महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
टेक होम राशन के लिए पंजीकृत 75.12 प्रतिशत पात्र लाभार्थियों के लिए फेस कैप्चरिंग और ई-केवाईसी का कार्य पूरा किया जा चुका है
प्रविष्टि तिथि:
08 AUG 2025 2:52PM by PIB Delhi
15वें वित्त आयोग के तहत, कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों (आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14-18 वर्ष की आयु) के लिए योजना जैसे विभिन्न घटकों को मिशन सक्षम आंगनवाड़ी तथा पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत शामिल किया गया है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जहाँ विभिन्न गतिविधियों के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की है। यह मिशन एक सार्वभौमिक स्व-चयनित व्यापक योजना है जहाँ किसी भी लाभार्थी के लिए पंजीकरण और सेवाएँ प्राप्त करने में कोई प्रवेश बाधा नहीं है।
इस मिशन के अंतर्गत, बच्चों (6 माह से 6 वर्ष तक), गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को जीवन चक्र दृष्टिकोण अपनाकर कुपोषण के पीढ़ी-दर-पीढ़ी चक्र को तोड़ने हेतु पूरक पोषण प्रदान किया जाता है। पूरक पोषण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की अनुसूची-II में निहित पोषण मानदंडों के अनुसार प्रदान किया जाता है। इन मानदंडों को जनवरी 2023 में संशोधित किया गया है। पुराने मानदंड काफी हद तक कैलोरी-विशिष्ट थे; तथापि, संशोधित मानदंड आहार विविधता के सिद्धांतों के आधार पर पूरक पोषण की मात्रा और गुणवत्ता दोनों के संदर्भ में अधिक व्यापक और संतुलित हैं जो गुणवत्ता वाले प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक वसा और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
शुरूआत में, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) मॉड्यूल को अगस्त 2024 में प्रायोगिक तौर पर लागू किया गया था। इसे दिसंबर 2024 में वैकल्पिक आधार पर पूरे भारत में लागू किया गया था। तब से, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में कर्तव्यधारकों को लाभार्थियों को चेहरे की पहचान करने और आधार डेटाबेस के साथ सत्यापित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। 1 जुलाई 2025 से इसे पात्र अंतिम लाभार्थी तक टेक-होम राशन की प्रदायगी सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है। एफआरएस मॉड्यूल को पोषन ट्रैकर एप्लिकेशन के भाग के रूप में तैयार किया गया है। आधार पहचान के माध्यम से लाभार्थी का सत्यापन करने के लिए, लाभार्थी की लाइव फोटो को कैप्चर करने के साथ-साथ ईकेवाईसी किया जाता है। पोषण ट्रैकर पर यह ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया लाभार्थी के जीवनकाल में एक बार की जाती है। मासिक आधार पर टेक-होम राशन का लाभ उठाने के लिए, फेस मैचिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में की जा सकती है तथा दुबारा ईकेवाईसी की जरुरत नहीं होती है। कम डिजिटल कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को देखते हुए ऑफलाइन पद्धति शुरू की गई है। फेसिअल रिकॉग्निशन फीचर लो वर्जन एंड वाले फ़ोनों में भी उपलब्ध करायी गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए बाल आधार में कोई बायोमेट्रिक डेटा नहीं होता है; इसलिए, 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए, माता/पिता/अभिभावक का एफआरएस किया जा रहा है, न कि बच्चे का।
5 अगस्त 2025 तक, टेक होम राशन (टीएचआर) के लिए पंजीकृत 4.91 करोड़ पात्र लाभार्थियों में से 3.69 करोड़ टीएचआर लाभार्थियों का फेस कैप्चरिंग और ई-केवाईसी (लगभग 75.12 प्रतिशत) पूरा हो चुका है।
एनईजीडी राज्य समन्वयकों द्वारा नियमित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा, तकनीकी कठिनाइयों को समझने और उनका समाधान करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय दौरे और राज्य अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें भी की गई हैं।
सिस्टम में विभिन्न डेटा सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। उनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया गया है:
- लाभार्थी का एकत्रित किया गया डेटा सभी मौजूदा डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के अधीन होता है, जिसमें सीमित उद्देश्य, सूचित सहमति और सीमित पहुँच शामिल हैं।
- फेस वेरिफिकेशन से संबंधित सभी अनुरोध और प्रतिक्रियाएँ ट्रांज़िट के दौरान एन्क्रिप्ट की जाती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि डेटा को इंटरसेप्शन या छेड़छाड़ से बचाया जा सके।
- डिवाइस पर कोई भी चित्र या डेटा स्थायी रूप से संग्रहीत नहीं होता है। एहतियात के तौर पर, जब आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री एप्लिकेशन से लॉग आउट करती हैं, तो सभी कैश्ड या अस्थायी डेटा स्वचालित रूप से मिट जाता है।
- निजी डेटा सार्वजनिक रूप से सुलभ नहीं होता है; यह केवल सत्यापन उद्देश्यों के लिए अधिकृत कर्मियों के लिए ही उपलब्ध होता है।
- पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन का उपयोग आमतौर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों द्वारा किया जाता है और यह जनता या किसी अनधिकृत पक्ष के लिए अधिकृत नहीं है। पहुंच भूमिका-आधारित है तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए लॉग्ड और निगरानी की जाती है।
- इसके अलावा, एप्लिकेशन का आंतरिक डेटाबेस एन्क्रिप्टेड होता है, जिससे ऐप के बाहर संवेदनशील जानकारी तक एक्सेस को रोका जा सकता है।
- सुरक्षित प्रक्रिया और प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए फेस इमेजेज को ऐप के भीतर एन्कोडेड प्रारूप में प्रबंधित किया जाता है।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2154204)
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