विचार ने अफ्रीकी देशों के अवसरों और क्षमताओं को उजागर किया है और साथ ही अफ्रीका और भारत दोनों की शक्ति को भी प्रदर्शित किया है।
श्री गोयल ने बताया कि भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले से ही काफी संतुलित है — भारत का निर्यात 42.7 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 40 अरब अमेरिकी डॉलर है। हालाँकि, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अप्रयुक्त संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा, "यह उन अवसरों को दर्शाता है जिन्हें हमने वर्षों से गँवा दिया है, और आज विस्तार की कितनी गुंजाइश है।"
मंत्री महोदय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और अफ्रीका को हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उन्हें एक-दूसरे के पूरक क्षेत्रों की तलाश करनी चाहिए। उन्होंने कृषि, खाद्य सुरक्षा, सहकारी और स्वयं सहायता समूह आंदोलन, शिक्षा, कौशल विकास, क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, स्टार्ट-अप, स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जो पारस्परिक लाभ के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।
श्री गोयल ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अफ्रीका प्रति वर्ष लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के मोटर वाहनों का आयात करता है, जबकि भारत वर्तमान में इस मांग का केवल लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर ही पूरा करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय ऑटोमोबाइल लागत और गुणवत्ता, दोनों ही दृष्टि से विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और इनके विनिर्माण मानक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्माता अफ्रीका में यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों तथा किफायती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधानों की बढ़ती माँग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे अफ्रीकी देशों के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विश्वसनीय, ईंधन-कुशल और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ वाहनों तक पहुँच के व्यापक अवसर खुलते हैं, जबकि बदले में भारत महत्वपूर्ण खनिजों, पेट्रोलियम उत्पादों और कृषि सामानों जैसे अफ्रीकी संसाधनों के अधिक आयात से लाभान्वित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह संतुलित आदान-प्रदान दोनों क्षेत्रों को व्यापार बढ़ाने, रोज़गार सृजन करने और दीर्घकालिक औद्योगिक भागीदारी निर्माण में सहायता करेगा।
श्री गोयल ने कहा कि सामूहिक रूप से, भारत के समान एक अरब से अधिक जनसंख्या वाले अफ्रीकी देश समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा रखते हैं। जिस प्रकार भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहा है, उसी प्रकार अफ्रीका भी प्रत्येक नागरिक तक समृद्धि पहुँचाने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सम्मेलन साझा समृद्धि की इस यात्रा में भारत-अफ्रीका संबंधों को मज़बूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पूरकताओं पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि अफ्रीका महत्वपूर्ण खनिजों और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भारत का सहयोग कर सकता है, जबकि भारत खाद्य सुरक्षा, तकनीकी उन्नयन, विनिर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में अफ्रीका का सहयोग कर सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत वास्तुकला, इंजीनियरिंग, आईटी, एआई और दूरसंचार जैसी सेवाओं में लागत-प्रतिस्पर्धी है, साथ ही चिकित्सा पर्यटन में भी अपार संभावनाएँ से परिपूर्ण है।
मॉरीशस के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों का उल्लेख करते हुए, श्री गोयल ने दुग्ध उत्पादों, खाद्य तेलों और चावल जैसी आवश्यक वस्तुओं में मुद्रास्फीति के दबाव से निपटने में मॉरीशस को निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, "यही मित्रता और सहयोग की भावना है जो अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव को परिभाषित करती है।"
श्री गोयल ने कोविड-19 महामारी के दौरान अफ्रीका को भारत द्वारा दिए गए सहयोग का भी स्मरण किया, जब विकसित देशों के महंगे विकल्पों की तुलना में दवाइयाँ, टीके और दवा उत्पाद भारत द्वारा किफायती दामों पर उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि भारत का एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (यूपीआई) लेनदेन लागत को कम करने और अफ्रीका की वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करने में सहायता कर सकता है।
श्री गोयल ने कहा, "भारत और अफ्रीका मिलकर 2 अरब से ज़्यादा लोगों और वैश्विक जनसंख्या के एक-तिहाई का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारा साझा इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और चिरस्थायी मित्रता भविष्य के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।" उन्होंने महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा को दोनों क्षेत्रों के बीच प्रगाढ़ संबंधों का प्रतीक बताया।
ग्लोबल साउथ को विकासशील दुनिया की सच्ची आवाज़ बताते हुए, श्री गोयल ने अफ्रीकी देशों से विश्व व्यापार संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया ताकि साझा उद्देश्य निर्धारित किए जा सकें और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने कृषि प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा, जेनेरिक दवाओं, अहम खनिजों और युवा भागीदारी में सहयोग पर बल दिया और कहा कि भारत और अफ्रीका की युवा जनसंख्या भविष्य का निर्धारण करेगी।
भारत के साथ सभी अफ्रीकी देशों को बड़े पैमाने पर संबंध प्रगाढ़ करने का निमंत्रण देते हुए, श्री गोयल ने कहा:
"हमारे संबंध सिर्फ़ इतिहास या व्यापार तक सीमित नहीं है - यह साझा सपनों, चुनौतियों और साझा समाधानों के हैं। साथ मिलकर, हम अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बदल सकते हैं, युवाओं को सशक्त बना सकते हैं और प्रत्येक नागरिक के लिए समृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं। भविष्य हमारे हाथ में है।"
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पीके/केसी/एजे
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