संस्कृति मंत्रालय
भारत में जनजातीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थिति और विस्तार
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2025 3:25PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने जनजातीय संस्कृति सहित लोक कला और संस्कृति के विभिन्न रूपों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन हेतु पटियाला (पंजाब), नागपुर (महाराष्ट्र), उदयपुर (राजस्थान), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), दीमापुर (नगालैंड) और तंजावुर (तमिलनाडु) में मुख्यालयों के साथ सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) स्थापित किए हैं। ये क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र देशभर में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और संगोष्ठियों का आयोजन करते हैं, जिसमें वे पूरे भारत से लोक/जनजातीय कलाकारों को शामिल करते हैं, जिन्हें इन कार्यक्रमों के दौरान अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त होता है।
सभी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र अपने कार्यक्रम स्थलों जैसे सभागार, प्रदर्शनी दीर्घाएं, पुस्तकालय और कलाकारों और शिल्प प्रदर्शनों की मेजबानी के लिए शिल्पग्राम/कलाग्राम सुविधाओं के साथ कार्य करते हैं।
सभी क्षेत्रीय सामुदायिक केंद्र (जेडसीसी) आदिवासी भाषाओं, कहानियों, शिल्प और प्रदर्शन कलाओं को जीवित रखने के लिए निम्नलिखित गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं: -
- स्थानीय लोगों और भाषा विशेषज्ञों की सहायता से लुप्तप्राय आदिवासी भाषाओं और बोलियों की रिकार्डिंग और दस्तावेज़ीकरण
- आदिवासी लोककथाओं और मौखिक इतिहास पर पुस्तकें, रिपोर्ट और कहानियों को प्रकाशित करना
- आदिवासी शिल्प, रंगमंच, संगीत और नृत्य पर प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यशालाएं आयोजित करना
- वार्षिक आदिवासी उत्सव, शिल्प मेले और कला शिविरों का आयोजन करना
- अद्वितीय आदिवासी संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने के लिए कलाकारों को भारत के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन करने के लिए नियुक्त किया जाता है
- आदिवासी शोधकर्ताओं, लेखकों और युवा कलाकारों को फेलोशिप, अनुदान और प्रदर्शन के अवसर प्रदान करके उनको प्रोत्साहित करना
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पीके/एके/केसी/पीसी/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2149292)
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